
सावित्रीमाई की सैकड़ों बेटियों ने किया संविधान का जागरण
सावित्री–ज्योतिबा की काव्य रचनाओं से चार दिवसीय द्वितीय अंतरराष्ट्रीय फुले फेस्टिवल का उद्घाटन
संविधान कट्टे पर कवि व संविधानदूत विजय वडवेराव के नेतृत्व में संविधान का वाचन
पुणे विशाल सिंह:हरे इरकल की साड़ी, माथे पर आड़ा गंध, हाथों में संविधान और होठों पर सावित्री–ज्योति का जागर लिए सावित्रीबाई फुले के वेश में उतरी सैकड़ों बेटियां, सिर पर फुले फेटा और शरीर पर कोट पहनकर महात्मा फुले के रूप में नजर आए आयोजक विजय वडवेराव—इन सभी ने एक साथ संविधान का जागरण किया। इस दृश्य ने संविधान कट्टे और सभागृह में ऐसा माहौल बना दिया मानो स्वयं सावित्रीबाई और ज्योतिराव फुले उपस्थित हों।
भिडेवाड़ा से जुड़े फुलेप्रेमी कवि व संविधानदूत विजय वडवेराव की संकल्पना से, देश के पहले कन्या विद्यालय भिडेवाड़ा से प्रेरित अंतरराष्ट्रीय काव्यजागर अभियान के अंतर्गत द्वितीय अंतरराष्ट्रीय फुले फेस्टिवल का उद्घाटन विशिष्ट कवियों की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। यह फेस्टिवल 5 जनवरी 2026 तक नवी पेठ स्थित एस. एम. जोशी फाउंडेशन के सभागृह में आयोजित किया जा रहा है। इसमें महाराष्ट्र सहित देश-विदेश से लगभग 800 कवि, साहित्यकार, विचारवंत और कलाकार सहभागी हुए हैं।
महात्मा फुले, ज्ञानज्योति सावित्रीबाई फुले और फातिमाबी शेख के वेश में कवि-कवयित्रियों द्वारा प्रस्तुत काव्य रचनाएं, फुले दंपति का गौरवपूर्ण उल्लेख और विचारों का जागर, सावित्री–ज्योति के साथ आद्य क्रांतिकारी गुरु लहुजी वस्ताद सालवे और भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के जयघोष से पूरा परिसर गूंज उठा।
पुणे के बुधवार पेठ स्थित भिडेवाड़ा में क्रांतिसूर्य महात्मा ज्योतिराव फुले और ज्ञानज्योति सावित्रीबाई फुले द्वारा शुरू किए गए देश के पहले कन्या विद्यालय के इतिहास को संरक्षित करने, फुले दंपति के कार्य और विचारों का प्रचार-प्रसार करने तथा यह विरासत आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से इस फेस्टिवल का आयोजन किया गया है।
फेस्टिवल में देश-विदेश के करीब 800 कवियों का काव्य महोत्सव, भिडेवाड़ा विषय पर मराठी ग़ज़ल मुशायरा, एकपात्री प्रयोग, स्कूली छात्रों की नाट्य प्रस्तुतियां, एकांकिका, संगीतमय पोवाड़े, महिला सशक्तिकरण हेतु लाठी–काठी व दांडपट्टा के प्रात्यक्षिक जैसे विविध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। लंदन, ऑस्ट्रेलिया, अबूधाबी सहित विदेशों से तथा महाराष्ट्र, कर्नाटक, गोवा, गुजरात, तेलंगाना, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से कवि-कवयित्री इसमें सहभागी हुए हैं।
महात्मा फुले और सावित्रीबाई फुले का त्याग, समर्पण और देश निर्माण में योगदान अमूल्य है। यह एक विचार आंदोलन है और फुले विचारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। जिला और राज्य स्तर पर वर्षभर जागर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। जिन्होंने रूढ़िवादी व्यवस्था के खिलाफ जाकर महिला शिक्षा की नींव रखी, गालियां, कीचड़ और गोबर के हमले सहे, उस फुले दंपति को भारतरत्न पुरस्कार दिलाने के लिए अभियान चलाया जाएगा, ऐसा विजय वडवेराव ने कहा।


