तकनीक के सहारे संभव होगा व्यापक परिवर्तन
‘कन्स्ट्रो 2026’ में ‘यू-कॉन’ सम्मेलन में जलसंपदा विभाग के प्रवीण कोल्हे का प्रतिपादन
पिंपरी विशाल समाचार: हाल के वर्षों में शासन की कार्यप्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन हुआ है और प्रशासन में तकनीक का प्रभावी उपयोग बढ़ा है। सार्वजनिक–निजी भागीदारी के नए मॉडलों के माध्यम से शासन ने व्यवस्था पर नियंत्रण बनाए रखते हुए निजी क्षेत्र के समान ही सफलता हासिल की है, ऐसा प्रतिपादन राज्य के जलसंपदा विभाग के अधीक्षक अभियंता एवं उपसचिव प्रवीण कोल्हे ने किया।
पुणे कन्स्ट्रक्शन इंजीनियरिंग रिसर्च फाउंडेशन (PCERF), पुणे महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (PMRDA) और पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चार दिवसीय 20वें अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी ‘कन्स्ट्रो 2026’ के अंतर्गत ‘यू-कॉन’ सम्मेलन में वे ‘डिजिटाइजेशन और ऑटोमेशन क्रांति के युग में निर्माण उद्योग में युवाओं के लिए अवसर’ विषय पर बोल रहे थे।
मोशी स्थित अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी केंद्र में आयोजित इस कार्यक्रम में ‘कन्स्ट्रो 2026’ के चेयरमैन जयदीप राजे, PCERF के अध्यक्ष इंजि. नरेंद्र कोठारी, सचिव आर्कि. शिरीष केंभावी, जयंत इनामदार, संजय वायचळ, उदय पाठक सहित कई मान्यवर उपस्थित थे। निर्माण उद्योग की प्रमुख हस्तियां, प्राध्यापक और रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों ने प्रदर्शनी को बड़ी संख्या में देखा। ‘यू-कॉन’ सत्र के बाद ‘कन्स्ट्रो 2026’ का समापन हुआ, जिसमें सभी स्वयंसेवकों और हितचिंतकों का सम्मान किया गया।
प्रवीण कोल्हे ने कहा कि विभिन्न शासकीय विभागों की जानकारियों को एकीकृत कर साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया गया है। इसी क्रॉस-सेक्शनल डेटा के आधार पर नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी जाती है, जिससे डैशबोर्ड पर एक नजर में संपूर्ण और सटीक जानकारी मिल जाती है। अब 7/12 उतारे भी GPS और जियोफिजिकल रडार (GPR) सिस्टम के माध्यम से प्राप्त किए जा रहे हैं। मौसम विभाग द्वारा भी स्काइमेट जैसी स्वचालित तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।
रोहित सरदेसाई ने कहा कि निर्माण कार्य केवल तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक संपूर्ण प्रक्रिया है। युवाओं को समग्र दृष्टिकोण से काम से जुड़ना चाहिए। साइट पर प्रत्यक्ष काम के दौरान आने वाली कठिनाइयों, श्रम और अनुभव को समझे बिना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या आधुनिक तकनीक आधारित उपयोगी ऐप्स विकसित नहीं किए जा सकते।
कपिलेश भाटे ने कहा कि तकनीक-सक्षम युवाओं को वास्तविक परिस्थितियां देखने के बाद कई बार धैर्य टूटता है और आत्मविश्वास कम होता है। इसलिए युवाओं को कुछ वर्षों तक इस क्षेत्र में धैर्यपूर्वक काम कर अनुभव और आत्मविश्वास अर्जित करना चाहिए।
सौरभ जांगले ने कहा कि तकनीक को अपनाना समय की मांग है और इसके लिए कभी देर नहीं होती। युवा इंजीनियरों को डेटा का गहन विश्लेषण कर वास्तविक समस्याओं की पहचान करनी चाहिए और फिर उनके सटीक समाधान विकसित करने चाहिए।
सिद्धार्थ वी. मूर्ति ने कहा, “अच्छा ड्राफ्ट्समैन होना जरूरी नहीं कि अच्छा आर्किटेक्ट होने की गारंटी हो। तकनीक के माध्यम से केवल सौंदर्य पर नहीं, बल्कि अंतिम उत्पाद की गुणवत्ता पर भी फोकस करना आवश्यक है।” समापन भाषण जयदीप राजे ने दिया।



