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8 वर्षीय बच्ची ने हिम्मत से मेंनिंजोएन्सेफलायटिस पर पाई जीत

8 वर्षीय बच्ची ने हिम्मत से मेंनिंजोएन्सेफलायटिस पर पाई जीत

 

नोबल हॉस्पिटल के डॉक्टरों की टीम का सफल उपचार

 

पुणे: आठ वर्ष की एक बच्ची ने मेंनिंजोएन्सेफलायटिस (मस्तिष्क ज्वर) जैसी गंभीर स्थिति पर विजय पाकर अब सामान्य जीवन जीना शुरू कर दिया है. नोबल हॉस्पिटल्स ॲन्ड रिसर्च सेंटर, पुणे के डॉक्टरों की टीम ने इस गंभीर अवस्था में सफलतापूर्वक उपचार किया.

 

मेंनिंजोएन्सेफलायटिस इस स्थिती में मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को ढकने वाली आवरण में सूजन आ जाती है. यह स्थिति जानलेवा होती है, इसलिए समय पर उपचार अत्यंत आवश्यक होता है. इसके लक्षणों में बुखार, गर्दन में जकड़न, रोशनी के प्रति संवेदनशीलता बढ़ना, मस्तिष्क संबंधी समस्याएं और दौरे पड़ना शामिल हैं.उपचार बीमारी के कारण और उसकी गंभीरता पर निर्भर करता है.

 

इस बारे में जानकारी देते हुए नोबल हॉस्पिटल्स ॲन्ड रिसर्च सेंटर, पुणे के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ एवं नवजात शिशु विशेषज्ञ डॉ. जलील मुजावर ने बताया कि पुणे के ग्रामीण क्षेत्र के एक किसान परिवार की आठ वर्षीय बच्ची को पिछले महीने अस्पताल में भर्ती किया गया था. उस समय वह बेहोशी की अवस्था में थी, उसे तेज बुखार था और दौरे पड़ रहे थे. यह अत्यंत गंभीर स्थिति थी, जिसमें डॉक्टरों की टीम को तुरंत उपचार शुरू करना आवश्यक था. निदान के लिए शारीरिक जांच, इमेजिंग और सेरेब्रोस्पाइनल फ्लुइड की जांच की गई.

 

इस प्रक्रिया में स्पायनल फ्लुईड (स्पाईनल टॅप – लंबर पंक्चर) के माध्यम से पीठ के निचले हिस्से में सुई डालकर सेरेब्रोस्पाइनल फ्लुइड का नमूना लिया गया. इस द्रव को प्रयोगशाला में भेजकर जीवाणुओं या असामान्य कोशिकाओं की जांच, व्हाइट ब्लड सेल्स के प्रकार व संख्या, तथा प्रोटीन के स्तर की जांच की जाती है.

 

डॉ. मुजावर ने बताया कि बच्ची की स्थिति पहले से ही गंभीर थी और एमआरआई रिपोर्ट में मस्तिष्क को हुआ नुकसान स्पष्ट दिखाई दी. मस्तिष्क को बहुत ज़्यादा नुकसान होने की वजह से, इसका प्रभाव अलग-अलग नर्व पॉइंट्स पर असर डालने लगा था. इस बच्ची को चार दिनों तक वेंटिलेटर पर रखा गया और इसके बाद ट्रेकियोस्टॉमी की गई. ऐसी परिस्थितियों में सटीक और त्वरित निदान अत्यंत महत्वपूर्ण होता है. निदान के बाद एंटीबायोटिक्स, एंटी-वायरल और एंटी-कन्वल्शन दवाएं शुरू की गईं.

 

पूरे उपचार के दौरान नोबल हॉस्पिटल की एक बहुविषयक डॉक्टरों की टीम कार्यरत रही. ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. नुदरत कमल, बाल मेंदू रोग तज्ञ डॉ. संदीप पाटील, संसर्ग रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित द्रविड, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पी. डी. पोटे इन सब विशेषज्ञों का सांघिक कार्य, सहायक स्टाफ का योगदान और माता-पिता का सकारात्मक दृष्टिकोण—इन सभी के संयुक्त प्रयासों से बच्ची इस अत्यंत चुनौतीपूर्ण स्थिति से बाहर आ सकी.

 

डॉ. मुजावर ने बताया कि गंभीर मस्तिष्क ज्वर से उबरने वाले कुछ मरीजों में हाइपरटोनिया की समस्या हो सकती है, जिसमें मांसपेशियों के सख्त हो जाने से चलना-फिरना मुश्किल हो जाता है. हालांकि इस बच्ची में ऐसी कोई जटिलता नहीं देखी गई और केवल पांच दिनों में वह चलने लगी.

 

नोबल हॉस्पिटल्स ॲन्ड रिसर्च सेंटर के संचालक डॉ. दिविज माने ने कहा कि चिकित्सीय उपचारों के साथ-साथ मरीज की उपचार के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया और परिवार का सहयोग भी अच्छे परिणामों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है. उन्नत चिकित्सा सुविधाएं, कुशल व अनुभवी डॉक्टरों की टीम और मरीज व उसके परिवार की दृढ़ इच्छाशक्ति—इन सभी के एकत्रित प्रयासों से उपचार सफल होता है और मरीज के स्वस्थ होने का सफर अधिक प्रभावी बनता है.

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