
राज्य चुनाव आयोग के कार्यप्रणाली पर बसपा के प्रहार!
पारदर्शिता के अभाव में आयोग ने मतदाताओं का विश्वास खो दिया – डॉ. हुलगेश चलवादी
पुणे, विशाल समाचार
लोकतांत्रिक व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए चुनाव अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन मतदाताओं को उनका प्रतिनिधि चुनने का अधिकार लागू करवाने वाली राज्य चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली अब सवालों के घेरे में आ गई है। पारदर्शिता की कमी के कारण आयोग ने मतदाताओं का विश्वास खो दिया है, ऐसे तीखे शब्दों में बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश महासचिव एवं पश्चिम महाराष्ट्र ज़ोन के मुख्य प्रभारी डॉ. हुलगेश चलवादी ने गुरुवार (4 दिसंबर) को आयोग की कार्यशैली की कड़ी आलोचना की।
डॉ. चलवादी ने कहा कि पहले ‘वीवीपैट’ मशीन का इस्तेमाल न करने का फैसला और अब चुनाव परिणामों को आगे बढ़ाने का निर्णय, दोनों ही आयोग की अक्षमता को उजागर करते हैं। आयोग अब तक घोषित समय-सारिणी का पालन करने में भी असफल रहा है। राज्य की विभिन्न स्थानीय स्वशासन संस्थाओं में आरक्षण की निर्धारित सीमा पार होने के बावजूद आयोग ने इस ओर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया। इतना ही नहीं, सीमा पार होने के बाद भी आयोग ने चुनाव की घोषणा कर दी। मामला न्यायालय में जाने के बाद आयोग ने चुनाव की व्यस्तता के बीच यह मुद्दा अदालत पर छोड़ दिया, जो गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
आयोग का यह रवैया न केवल मतदाताओं, बल्कि राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों तथा चुनाव प्रक्रिया में शामिल कर्मचारियों और अधिकारियों में भी व्यापक नाराज़गी पैदा कर रहा है। डॉ. चलवादी ने कहा कि नागरिकों के संवैधानिक मतदान अधिकार को सुनिश्चित करने में चुनाव आयोग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में आयोग का बार-बार चुनाव तिथियों में बदलाव करना, मतदाता सूची पर ठोस निर्णय न लेना तथा चुनाव परिणामों को आगे बढ़ाने जैसे कदम असंवैधानिक प्रतीत होते हैं। आयोग का व्यवहार सही नहीं है और उसके कार्यों से यह स्पष्ट होता है कि वह सत्ता पक्ष के दबाव में काम कर रहा है।

