
आधुनिक अपराधों से निपटने के लिए समाज में जागरूकता जरूरी: विशेष पुलिस महानिरीक्षक ज्योतिप्रिया सिंह
रिपोर्ट: विशाल समाचार
स्थान:पुणे महाराष्ट्र
पुणे। तकनीक के तेजी से विकास के साथ-साथ अपराध का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है। पारंपरिक चोरी और डकैती जैसे अपराधों की जगह अब ऑनलाइन ठगी, डिजिटल वित्तीय अपराध और साइबर हमलों ने ले ली है। ऐसे में केवल पुलिस ही नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यह बात महाराष्ट्र एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) की विशेष पुलिस महानिरीक्षक (Spl. IGP) ज्योतिप्रिया सिंह (IPS) ने कही।
वे ट्रान्सेंडेंटल टेक्नोलॉजीज, सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय के प्रौद्योगिकी विभाग तथा पुनीत बालन ग्रुप के संयुक्त तत्वावधान में विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग में आयोजित राष्ट्रीय “इन्वेस्टिगेशन मास्टरक्लास” प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रही थीं। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि भविष्य में इस तरह की कार्यशालाओं का आयोजन देश के विभिन्न शहरों में भी किया जाएगा।
ज्योतिप्रिया सिंह ने कहा कि साइबर अपराध केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पीड़ित व्यक्ति को मानसिक रूप से भी गंभीर आघात पहुंचाते हैं। कई मामलों में इनका प्रभाव व्यक्ति के पूरे जीवन पर पड़ता है। इसलिए समय पर जागरूकता और उचित प्रशिक्षण ही ऐसे अपराधों की रोकथाम का सबसे प्रभावी माध्यम है।
कार्यक्रम में आर्थिक अपराध शाखा (EOW), सीआईडी पुणे के विशेष पुलिस महानिरीक्षक श्रीकांत पाठक (IPS) ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में अपराधियों के तौर-तरीके पूरी तरह बदल चुके हैं। अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग कर बड़े पैमाने पर साइबर और आर्थिक अपराध किए जा रहे हैं। ऐसे में पुलिस के साथ-साथ आम नागरिकों को भी इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेना चाहिए।
दहशतवाद निरोधक दस्ता (ATS) के पुलिस उपमहानिरीक्षक अरविंद सालवे (IPS) ने कहा कि आतंकवादी गतिविधियों में भी आधुनिक तकनीक का व्यापक उपयोग हो रहा है। इसलिए साइबर सुरक्षा और डिजिटल जांच से संबंधित प्रशिक्षण राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
सीमा सुरक्षा बल (BSF) के द्वितीय कमांडेंट संजय शर्मा ने कहा कि यदि समाज में लगातार साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए तो ऐसे अपराधों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए डॉ. केतन अत्रे ने बताया कि “इन्वेस्टिगेशन मास्टरक्लास” कार्यक्रम को जल्द ही महाराष्ट्र के बाहर अन्य राज्यों में भी आयोजित किया जाएगा, जिससे पुलिस अधिकारियों, सरकारी कर्मचारियों तथा कानून प्रवर्तन एजेंसियों को आधुनिक जांच तकनीकों का प्रशिक्षण मिल सकेगा।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अमित त्रिभुवन ने किया। इस दौरान प्रशिक्षणार्थियों को सहभागिता प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना से हुई तथा लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती के अवसर पर विशेष कथक नृत्य प्रस्तुति देकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।


