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मानवता के मूल भाव को अपनाकर मूल्य आधारित शिक्षा देना समय की आवश्यकता: चांसलर डॉ. भूषण पटवर्धन

मानवता के मूल भाव को अपनाकर मूल्य आधारित शिक्षा देना समय की आवश्यकता: चांसलर डॉ. भूषण पटवर्धन

 

मायर्स एमआईटी शिक्षण संस्था समूह का 44वां स्थापना दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया

रिपोर्ट: विशाल समाचार 

स्थान:पुणे महाराष्ट्र 

पुणे, । डेक्कन कॉलेज पोस्ट ग्रेजुएट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट, पुणे के चांसलर डॉ. भूषण पटवर्धन ने कहा कि मायर्स एमआईटी शिक्षण संस्था मानवता के मूल भाव को केंद्र में रखकर विद्यार्थियों को मूल्य आधारित शिक्षा प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के बहुआयामी विकास के साथ ज्ञान, विज्ञान, अध्यात्म और विश्व शांति के मूल्यों पर आधारित नई पीढ़ी तैयार की जा रही है। जीवन में चाहे कितनी भी कठिन परिस्थितियां आएं, मनोबल और आत्मविश्वास कभी नहीं खोना चाहिए।

 

वे मायर्स एमआईटी शिक्षण संस्था समूह के 44वें स्थापना दिवस के अवसर पर कोथरुड परिसर में आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की शुरुआत संस्था के संस्थापक अध्यक्ष विश्वधर्मी प्रो. डॉ. विश्वनाथ दा. कराड द्वारा ध्वजारोहण के साथ हुई।

 

इस अवसर पर संस्था के संस्थापक न्यासी प्रो. प्रकाश जोशी, अध्यक्ष डॉ. मंगेश तु. कराड, श्रीमती उषा विश्वनाथ कराड, न्यासी एवं सचिव प्रो. स्वाती कराड-चाटे, न्यासी डॉ. विनायक घैसास, एमआईटी डब्ल्यूपीयू के कुलपति डॉ. दत्ता दंडगे, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी डॉ. प्रसाद खांडेकर तथा डॉ. मिलिंद पांडे सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

 

समारोह के दौरान प्रो. डॉ. विश्वनाथ दा. कराड का संत तुकाराम महाराज की पारंपरिक पगड़ी, घोंगड़ी और तुलसी की माला पहनाकर विशेष सम्मान किया गया।

 

अपने संबोधन में प्रो. डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने कहा कि जीवन में विनम्रता अत्यंत आवश्यक है। सत्य की अनुभूति के लिए विनम्रता को अपनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आज का दिन उनके लिए आत्मिक संतोष और विशेष अनुभूति का दिन है तथा 44 वर्ष पहले लिए गए संकल्प को आज सही दिशा मिली है।

 

संस्था के अध्यक्ष डॉ. मंगेश तु. कराड ने कहा कि संस्था का उद्देश्य मूल्य आधारित नागरिकों का निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि आधुनिक दौर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग शिक्षा के क्षेत्र में प्रभावी ढंग से किया जाना चाहिए। समाज की जटिल समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान के लिए शिक्षा संस्थानों को सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

 

मायर्स के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. राहुल विश्वनाथ कराड ने वीडियो संदेश के माध्यम से संस्था की विकास यात्रा और उपलब्धियों का परिचय कराया।

 

संस्थापक न्यासी प्रो. प्रकाश जोशी ने कहा कि 5 अगस्त 1983 को बोया गया यह बीज आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है। सभी के सामूहिक प्रयासों से संस्था निरंतर आगे बढ़ी है और भविष्य में इसे और मजबूत बनाने के लिए एक सुदृढ़ व्यवस्था विकसित करनी होगी।

 

एमआईटी डब्ल्यूपीयू के कुलपति डॉ. दत्ता दंडगे ने कहा कि संस्था की स्थापना इस उद्देश्य से की गई थी कि ज्ञान का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि “यंत्र, तंत्रादि विज्ञानम्, लोककल्याण साधनम्” के सिद्धांत पर चलते हुए डॉ. विश्वनाथ कराड ने शिक्षा के व्यापक प्रसार का कार्य किया है।

 

समारोह में मायर्स शिक्षण संस्था समूह की विभिन्न शाखाओं में उत्कृष्ट सेवाएं देने वाले शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को प्रशस्ति-पत्र तथा नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर संस्था के विभिन्न परिसरों के अनेक शिक्षकों और कर्मचारियों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

 

कार्यक्रम का संचालन प्रो. डॉ. गौतम बापट ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन डॉ. प्रसाद खांडेकर ने किया।

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