
…इसलिए भरत गीते जैसे मराठी उद्यमियों पर गर्व
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सराहना; दावोस में समझौता ज्ञापन के एक वर्ष के भीतर उद्योग स्थापना की प्रशंसा
दावोस (स्विट्ज़रलैंड):
“पिछले वर्ष विश्व आर्थिक मंच (वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम) में किए गए 500 करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापन को ‘एल्युमिनियम मैन ऑफ इंडिया’ के रूप में पहचाने जाने वाले उद्यमी भरत गीते ने मात्र एक वर्ष में सफलतापूर्वक लागू कर वास्तविक उत्पादन शुरू कर दिया है। एक साल के भीतर उद्योग स्थापित करने वाले गीते जैसे मराठी उद्यमियों पर मुझे गर्व है,” ऐसे गौरवोद्गार मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने व्यक्त किए।
दावोस में जारी विश्व आर्थिक मंच के दौरान देवेंद्र फडणवीस और भरत गीते के बीच हुई बातचीत में वे बोल रहे थे। इस अवसर पर उद्योग स्थापना की योजना, तेज़ क्रियान्वयन, प्रशासन और उद्यमियों के बीच समन्वय तथा अर्थव्यवस्था में विनिर्माण क्षेत्र के बढ़ते महत्व पर विस्तार से चर्चा हुई। ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसे केंद्र सरकार के अभियानों को बल देने वाले इन प्रयासों से कम समय में उद्योग स्थापित करना संभव है, ऐसा प्रेरणादायी संदेश देशभर के उद्यमियों को मिला है।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा,
“अहिल्यानगर जिले के सुपा एमआईडीसी में स्थापित ‘तौरल इंडिया’ के अत्याधुनिक एल्युमिनियम कास्टिंग्स उत्पादन संयंत्र ने अल्प समय में उत्पादन शुरू कर राज्य के सामने एक आदर्श औद्योगिक मॉडल प्रस्तुत किया है। इस परियोजना से क्षेत्र के स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिले हैं और स्थानीय औद्योगिक विकास को बड़ी गति मिली है।”
उन्होंने आगे कहा,
“समझौता ज्ञापन केवल कागज़ों तक सीमित न रहकर एक वर्ष में वास्तविक उत्पादन में बदल सकता है, इसका उत्कृष्ट उदाहरण भरत गीते और तौरल इंडिया हैं। मराठी उद्यमियों में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता है। यदि उन्हें सही नीतिगत समर्थन मिले तो महाराष्ट्र उद्योग क्षेत्र में नई ऊँचाइयों को छुएगा।”
भरत गीते ने कहा,
“तौरल इंडिया ने 2016 से औद्योगिक विस्तार करते हुए ऊर्जा क्षेत्र, रक्षा उत्पादन, स्वास्थ्य उपकरणों तथा एयरोस्पेस क्षेत्र के लिए आवश्यक उच्च-परिशुद्धता एल्युमिनियम कास्टिंग्स के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। विभिन्न क्षेत्रों में इस योगदान से राज्य की औद्योगिक प्रगति को बल मिला है और आर्थिक विकास को गति मिली है।”
उन्होंने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि
“विनिर्माण क्षेत्र मजबूत अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। यदि ऑटोमोबाइल उद्योग, इंजीनियरिंग, बुनियादी ढांचा, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, रक्षा-सहायक उद्योग, कृषि-प्रसंस्करण और उच्च-मूल्य निर्यातोन्मुख उत्पादन क्षेत्रों को मजबूती मिले, तो राज्य का औद्योगिक आधार और अधिक सशक्त होगा।”

