स्वास्थ्यपूणे

मधुमेहीं मरीजों के लिए शुरू की गई विभिन्न पहलों से दैनंदिन जीवन आसान

मधुमेहीं मरीजों के लिए शुरू की गई विभिन्न पहलों से दैनंदिन जीवन आसान

 

पुणे,: केईएम हॉस्पिटल रिसर्च सेंटर,पुणे के डायबेटिस युनिट ने शुरू किए विभिन्न पहलों से मधुमेही और उनके परिवारों का दैनंदिन जीवन आसान हो गया है. ये विभिन्न पहल मधुमेह के लिए संपूर्ण मार्गदर्शन और सहायता प्रदान करती हैं, जिसमें दैनंदिन व्यवस्थापन पर सलाह और साधने ,तथा माता-पिता के लिए मार्गदर्शन शामिल है. इसका मुख्य उद्देश्य मधुमेह व्यवस्थापन सहित अस्पताल में आने के अवसर को कम करना है, साथ ही एक सहायक और संवादात्मक वातावरण का निर्माण करना है.

 

टाईप 2 मधुमेह के लिए एकही छत के नीचे व्यापक सेवा

 

डायबेटीस मेलिटस, जिसे आमतौर पर मधुमेह के रूप में जाना जाता है, एक ऐसी स्थिति है जिसमें रक्त शर्करा का स्तर लगातार बढ़ा रहता है. यह स्थिति तब होती है, जब स्वादुपिंड पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन नहीं कर पाता या शरीर अपने द्वारा उत्पादित इंसुलिन का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर पाता. मधुमेह के मुख्य प्रकार हैं: टाइप 1, टाइप 2 और गर्भावस्था के दौरान मधुमेह.

 

टाइप 2 डायबिटीज़ (T2D) वयस्कों में डायबिटीज़ का सबसे सामान्य प्रकार है, जब शरीर अपने द्वारा उत्पादित इंसुलिन का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर पाता (इंसुलिन प्रतिरोध). मोटापा, निष्क्रियता, बैठी जीवनशैली, तनाव और पारिवारिक इतिहास यह T2D के प्रमुख जोखिम कारक हैं. ‘लक्षण न दिखना ‘ T2D का सबसे सामान्य लक्षण है, क्योंकि भूख, प्यास और पेशाब में वृद्धि और वज़न कम होना जैसे लक्षण शुरुआती चरणों में स्पष्ट नहीं होते. इसलिए, रक्त शर्करा के स्तर की नियमित जाँच से शीघ्र निदान और समय पर उपचार में मदद मिल सकती है.

 

टी2डी व्यवस्थापन में 5 प्रमुख घटक शामिल हैं – आहार, व्यायाम, नियमित देखभाल, दवा और योग्य जानकारी इनका समावेश है. अनियंत्रित मधुमेह से हृदय, किडनी, आँखें, मस्तिष्क, नसों और पैरों जैसे महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुँचा सकता है.

 

टाईप 2 मधुमेह के लिए केईएम हॉस्पिटल,पुणे में सभी सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध हैं. जिसमे डायबेटिस रिनल ओपीडी,फिजिओथेरपी क्लिनिक,फूट क्लिनिक,जीडीएम क्लिनिक (गर्भावस्था में होनेवाला मधुमेह) व न्युट्रिशन क्लिनिक का समावेश है. जिसे विशेषज्ञ, डॉक्टर्स,प्रमाणित आहार विशेषज्ञ ,लॅब तंत्रज्ञ इनका मजबूत समर्थन प्राप्त है.आज तक 10,000 से अधिक मरीजों का रजिस्ट्रेशन किया जा चुका है और यह विभाग व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुसार सेवाएं प्रदान करने के साथ-साथ जागरूकता उपक्रम भी चलाता है.

 

टाईप १ मधुमेहीयों के लिए विविध उपक्रम

 

केईएम हॉस्पिटल पुणे द्वारा 2018 में क्लबवन केईएम यह उपक्रम शुरू किया गया.इसमें व्हॉटसॲप ग्रुप,56 शैक्षणिक व्हिडिओज वाला युट्युब चॅनल,फेसबुक पेज इनका समावेश आहे. इसमें 800 सदस्य जोड़े गए हैं.इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से विशेषज्ञ मार्गदर्शन, अनुभवों का आदान-प्रदान और जानकारी पर उपक्रम चल रही हैं

 

 

इसके अलावा, टाइप 1 मधुमेह मरीजों और उनके देखभाल करने वालों के लिए मधुरक्षा मोबाईल ॲप्लिकेशन शुरू किया गया. यह निःशुल्क ॲप्लिकेशन अँड्रॉईड व आयओएसपर उपलब्ध है.इसमें 800 सक्रिय उपयोगकर्ता भी हैं और 2000 लोगों ने इस ॲप को डाउनलोड किया है. यह इंसुलिन मार्गदर्शन , ग्लुकोज मॉनिटरिंग , कार्बोहाइड्रेट गिनती, यात्रा के दौरान बढ़ती जाने वाली सावधानियों, सामान्य प्रश्नावली के उत्तर आदि के बारे में मार्गदर्शन प्रदान करता है. सभी जानकारी मराठी, हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध है. एक तैयार रेडीरेकनर की तरह, यह ॲप, पॉकेट डायबडी से मरीज और देखभाल करने वालों को योग्य जानकारी प्रदान करता है.

