पूणे

सकारात्मक विचार बेहतर भविष्य का निर्माण करते हैं ,

सकारात्मक विचार बेहतर भविष्य का निर्माण करते हैं ,

प्रसिद्ध वक्ता, इतिहासकार नितिन बानुगड़े – पाटिल के विचार

 

पुणे विशाल सिंह : “आध्यात्मिकता और मन का गहरा संबंध है। हमारे मन की शक्ति और बुद्धि मन में उठने वाले विचारों से निर्मित होती है। विचार हमें ऊर्जा, प्रेरणा और दिशा देते हैं। विचारों की स्पष्टता और सकारात्मक सोच बेहतर भविष्य का निर्माण करती है।” ये विचार सुप्रसिद्ध वक्ता एवं इतिहासकार नितिन बानुगडे पाटिल ने व्यक्त किये। वह एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी, कोथरुड, पुणे द्वारा आयोजित ३० वें दार्शनिक संत श्री ज्ञानेश्वर एवं संत श्री तुकाराम महाराज स्मृति व्याख्यान श्रृंखला के छठे पुष्पांजलि सत्र में मुख्य अतिथि के तोर पर बोल रहे थे।

केशव वेल्हाळ, नागपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. एस. एन. पठान, प्रसिद्ध व्याख्याता डॉ. संजय उपाध्ये इस अवसर पर अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

प्रो. शरदचंद्र दराडे – पाटिल, ॲड. रियाज पडवीकर, एमआईटी विश्वशांति विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. रविकुमार चिटणीस, डॉ. मिलिंद पात्रे आदि भी उपस्थित थे। विश्वधर्मी प्रोफेसर डॉ. विश्वनाथ कराड कार्यक्रम के अध्यक्ष थे।

 

केशव वेल्हाळ ने कहा, “ओम सृष्टि का मूल है और संपूर्ण ब्रह्मांड का प्रतीक है। ओंकार को भारतीय दर्शन का सार माना जाता है। ओम क्वांटम कंप्यूटिंग प्रौद्योगिकी में विश्व शांति का मार्ग देता है।”

डॉ. संजय उपाध्ये ने कहा, “सभी को समान दृष्टि से देखने की भूमिका संत साहित्य से निर्मित होती है। मानवतातीर्थ भवन आज वैश्विक स्तर पर समानता, समता और मानवता के आदर्श प्रतीक के रूप में पहचाना जाने लगा है। विश्व शांति के लिए डॉ. विश्वनाथ कराड सर के असीम कार्य की यह मान्यता सदैव बनी रहेगी।”

डॉ. एस. एन. पठान ने कहा, “आज समाज में सांप्रदायिक सद्भाव की बहुत आवश्यकता है। हिंदू मुस्लिम एकता से कई समस्याओं का समाधान हो जाएगा। सभी को मानवता को मुख्य सूत्र मानकर मिलजुल कर रहना चाहिए।”

प्रोफेसर डॉ. विश्वनाथ कराड ने कहा, ”शिवाजी महाराज ने सभी जाति और धार्मिक सीमाये हटाके स्वराज्य का निर्माण किया। उनकी भूमिका वसुधैव कुटुंबकम के सार्वभौमिक विचार की पूरक थी। केवल जनता का राज्य इन विचारों से ही सार्वभौमिक मानवता प्राप्त की जा सकती है।”

इस कार्यक्रम का निवेदन पराग खानविलकर ने किया। डॉ. मिलिंद पात्रे ने परिचय दिया। डॉ. मंदार लेले ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

 

 

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button