पूणे

युद्ध और आतंक किसी समस्या का समाधान नहीं : प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता मुकेश खन्ना

युद्ध और आतंक किसी समस्या का समाधान नहीं : प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता मुकेश खन्ना

पुणे विशाल समाचार:

“आज सम्पूर्ण विश्व अशांत है। बम विस्फोट, दंगे, आतंकवाद तेजी से बढ़ रहे हैं। साम्राज्यवादी देशों के बीच युद्ध जैसी होड़ ने स्थिति और अधिक गंभीर बनाई है। किंतु युद्ध और आतंक किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकते। विश्वशांति और अहिंसा के लिए हम सभी को मिलकर प्रयास करना होगा।”

यह उद्गार ‘शक्तिमान’ और ‘महाभारत’ धारावाहिक में भीष्म पितामह की भूमिका से प्रसिद्ध वरिष्ठ फिल्म अभिनेता मुकेश खन्ना ने व्यक्त किए।

वे एमआईटी विश्वशांति विश्वविद्यालय, कोथरूड, पुणे द्वारा आयोजित 30वीं तत्त्वज्ञ संत श्री ज्ञानेश्वर एवं संत श्री तुकाराम महाराज स्मृति व्याख्यानमाला के तीसरे सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।

 

कार्यक्रम में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड रिसर्च (IISR) के अध्यक्ष डॉ. अरविंद नातू, यशदा (IAS अकादमी) के संचालक रंगनाथ नाईकडे, डॉ. बी. एस. नागोबा, दूरदर्शन के माजी कार्यकारी अधिकारी डॉ. मुकेश शर्मा, डॉ. मिलिंद पात्रे, डॉ. दिपेंद्र शर्मा, डॉ. भरत चौधरी आदि मान्यवर उपस्थित थे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वधर्मी प्रा. डॉ. विश्वनाथ कराड ने की।

मोबाइल के अत्यधिक उपयोग पर चिंता

मुकेश खन्ना ने कहा,“आज के बच्चे ही भविष्य की नींव हैं, लेकिन मोबाइल और आभासी दुनिया में अत्यधिक उलझाव के कारण वे अधिक अस्थिर होते जा रहे हैं। उन्हें मोबाइल के दुष्प्रभावों से दूर रखना बड़ा चुनौतीपूर्ण कार्य बन गया है। बच्चों में नैतिकता के संस्कार विकसित करने के लिए संस्कृत आधारित शिक्षा प्रणाली आवश्यक है।”

संत साहित्य से विश्वबंधुत्व का संदेश

रंगनाथ नाईकडे ने अपने विचार रखते हुए कहा,

“संतों के विचार ही आज विश्वबंधुत्व की भावना को मजबूती दे सकते हैं। बच्चों और युवाओं में संत साहित्य का संस्कार देना अत्यंत आवश्यक है। योग, ध्यान एवं अध्यात्म के माध्यम से बच्चे अधिक सक्षम और संतुलित बन सकते हैं। उच्च लक्ष्य प्राप्त करने के लिए कौशल आधारित शिक्षा ही आवश्यक है।”

 

विज्ञान और अध्यात्म—एक ही सत्य की दो धाराएँ

 

डॉ. अरविंद नातू ने कहा,“विज्ञान और अध्यात्म एक ही नाणे के दो पहलू हैं। विज्ञान कृत्रिम औषधियों के माध्यम से उपचार देता है, जबकि अध्यात्म योग, ध्यान और मेडिटेशन के माध्यम से प्राकृतिक उपचार प्रदान करता है। आज मानसिक स्वास्थ्य गंभीर चुनौती बन रहा है—अध्यात्म ही इसका वास्तविक समाधान है।”

विश्वशांति का मार्ग : मानवता और संत विचार

अध्यक्षीय भाषण में प्रा. डॉ. विश्वनाथ कराड ने कहा,

“विश्वशांति के लिए कार्य करने वाले सभी लोगों को एक मंच पर लाने हेतु यह व्याख्यानमाला हर वर्ष आयोजित की जाती है। ज्ञानोबा-तुकोबाओं का विश्वबंधुत्व का संदेश आज भी विनाश की ओर बढ़ते विश्व को दिशा देता है। केवल विश्वमानवता की भावना ही शांति ला सकती है। हम सभी को इस मार्ग के पथिक बनना होगा।”

कार्यक्रम का संचालन प्रा. सचिन गाडेकर ने किया। प्रास्ताविक तथा आभार प्रदर्शन डॉ. मिलिंद पात्रे ने किया।

 

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