 

 

टाइप 1 मधुमेह से पीड़ित बच्चों के लिए रोज इंसुलिन इंजेक्शन और नियमित रक्त शर्करा का निरीक्षण यह उपचार का हिस्सा है. बच्चे ज्यादातर समय स्कूल में रहते हैं. स्कूल में उन्हें एक अथवा दो स्नैक्स मिलते हैं, इसलिए शुगर लेवल की जाँच और इंसुलिन लेना जरूरी है. इसी को देखते हुए, एनसीपीसीआर (राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग) ने स्कूल के समय और परीक्षा के दौरान शुगर लेवल की जाँच और इंसुलिन के इंजेक्शन देने की अनुमति देने का आदेश दिया है. इसलिए, स्कूल में इंसुलिन और उससे जुड़ी सामग्री ले जाना ज़रूरी है. हालाँकि, इंसुलिन के स्टोरेज और सर्वोत्तम परिणामों के लिए 4 से 8 डिग्री के तापमान की आवश्यकता होती है. इस आवश्यकता को पूरा करने और मधुमेह व्यवस्थापन के लिए आवश्यक सभी सामग्रियों को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने के लिए, केईएम हॉस्पिटल रिसर्च सेंटरने डायबॅग नामक एक विशेष बैग विकसित किया है. इसमें इंसुलिन के लिए एक कोल्ड कम्पार्टमेंट, एक ग्लूकोमीटर, अन्य आवश्यक सामान और आपातकालीन संपर्क नंबर शामिल हैं. यह डायबैग तब प्रभावी रूप से काम आता है जब बच्चे घर से दूर होते हैं और हाइपोग्लाइसीमिया जैसी आपातकालीन स्थितियों में समय पर मदद प्रदान कर सकते है.

 

क्लबवन केईएम मरीजों की भागीदारी और सशक्तिकरण के लिए कई कार्यशालाओं, प्रतियोगिताओं और आउटडोर शिबिरों का भी आयोजन करता है.

 

इन गतिविधियों के परिणामस्वरूप स्व व्यवस्थापन कौशल का विकास हुआ है और इससे मधुमेह व्यवस्थापन में उपयोगकर्ताओं का आत्मविश्वास बढ़ा है. कुल मिलाकर, टाइप 1 मधुमेह मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार हुआ है. इतने बड़े समुदाय से जुड़ने से एक सहयोगात्मक और संवादात्मक वातावरण बना है और मानसिक सहायता भी मिली है.

 

टाइप 1 डायबिटीज़ ( टीआयडी ) एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली स्वादुपिंड में इंसुलिन बनाने वाली बीटा कोशिकाओं पर हमला करती है. इसके परिणामस्वरूप शरीर में इंसुलिन की कमी हो जाती है या इंसुलिन का उत्पादन ही नहीं होता. टाइप 1 डायबिटीज़ ज्यादातर बच्चों या किशोरों में होती है. ग्लूकोज़ के योग्य स्तर बनाए रखने के लिए रोज़ाना इंसुलिन इंजेक्शन की ज़रूरत होती है. सही इंसुलिन प्रमाण, नियमित रक्त शर्करा का निरीक्षण और स्वस्थ आहार एवं जीवनशैली के साथ, टाइप 1 मधुमेह से पीड़ित लोग बेहतर जीवन स्तर प्राप्त कर सकते हैं और मधुमेह संबंधी जटिलताओं से बच सकते हैं. हालाँकि, इंसुलिन की सीमित उपलब्धता और उचित स्वास्थ्य सेवा की कमी जटिलताओं के जोखिम को बढ़ा सकती है. इसके अतिरिक्त, टाइप 1 मधुमेह के उपचार का खर्च एक बड़ी समस्या है, विशेष रूप से गरीब परिवारों के लिए.

 

आईडीएफ ॲटलस के अनुसार, नए निदान किए गए टाइप 1 मधुमेह (15 वर्ष से कम आयु के बच्चों) के मामले में भारत दूसरे स्थान पर है. इस आँकड़े के अनुसार, हर साल 11,300 बच्चों में टाइप 1 मधुमेह का निदान होता है. टाइप 2 मधुमेह के मामले में कई तरह के संशोधन और सार्वजनिक आरोग्य उपक्रम हैं, लेकिन टाइप 1 मधुमेह के मामले में अभी तक पर्याप्त पहल नहीं हुई हैं.

 

 

इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए, केईएम हॉस्पिटल पुणे ने कई पहल शुरू की हैं. इलाज में साहाय्य और इस संबंध में और अधिक संशोधन करने के लिए, हिंदुजा फाउंडेशन के डायबेटिस युनिट को सहयोग मिला है.इसके अलावा, मुकुल माधव फाउंडेशन और नित्याशा फाउंडेशन जैसे स्वयंसेवी संगठनों और व्यक्तिगत दानदाताओं को भी जरूरतमंद मरीजों के इलाज में मदद के लिए केईएम हॉस्पिटल के साथ जोड़ा गया है.

 

 

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