
साईश्री विटालाइफ हॉस्पिटल ने जर्मनी स्थित एसओआरजी के साथ सहयोग किया
जर्मन टेक्नोलॉजी से समर्थित स्प्रेडिंग स्माईल्स सीएसआर कैंपेन से क्लेफ्ट लिप रहे बच्चों को मिल रही है राहत
पुणे विशाल सिंह: क्लेफ्ट लिप और क्लेफ्ट पैलेट रहे बच्चों के लिए साईश्री विटालाईफ हॉस्पिटल ने जर्मनी स्थित स्ट्रासबर्ग ऑस्टियोसिंथेसिस रिसर्च ग्रुप (एसओआरजी) के साथ सहयोग किया है. इसके अंतर्गत जरूरतमंद बच्चों पर नि:शुल्क शस्त्रक्रिया की जा रही हैं. एसओआरजी समूह की डॉक्टरों की टीम भारत दौरे पर है और उन्होंने हाल ही में वाकड स्थित नए साईश्री विटालाईफ हॉस्पिटल का दौरा किया. इससे पहले उनके दो दौरे औंध स्थित साईश्री यूनिट में हुए थे.
प्राथमिक क्लेफ्ट लिप और पॅलेट की सर्जरी निःशुल्क की जाती है, और बाद की सर्जरी के लिए, अस्पताल रिजिड एक्सटर्नल डिव्हाइसेस डिस्ट्रॅक्टर्स जैसे उपकरणों का खर्च उठाता है.
एसओआरजी (स्ट्रासबर्ग ऑस्टियोसिंथेसिस रिसर्च ग्रुप) एक एजुकेशनल इंस्टीट्यूट है जो विश्व स्तर पर प्रसिद्ध है, यह एक अग्रणी संस्था है जो ओरल कैंसर सर्जरी, मैक्सिलोफेशियल ट्रॉमा, क्लेफ्ट केयर और जबड़े की सर्जरी के लिए दिशानिर्देश और उन्नत उपचार प्रोटोकॉल विकसित करती है. साईश्री विटालाइफ हॉस्पिटल, वाकड में 305 बेड का मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, साईश्री विटालाइफ ग्रुप का हिस्सा है, जो एक तेजी से बढ़ता हुआ हेल्थकेयर नेटवर्क है जिसके तहत 6 क्लीनिक और 3 हॉस्पिटल हैं.
मॅस्ट्रीश्ट यूनिवर्सिटी के प्रमुख व मॅक्सिलोफेशियल और प्लास्टिक सर्जन प्रा.डॉ.पी.ए.डब्ल्यू.एच. केसलर, नेदरलँडस के ओरल व मॅक्सिलोफेशियल सर्जन डॉ.वेरॉनिक टीमर व डॉ.निंक ली और एसओआरजी इंडिया चॅप्टर की अध्यक्ष डॉ.सरूची अग्रवाल, साईश्री विटालाईफ ग्रुप के अध्यक्ष डॉ.नीरज आडकर और साईश्री विटालाईफ हॉस्पिटल के मॅक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग प्रमुख डॉ.पुष्कर वाकनीस इन्होने पत्रकार परिषद में यह जानकारी दी.
डॉ. पुष्कर वाकनिस हेड ऑफ डिपार्टमेंट- मैक्सिलोफेशियल सर्जरी ने सहयोग और स्प्रेडिंग स्माईल्स सीएसआर कैंपेन के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि हमने यह कैंपेन 2012 में शुरू किया था जब मैं नीदरलैंड में डॉ. केसलर से मिला था और उन्होंने कैंपेन के लिए सहयोग करने की इच्छा व्यक्त की थी.
क्लेफ्ट लिप एक सामान्य जन्मजात दोष है जिसमें ऊपरी होंठ में एक खुलापन होता है, जो गर्भावस्था की शुरुआत में चेहरे के ऊतकों के आपस में न जुड़ने के कारण होता है, कभी-कभी यह नाक तक फैल जाता है और अक्सर कटे तालू (मुंह की छत में खुलापन) के साथ होता है. क्लेफ्ट पैलेट के मामले में, मुंह की छत बनाने वाले ऊतक गर्भावस्था के दौरान पूरी तरह से एक साथ नहीं जुड़ते हैं. प्राइमरी क्लेफ्ट लिप सर्जरी के लिए सही उम्र तीन से छह महीने है और क्लेफ्ट पैलेट सर्जरी के लिए नौ से अठारह महीने है. क्लेफ्ट सर्जरी में देरी से अनेक समस्या बढ़ सकती हैं, जिसमे बोलने में दिक्कत, सुनने में कमी और दांतों की समस्या हो सकती है, और जीवनमान कम हो सकता है. क्लेफ्ट सभी सामाजिक-आर्थिक ग्रुप में होते हैं.
