
RTI कानून बेअसर! इटावा कलेक्ट्रेट में महीनों से जांच की मांग, अफसरों की चुप्पी से सवालों के घेरे में प्रशासन
जून–जुलाई 2025 से लगातार शिकायतें, 20 दिसंबर की RTI आज तक लंबित/अंतरित
न सूचना, न जवाब, न कॉल — RTI कानून की खुलेआम धज्जियां
रिपोर्ट :विशाल समाचार संवाददाता
स्थान: इटावा उत्तर प्रदेश
दिनांक:03 फरवरी 2026
उत्तर प्रदेश में पारदर्शिता और जवाबदेही का सबसे मजबूत हथियार माने जाने वाला सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act) इटावा कलेक्ट्रेट में पूरी तरह बेअसर नजर आ रहा है। जून–जुलाई 2025 से लगातार शिकायतों और जांच की मांग के बावजूद प्रशासन की चुप्पी अब एक गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और संभावित संरक्षण की ओर इशारा कर रही है।
शिकायतकर्ता देवेन्द्र सिंह तोमर द्वारा विभिन्न विषयों — विशेषकर टैक्स और प्रशासनिक अनियमितताओं से जुड़ी शिकायतों पर जांच की मांग की गई, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी न कोई जांच शुरू हुई, न कोई अधिकारी सामने आया।
जब लगातार शिकायतों का कोई असर नहीं हुआ, तो शिकायतकर्ता ने दिनांक 20 दिसंबर 2025 को जिलाधिकारी कार्यालय, इटावा के माध्यम से RTI आवेदन संख्या 40016125032474 दाखिल किया। RTI के माध्यम से यह स्पष्ट जानकारी मांगी गई कि—
अब तक शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई?
किन अधिकारियों को जांच सौंपी गई?
यदि जांच नहीं हुई तो कारण क्या हैं?
लेकिन RTI कानून की धारा 7(1), जो स्पष्ट रूप से कहती है कि 30 दिनों के भीतर सूचना देना अनिवार्य है, इटावा कलेक्ट्रेट में सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गई।
RTI पोर्टल पर खेल?
सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि RTI पोर्टल पर आवेदन की स्थिति अब भी
👉 “लंबित / अंतरित (Pending / Transferred)”दिखाई जा रही है।
RTI जानकारों के मुताबिक, आवेदन को महीनों तक “लंबित” या “अंतरित” दिखाना सूचना न देने का एक जाना-पहचाना तरीका बनता जा रहा है। जबकि कानून साफ कहता है कि—
यदि आवेदन ट्रांसफर भी किया जाता है, तब भी सूचना उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती।
न जवाब, न कॉल, न जिम्मेदारी
शिकायतकर्ता का आरोप है कि
“हम जून–जुलाई से लगातार जांच की मांग कर रहे हैं। शिकायतें भेजीं, रिमाइंडर दिए, लेकिन कोई अधिकारी कुछ कहने को तैयार नहीं है। RTI लगाने के बाद भी पूरी तरह चुप्पी साध ली गई है।”
इस पूरे मामले में यह सवाल सबसे बड़ा बनकर उभर रहा है कि—
क्या शिकायतों में उठाए गए मुद्दे इतने संवेदनशील हैं कि अधिकारी जवाब देने से बच रहे हैं?
या फिर जानबूझकर मामले को दबाने की कोशिश हो रही है?
प्रथम अपील भी बेअसर
RTI का जवाब न मिलने पर शिकायतकर्ता द्वारा प्रथम अपील (First Appeal) भी दाखिल कर दी गई है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई।
RTI विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्रथम अपील के बाद भी सूचना नहीं दी जाती है, तो यह मामला सीधे राज्य सूचना आयोग तक जाएगा, जहां संबंधित अधिकारियों पर जुर्माना और विभागीय कार्रवाई तक का प्रावधान है।
प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल
यह पूरा प्रकरण इटावा जिले में—
प्रशासनिक पारदर्शिता,जवाबदेही
और RTI कानून के क्रियान्वयन,पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
प्रशासन की चुप्पी
खबर लिखे जाने तक जिलाधिकारी कार्यालय सहित संबंधित विभागों से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन न कोई जवाब मिला और न ही किसी अधिकारी ने प्रतिक्रिया देना जरूरी समझा।


