पूणेराजनीति

हिंदुत्ववादी कार्यकर्ताओं द्वारा महापालिका चुनाव में‘ जिसके माथे पर तिलक नहीं, उसे मतदान न करें’ अभियान

हिंदुत्ववादी कार्यकर्ताओं का नगर निगम चुनाव में अभियान‘जिसके माथे पर तिलक नहीं, उसे वोट नहीं’ का नारा

हिंदुत्व की उपेक्षा करेंगे तो हिंदुत्ववादी पुणेकर सबक सिखाएंगे

आतंकवाद-मुक्त पुणे के लिए भाजपा की उम्मीदवार सूची मुस्लिम-मुक्त हो

 

अल्पसंख्यकों को खुश करने के लिए हिंदुत्व से समझौता ना करें

हिंदुत्व जागृति सभा में ‘जिसके माथे पर तिलक नहीं, उसे वोट नहीं’ मुहीम चलाने का संकल्प

पुणे:पुणे महानगरपालिका चुनाव की पृष्ठभूमि में हिंदुत्ववादी संगठनों ने आक्रामक रुख अपनाते हुए भारतीय जनता पार्टी सहित हिंदुत्ववादी दलों को कड़ा संदेश दिया है। “हिंदुत्व से समझौता किया गया तो भाजपा की भी हालत कांग्रेस जैसी दयनीय हो जाएगी”—ऐसी चेतावनी हिंदुत्व जागृति सभा में दी गई।

समस्त हिंदू आघाड़ी की ओर से शिवाजीनगर स्थित मॉडर्न हाईस्कूल में आयोजित इस सभा में “जिसके माथे पर तिलक नहीं, उसे मतदान न दें” अभियान का संकल्प लिया गया। सभा में ह.भ.प. संग्रामबापू भंडारे, समीर कुलकर्णी और मिलिंद एकबोटे ने संबोधित किया। हजारों की संख्या में हिंदुत्ववादी कार्यकर्ता मौजूद रहे।

वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सत्ता की लालसा में कुछ राजनीतिक दल और नेता अल्पसंख्यकों को खुश करने के लिए हिंदुत्व से समझौता कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन शक्तियों पर हिंदू समाज, हिंदुत्व और सार्वजनिक सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने के आरोप हैं, उन्हें उम्मीदवार बनाए जाने के प्रयास दुर्भाग्यपूर्ण हैं।

मिलिंद एकबोटे ने कहा कि पुणे में भगवा और हिंदुत्व की उपेक्षा हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के कुछ नेता गलत प्रवृत्तियों को संरक्षण दे रहे हैं। यदि यह स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में भाजपा का भी वही हश्र होगा जो आज कांग्रेस का है।

सभा में यह भी मांग रखी गई कि “शांत, सुरक्षित और आतंकवाद-मुक्त पुणे के लिए भाजपा की उम्मीदवार सूची मुस्लिम-मुक्त होनी चाहिए।” वक्ताओं ने कहा कि हिंदुत्व के आधार पर सत्ता में आने वाले दलों को अपने मूल विचारों से समझौता नहीं करना चाहिए।

ह.भ.प. संग्रामबापू भंडारे ने कहा कि हिंदू समाज सहिष्णु है, लेकिन लगातार हो रहे हमलों और कथित तुष्टीकरण की राजनीति पर अब चुप नहीं बैठा जा सकता। समीर कुलकर्णी ने कहा कि हिंदू मतों के बंटवारे का फायदा राजनीतिक दल उठा रहे हैं और इसे रोकने के लिए हिंदुत्ववादी मतदाताओं को एकजुट होना होगा।

सभा के अंत में कार्यकर्ताओं ने आह्वान किया कि आगामी मनपा चुनाव में केवल हिंदुत्व का खुलकर समर्थन करने वाले उम्मीदवारों को ही वोट दिया जाए।

 

 

 

 

 

 

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