डॉ. नीरज आडकर, चेयरमैन, साईश्री विटालाइफ ग्रुप ने कहा कि लगभग 150 बच्चों को फायदा हुआ है, हम इस कैंपेन को और आगे ले जाना चाहते हैं क्योंकि क्लेफ्ट लिप सर्जरी यह जन्मजात बीमारी रहे बच्चों के विकास के लिए बहुत ज़रूरी हैं.
डॉ. पुष्कर वाकनिस ने बताया कि हम नई तकनीकों में हुए सुधार का इस्तेमाल कर रहे हैं जो सर्जरी में ज़्यादा सटीकता और बेहतर नतीजे दे रही हैं, जिसमें डिस्ट्रैक्शन ऑस्टियोजेनेसिस (डीओ) और केएलएस मार्टिन का रिजिड एक्सटर्नल डिवाइस (आरईडी) शामिल है.
डिस्ट्रैक्शन ऑस्टियोजेनेसिस (डीओ) एक सर्जिकल तकनीक है जिसका इस्तेमाल हड्डियों को लंबा करने के लिए किया जाता है. इसमें ऑस्टियोटॉमी करके हड्डियों के हिस्सों को धीरे-धीरे अलग किया जाता है ताकि उनके बीच नई हड्डी बन सके. इंटरनल या एक्सटर्नल डिस्ट्रैक्टर डिवाइस का इस्तेमाल करके, डीओ जबड़े, हाथ-पैर और खोपड़ी में विकृतियों को ठीक करता है और साथ ही आसपास के मुलायम टिशू जैसे त्वचा, मांसपेशियों, नसों और खून की नसों के विकास को भी बढ़ावा देता है। इस प्रक्रिया में लेटेंसी, डिस्ट्रैक्शन और कंसोलिडेशन चरण शामिल होते हैं, जिससे बिना बोन ग्राफ्ट की ज़रूरत के स्थायी नतीजे मिलते हैं, और यह क्रैनियोफेशियल सर्जरी और एयरवे मैनेजमेंट में खास तौर पर फायदेमंद है.
रिजिड एक्सटर्नल डिवाइस (आरईडी ) एक खास टूल है जिसका इस्तेमाल गंभीर मिडफेस अंडरडेवलपमेंट रहे लोगों में ऊपरी जबड़े को आगे बढ़ाने के लिए किया जाता है, जो अक्सर क्लेफ्ट लिप या पैलेट के कारण होता है। डॉक्टर जबड़े पर एक मेटल का फ्रेम लगाते हैं और हर दिन धीरे-धीरे उसे एडजस्ट करते हैं। यह हल्की हलचल नई हड्डी को बढ़ने में मदद करती है, जिससे चेहरे की बनावट, सांस लेने और खाने में सुधार होता है। यह हड्डी के विकास की समस्याओं का इलाज करता है, और यह टीम-आधारित क्लेफ्ट केयर का हिस्सा है. आरईडी फ्रेम जर्मनी की सर्जिकल डिवाइस बनाने वाली कंपनी केएलएस मार्टिन द्वारा दान किए गए हैं.
डॉ. सरूची अग्रवाल, चेयरमैन, एसओआरजी इंडिया चैप्टर (स्ट्रासबर्ग ऑस्टियोसिंथेसिस रिसर्च ग्रुप) ने कहा कि एसओआरजी इंडिया का मुख्य उद्देश्य ट्रेनिंग ले रहे सर्जनों के साथ-साथ आधुनिक मैक्सिलोफेशियल सर्जरी के क्षेत्र में अनुभवी सर्जनों के लिए पोस्टग्रेजुएट कोर्स और ट्रेनिंग देना है, जिसमें क्लेफ्ट लिप सर्जरी, चेहरे की हड्डियों के फ्रैक्चर और जबड़े की हड्डियों के ओरल कैंसर रिकंस्ट्रक्शन शामिल हैं.


