
महाराष्ट्र में अवैध धर्मांतरण विरोधी कानून लागू करने की नागरिक सोशल फाउंडेशन की मांग
पुणे:राज्य में बढ़ते कथित अवैध धर्मांतरण के मामलों को गंभीरता से लेते हुए महाराष्ट्र सरकार ने तुरंत “महाराष्ट्र फ़्रीडम ऑफ रिलीजन (Prevention of Fraud & Coercion) Act” पारित कर लागू करना चाहिए, ऐसी मांग नागरिक सोशल फाउंडेशन (NSF) ने की है। इस संबंध में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को मांगपत्र भेजे जाने की जानकारी एडवोकेट सर्वेश मेहेंदळे ने पत्रकार परिषद में दी।
वे पुणे श्रमिक पत्रकार संघ में आयोजित पत्रकार परिषद को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान अमेय सप्रे और प्रीतम थोरवे भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में संगठन ने उल्लेख किया है कि महाराष्ट्र के आदिवासी बहुल क्षेत्रों—विशेषतः धुले, नंदुरबार, पुणे और ठाणे जिलों में—जबरन, छल-कपट या प्रलोभन के माध्यम से धर्मांतरण की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। ऐसा अवैध धर्मांतरण न केवल व्यक्ति की धार्मिक स्वतंत्रता पर आघात है, बल्कि सामाजिक सद्भाव के लिए भी गंभीर खतरा उत्पन्न करता है।
संस्था ने स्पष्ट कहा है कि धर्मांतरण केवल व्यक्ति की आस्था, स्वेच्छा और जागरूक निर्णय पर आधारित होना चाहिए। दबाव, धोखाधड़ी, आर्थिक लाभ या किसी भी प्रकार के प्रलोभन के आधार पर होने वाला धर्मांतरण अवैध घोषित किया जाना चाहिए। ऐसे कानून से धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए सभी समुदायों की सुरक्षा, धार्मिक सद्भाव और सामाजिक शांति को मजबूती मिल सकेगी। साथ ही विदेशी फंडिंग या अवैध धार्मिक निर्माण के दुरुपयोग पर रोक लगेगी और दोषी व्यक्तियों व संस्थाओं पर कठोर कार्रवाई संभव होगी।
NSF द्वारा प्रस्तावित विधेयक की प्रमुख प्रावधान इस प्रकार होने चाहिए:
धर्मांतरण केवल व्यक्ति की स्वेच्छा, आस्था और स्पष्ट सहमति पर आधारित हो।
दबाव, प्रलोभन, फसवणूक या आर्थिक-सामग्री के लालच से किए गए धर्मांतरण को वैध न माना जाए।
अवैध धर्मांतरण कराने वाले व्यक्तियों, संस्थाओं या माध्यमों पर कड़ी सजा का प्रावधान हो।
स्वेच्छा से धर्म बदलने वालों के लिए पारदर्शी, सुरक्षित और प्रशासनिक रूप से स्पष्ट प्रक्रिया उपलब्ध हो।
दबाव या धोखाधड़ी से धर्मांतरण होने पर पीड़ितों को कानूनी सहायता और न्याय सुनिश्चित किया जायेगा।
पत्रकार परिषद में NSF ने कहा कि इस महत्वपूर्ण विषय पर नागरिकों और मीडिया के माध्यम से व्यापक सार्वजनिक चर्चा होनी चाहिए और समाज में हर स्तर पर जागरूकता बढ़नी चाहिए। साथ ही राज्य सरकार से अनुरोध किया गया कि आने वाले शीतकालीन सत्र में इस विधेयक को पारित कर तुरंत लागू किया जाए।
नागरिक सोशल फाउंडेशन ने यह भी बताया कि वे जनजागरण, सामाजिक शोध, कानूनी अध्ययन, साथ ही कानून लागू करने के लिए आवश्यक डेटा, दस्तावेज़ और समुदाय संवाद प्रक्रिया में राज्य सरकार को हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार हैं।

