राष्ट्रीय पाली गौरव पुरस्कार 2026 के लिए नामांकन आमंत्रित
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान:पुणे,महाराष्ट्र
पुणे : पाली भाषा को वर्ष 2024 में अभिजात (क्लासिकल) भाषा का दर्जा प्राप्त होने के उपरांत उसके संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। पद्मपाणी फाउंडेशन द्वारा संचालित अभिजात पाली भाषा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्था, पुणे की ओर से “राष्ट्रीय पाली गौरव पुरस्कार 2026” की घोषणा की गई है। इस पुरस्कार हेतु देशभर से नामांकन आमंत्रित किए गए हैं।
पाली भाषा, बौद्ध अध्ययन तथा संबंधित शोध क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले प्राध्यापक, शोधकर्ता, साहित्यकार और कार्यकर्ताओं को इस पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान 22 मार्च 2026, रविवार को पुणे में आयोजित अखिल भारतीय पाली साहित्य सम्मेलन के अवसर पर विशिष्ट अतिथियों के हाथों प्रदान किया जाएगा।
आयोजकों के अनुसार, सम्मेलन में देशभर से पाली एवं बौद्ध अध्ययन क्षेत्र के विद्वान, प्राध्यापक, शोधकर्ता और विद्यार्थी बड़ी संख्या में भाग लेंगे। साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर के पाली विशेषज्ञों, वरिष्ठ चिंतकों एवं विभिन्न विश्वविद्यालयों के मान्यवरों की उपस्थिति में पुरस्कार वितरण समारोह संपन्न होगा।
पात्रता मानदंड
देश के विभिन्न महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में पाली भाषा विभाग या बौद्ध अध्ययन विभाग से जुड़े प्राध्यापक, विभागाध्यक्ष, शोधकर्ता तथा पाली साहित्य सृजन, ग्रंथ संपादन, अनुवाद, पाठ्यक्रम विकास या पाली भाषा के प्रचार-प्रसार में सक्रिय रूप से कार्यरत व्यक्ति इस पुरस्कार के लिए पात्र होंगे।
नामांकन प्रक्रिया
इस पुरस्कार के लिए स्वयं-नामांकन (Self-Nomination) किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त पाली विभागाध्यक्ष या सहकर्मियों द्वारा भी नामांकन प्रस्तुत किया जा सकता है। नामांकन प्रपत्र पूर्ण रूप से भरकर उसके साथ आवश्यक दस्तावेज — जैसे विस्तृत जीवनवृत्त (CV), प्रकाशित पुस्तकें या शोध पत्र, कार्य का प्रमाण आदि — संलग्न करना अनिवार्य है।
नामांकन प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 15 मार्च 2026 निर्धारित की गई है। नामांकन प्रपत्र एवं अधिक जानकारी के लिए इच्छुक व्यक्ति rahuldambale@gmail.com पर ई-मेल कर सकते हैं अथवा 9822098870 पर संपर्क कर सकते हैं।
विशेष अपील
आयोजकों ने पाली भाषा से संबंधित विभागाध्यक्षों से विशेष आग्रह किया है कि वे अपने विभाग के योग्य एवं पात्र उम्मीदवारों के नाम आगे बढ़ाएं।
मुख्य संयोजक राहुल डंबाले ने कहा कि पाली भाषा को अभिजात दर्जा मिलने के बाद उसके शैक्षणिक और सांस्कृतिक पुनरुत्थान के लिए ऐसे पुरस्कार अत्यंत आवश्यक हैं। राष्ट्रीय स्तर पर कार्य करने वाले विद्वानों को सम्मानित कर नई पीढ़ी को प्रेरित करना ही इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने देशभर के पाली एवं बौद्ध अध्ययन से जुड़े सभी विद्वानों से सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने और योग्य उम्मीदवारों के नामांकन भेजने का आह्वान किया।



