
मन की जिद और निरंतर अभ्यास से बनता है खिलाड़ी
अंतरराष्ट्रीय तैराक मिहीर आंब्रे का संदेश; ‘मेसो क्रीड़ा करंडक 2026’ का उद्घाटन
पुणे विशाल समाचार। खेल केवल शारीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन में उपयोगी कई गुण भी देता है। खेल में हार-जीत से ज्यादा महत्वपूर्ण खेलभावना और अनुशासन होता है। मन में खेल के प्रति जिद और अभ्यास में निरंतरता बनाए रखें, सफलता जरूर मिलेगी। एक अच्छा खिलाड़ी इसी से बनता है। यह विचार छत्रपती पुरस्कार से सम्मानित अंतरराष्ट्रीय तैराक मिहीर आंब्रे ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए व्यक्त किए।
महाराष्ट्र एजुकेशन सोसायटी (मेसो) की क्रीड़ावर्धिनी एवं बालशिक्षण मंदिर इंग्लिश मीडियम स्कूल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राज्यस्तरीय अंतरशालेय खेल प्रतियोगिता ‘मेसो क्रीड़ा करंडक 2026’ का उद्घाटन बालशिक्षण मंदिर इंग्लिश मीडियम स्कूल, मयूर कॉलोनी (कोथरूड) में मिहीर आंब्रे की उपस्थिति में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाराष्ट्र एजुकेशन सोसायटी के अध्यक्ष एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) भूषण गोखले ने की।

इस अवसर पर मेसो के नियामक मंडल के अध्यक्ष बाबासाहेब शिंदे, उपाध्यक्ष आनंदी पाटील, क्रीड़ावर्धिनी एवं शाला समिति के अध्यक्ष विजय भालेराव, मेसो सचिव अतुल कुलकर्णी, सहसचिव सुधीर भोसले, शाला समिति महामात्य डॉ. नेहा देशपांडे, प्राचार्या अदिती कुलकर्णी, मंजुषा दुर्वे, सायली देशमुख सहित संस्था व विद्यालय के पदाधिकारी उपस्थित रहे। मिहीर आंब्रे ने प्रतियोगिता के शुभंकर वीर मास्कॉट का अनावरण कर, गुब्बारे छोड़कर तथा ज्योति प्रज्वलित कर प्रतियोगिता का उद्घाटन किया।
मिहीर आंब्रे ने कहा कि बचपन से ही उन्हें खेलों का इंतजार रहता था। खेल हमें अनुशासन सिखाते हैं, खेलभावना विकसित करते हैं और एकाग्रता बढ़ाते हैं। खेल के दौरान विकसित कौशल जीवन में अलग-अलग परिस्थितियों में काम आते हैं। यदि स्कूल उम्र में ही खेल संस्कृति विकसित हो जाए, तो आगे चलकर कोई भी खेल आसानी से अपनाया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि जीतने से ज्यादा यह ध्यान देना चाहिए कि खेल को और बेहतर तरीके से कैसे खेला जाए।

एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) भूषण गोखले ने कहा कि मिहीर के खेलप्रेम की शुरुआत इसी स्कूल से हुई थी और आज उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। इससे प्रेरणा लेकर विद्यार्थियों को भी मन में जिद और लक्ष्य बनाकर आगे बढ़ना चाहिए, क्योंकि यह जीवन के हर क्षेत्र में उपयोगी होता है।
मिहीर आंब्रे बालशिक्षण मंदिर के पूर्व छात्र रहे हैं, इसलिए उन्होंने औपचारिकता से हटकर विद्यार्थियों के बीच जाकर छोटे खिलाड़ियों से संवाद किया और खेलों के महत्व को समझाया।
प्रस्तावना में विजय भालेराव ने बताया कि प्रतियोगिता पर्यावरण के अनुकूल तरीके से आयोजित की जा रही है। यह प्रतियोगिता का 14वां वर्ष है, जिसमें संस्था की शालाओं के साथ अन्य पांच स्कूलों की भी भागीदारी है। अंत में अतुल कुलकर्णी ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. वैशाली कुलकर्णी ने किया।


