पूणे

परिचारिकाओं को उचित वेतन, सम्मान और सुरक्षा देने के लिए प्रयासरत

परिचारिकाओं को उचित वेतन, सम्मान और सुरक्षा देने के लिए प्रयासरत

एआई’ आने से नर्स की भावनात्मक सहयोग की जगह कोई नहीं ले सकता

डॉ. एनी कुमार का मत; नर्सिंग छात्रों के लिए आयोजित तीन दिवसीय द्वैवार्षिक राष्ट्रीय नर्सिंग सम्मेलन का उद्घाटन

 

पुणे विशाल सिंह: “उन्नत तकनीक का उपयोग, भावनात्मक सहयोग और मानवीय स्पर्श—यही एक उत्तम परिचारिका की पहचान है। नर्सिंग पेशे में ज्ञान का अद्यतन, तकनीक-सुलभ कार्यपद्धति और नर्सों को उचित मानधन, सम्मान व सुरक्षा दिलाने के लिए हम लगातार प्रयास कर रहे हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग बढ़ रहा है, लेकिन नर्स के भावनात्मक आधार और मानवीय स्पर्श की जगह कोई नहीं ले सकता,” यह प्रतिपादन द ट्रेन्ड नर्सेस एसोसिएशन ऑफ इंडिया (TNAI) की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. एनी कुमार ने किया।

 

द ट्रेन्ड नर्सेस एसोसिएशन ऑफ इंडिया (TNAI) और TNAI महाराष्ट्र राज्य द्वारा आयोजित और MAEER’s विश्वराज इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग में हुए तीन दिवसीय 31वें द्वैवार्षिक राष्ट्रीय नर्सिंग सम्मेलन के उद्घाटन के बाद वह पत्रकारों से बातचीत कर रही थीं। लोणी कालभोर स्थित राजबाग के वर्ल्ड पीस डोम में आयोजित इस कार्यक्रम में TNAI की राष्ट्रीय महासचिव एवलिन कन्नन, पश्चिम क्षेत्र की उपाध्यक्ष दीपकमल व्यास, महाराष्ट्र शाखा के अध्यक्ष राजाभाऊ राठौड़, सचिव रत्ना देवरे, तथा विश्वराज इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग के प्राचार्य डॉ. शिवचरणसिंह गंधार उपस्थित थे। नर्सिंग की प्रणेता फ्लोरेंस नाइटिंगेल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि और दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। देशभर से आए 3,000 से अधिक नर्सिंग छात्र इस सम्मेलन में शामिल हुए।

 

डॉ. एनी कुमार ने कहा, “इस सम्मेलन का उद्देश्य नर्सिंग छात्रों को नेटवर्किंग, विचारों के आदान–प्रदान, नए ट्रेंड, नए पाठ्यक्रम और नई तकनीक से अवगत कराना है। नर्सिंग पेशा किसी अन्य पेशे से अधिक मानवीय सेवा से जुड़ा है। देश में नर्सिंग शिक्षण संस्थानों का जाल बढ़ा है, लेकिन सरकारी संस्थानों एवं अस्पतालों में नर्सों को मिलने वाला मानधन और सुविधाएँ निजी संस्थानों की तुलना में बहुत कम हैं। यह नर्सेस के सामने एक गंभीर चुनौती है। उनके काम के घंटे और सुरक्षा भी बेहद महत्त्वपूर्ण मुद्दे हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”

 

एवलिन कन्नन ने बताया कि नर्सिंग पाठ्यक्रम में समय-समय पर आवश्यक बदलाव किए जाते हैं। स्वास्थ्य सेवाओं में तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों—नई मशीनें, उपकरण, प्रक्रियाएँ—इन सभी की जानकारी और प्रशिक्षण नर्सों को दिया जाता है। इसी कारण इस सम्मेलन की थीम “Learning Today, Leading Tomorrow” रखी गई है। उन्होंने कहा कि नर्सिंग क्षेत्र तकनीकी स्वास्थ्य सेवाओं से अलग नहीं रह सकता, और प्रशिक्षण के माध्यम से यही विश्वास छात्रों में विकसित किया जा रहा है।

 

दीपकमल व्यास ने बताया कि नर्सों के लिए नर्सिंग काउंसिल द्वारा विभिन्न अवधि के कई प्रमाणपत्र कोर्स संचालित किए जाते हैं। उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्तियाँ और फेलोशिप उपलब्ध कराई जाती हैं। नर्सों के लिए कम दर पर रहने-खाने की व्यवस्था भी होती है। इसके अलावा स्पेस नर्सिंग, टेलीकम्युनिकेशन नर्सिंग, सिमुलेशन नर्सिंग जैसे उभरते हुए क्षेत्रों में भी अध्ययन की सुविधा उपलब्ध है। कैंपस इंटरव्यू और प्लेसमेंट गतिविधियाँ भी नियमित रूप से आयोजित की जाती हैं।

 

रत्ना देवरे ने सम्मेलन में होने वाले कार्यशालाओं, चर्चासत्रों और संवादों की जानकारी दी। वहीं राजाभाऊ राठौड़ ने नर्सिंग छात्रों की अन्य प्रतिभाओं को सामने लाने के लिए आयोजित प्रतियोगिताओं की जानकारी साझा की। प्राचार्य डॉ. गंधार ने इस महत्वपूर्ण सम्मेलन की मेजबानी विश्वराज नर्सिंग इंस्टीट्यूट को मिलने पर खुशी व्यक्त की।

विदेशों में भारतीय नर्सों की बड़ी मांग

भारत में नर्सिंग क्षेत्र भले ही अपेक्षित ग्लैमर प्राप्त न करता हो, लेकिन विदेशों में स्थिति बिल्कुल अलग है। कई देशों में नर्सिंग को एक अत्यंत सम्मानित एवं महत्वपूर्ण करियर माना जाता है। प्लेसमेंट प्रोग्रामों के माध्यम से भारतीय नर्सों को अब सीधे विदेशों में सेवा देने का अवसर मिल रहा है। “विश्व स्तर पर भारतीय नर्सों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है,” यह जानकारी एवलिन कन्नन ने दी।

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