लखनऊ

ग्लोबल पोटेटो समिट 2025 में उत्तर प्रदेश और बेल्जियम की AMPL के बीच एमओयू

 

ग्लोबल पोटेटो समिट 2025 में उत्तर प्रदेश और बेल्जियम की AMPL के बीच एमओयू

 

खाद्य प्रसंस्करण एवं औद्यानिक क्षेत्र में नए आयाम खुलेंगे

 

लखनऊ, विशाल समाचार संवाददाता 

 

इंडिया एक्सपो मार्ट, ग्रेटर नोएडा में आयोजित ग्लोबल पोटेटो समिट 2025 के दौरान उत्तर प्रदेश के उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग और बेल्जियम की अग्रणी कंपनी M/s Agristo Masha Pvt. Co. (AMPL) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह एमओयू प्रदेश में औद्यानिक फसलों के समग्र विकास, उन्नत तकनीकों के प्रसार और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा।

 

अपर मुख्य सचिव उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण श्री बी.एल. मीणा ने बताया कि उत्तर प्रदेश में 6.0 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल पर आलू की खेती की जाती है तथा 28.9 टन प्रति हेक्टेयर की उत्पादकता के साथ प्रदेश देश में आलू उत्पादन में प्रथम स्थान पर है। आगरा, फर्रुखाबाद, मेरठ, मथुरा, मैनपुरी, इटावा, कानपुर एवं अलीगढ़ प्रदेश के प्रमुख आलू उत्पादक जिले हैं। उन्होंने कहा कि एमओयू से उन्नत तकनीकों, वैज्ञानिक सहयोग और कौशल आधारित प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

 

यह साझेदारी बेल्जियम की विश्व–प्रसिद्ध कंपनी Agristo NV और भारत की वेव ग्रुप की संयुक्त इकाई AMPL के साथ की गई है, जिसने बिजनौर में पहले से ही आलू के सूखे फ्लेक्स उत्पादन एवं अनुसंधान की अत्याधुनिक इकाई स्थापित की है। एमओयू के माध्यम से मूल्य संवर्धन, प्रोसेसिंग आधारित उद्योग और निर्यात क्षमता में वृद्धि होगी, जो प्रदेश की 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य में अहम भूमिका निभाएगी।

 

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि उद्यान विभाग द्वारा बाबूगढ़, हापुड़ में प्रदेश का पहला सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (एरोपोनिक्स यूनिट एवं टिशू कल्चर लैब) संचालित किया गया है। एरोपोनिक्स तकनीक से मिट्टी के बिना हवा में पौधे उगाकर रोगमुक्त एवं उच्च गुणवत्ता वाले आलू बीज तैयार किए जा रहे हैं, जो उत्पादन क्षमता बढ़ाने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रही है।

 

अपर मुख्य सचिव बी.एल. मीणा ने कहा कि यह एमओयू औद्यानिक फसलों के उत्पादन, उत्पादकता, मूल्य संवर्धन और कौशल विकास के क्षेत्र में बड़े परिवर्तन की राह खोलेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इससे किसानों की आमदनी में वृद्धि होगी और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

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