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सेवानिवृत्ति योजना में छिपे जोखिमों का खुलासा: ऑम्नीसायंस कैपिटल की शोध रिपोर्ट जारी

सेवानिवृत्ति योजना में छिपे जोखिमों का खुलासा: ऑम्नीसायंस कैपिटल की शोध रिपोर्ट जारी

दीर्घकालिक सेवानिवृत्ति के लिए इक्विटी-आधारित रणनीति हो सकती है प्रभावी समाधान — अश्विनी शामी

रिपोर्ट: विशाल समाचार

स्थान:  मुंबई ,महाराष्ट्र

मुंबई। बढ़ती जीवन प्रत्याशा और लंबी सेवानिवृत्ति अवधि के दौर में वित्तीय योजना को लेकर नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। इसी परिप्रेक्ष्य में मुंबई स्थित निवेश प्रबंधन फर्म OmniScience Capital ने “The Science of Retirement Planning: Navigating Hidden Risks in a Long Retirement” शीर्षक से एक विस्तृत शोध-आधारित रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में दीर्घकालिक सेवानिवृत्ति के दौरान उत्पन्न होने वाले संरचनात्मक जोखिमों और उनके प्रबंधन की रणनीतियों का विश्लेषण किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, आज सेवानिवृत्ति केवल बचत का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह रणनीतिक पूंजी प्रबंधन का प्रश्न बन चुका है। बढ़ती महंगाई, लंबी आयु और अनिश्चित बाजार परिस्थितियां पारंपरिक निवेश विकल्पों की सीमाओं को उजागर कर रही हैं।

फर्म के अध्यक्ष एवं मुख्य पोर्टफोलियो प्रबंधक अश्विनी शामी ने कहा कि वर्तमान आर्थिक परिदृश्य में फिक्स्ड डिपॉजिट और लाइफ एन्युटी जैसे पारंपरिक साधन 35 से 40 वर्षों की सेवानिवृत्ति अवधि में पूंजी की वास्तविक क्रय शक्ति को बनाए रखने में पर्याप्त नहीं हो सकते। उनके अनुसार, यदि सेवानिवृत्ति लंबी अवधि तक चलती है, तो निवेश रणनीति को वैज्ञानिक दृष्टिकोण और डेटा-आधारित विश्लेषण पर आधारित होना चाहिए।

रिपोर्ट में चार प्रमुख विकल्पों—फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), लाइफ एन्युटी, सिस्टेमेटिक विद्ड्रॉअल प्लान (SWP) और इक्विटी-आधारित आक्रामक रणनीति—का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। यह विश्लेषण ₹1 करोड़ की प्रारंभिक पूंजी, ₹6 लाख की वार्षिक आय आवश्यकता तथा 100 वर्ष की जीवन प्रत्याशा के अनुमान पर आधारित है।

अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि केवल FD आधारित रणनीति में 70 वर्ष की आयु तक मुद्रास्फीति-समायोजित आय में 50 प्रतिशत से अधिक गिरावट संभव है और मध्य-70 के दशक तक पूंजी समाप्त होने का जोखिम बना रहता है। लाइफ एन्युटी आजीवन आय सुनिश्चित करती है, परंतु निश्चित भुगतान संरचना के कारण 100 वर्ष की आयु तक वास्तविक क्रय शक्ति में 80 प्रतिशत से अधिक कमी आ सकती है। वहीं SWP मॉडल भी 80 वर्ष की आयु के आसपास पूंजी क्षरण के जोखिम से पूरी तरह मुक्त नहीं पाया गया।

रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि डेट बफर के साथ संतुलित इक्विटी-आधारित रणनीति अपेक्षाकृत अधिक प्रभावी हो सकती है। अध्ययन के अनुसार, यह मॉडल न केवल पूंजी संरक्षण की संभावना बढ़ाता है, बल्कि 100 वर्ष की आयु तक 30 प्रतिशत से अधिक अधिशेष उत्पन्न करने की क्षमता भी रखता है।

ब्रेक-ईवन कॉर्पस के संदर्भ में भी इक्विटी-आधारित रणनीति अधिक पूंजी-कुशल मानी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, वार्षिक व्यय का लगभग 20 गुना कॉर्पस इस मॉडल में पर्याप्त हो सकता है, जबकि FD और एन्युटी आधारित मॉडल के लिए लगभग 40 गुना तथा SWP के लिए लगभग 30 गुना कॉर्पस की आवश्यकता दर्शाई गई है।

अश्विनी शामी ने कहा कि सेवानिवृत्ति पोर्टफोलियो में डेट और इक्विटी का संतुलित मिश्रण तथा निकासी को पोर्टफोलियो प्रदर्शन से जोड़ना दीर्घकालिक वित्तीय स्वतंत्रता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने निवेशकों को प्रारंभिक तीन से पांच वर्षों में संभावित बाजार अस्थिरता के लिए मानसिक रूप से तैयार रहने की सलाह भी दी।

OmniScience Capital एक अखिल-IIT संस्थापित निवेश प्रबंधन फर्म है, जो वैज्ञानिक एवं शोध-आधारित निवेश ढांचे में विशेषज्ञता रखती है। फर्म के पास ₹1,000 करोड़ से अधिक की प्रबंधनाधीन संपत्ति है और यह 15 से अधिक देशों तथा 25 से अधिक भारतीय राज्यों में उच्च निवल मूल्य वाले निवेशकों और फैमिली ऑफिस को सेवाएं प्रदान करती है।

रिपोर्ट का सार यह संकेत देता है कि बदलते आर्थिक परिवेश में सेवानिवृत्ति योजना को पारंपरिक सोच से आगे बढ़कर दीर्घकालिक, वैज्ञानिक और संतुलित निवेश रणनीति की आवश्यकता है।

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