
“रंगतरंग” जैसी कला प्रदर्शनी कलाकारों को देती है नई दिशा: – शंकर चव्हाण
रिपोर्ट:विशाल समाचार
स्थान: मुंबई | महाराष्ट्र प्रतिनिधि
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में कला, संस्कृति और सृजनात्मक अभिव्यक्ति को निरंतर नया मंच मिलता रहा है। इसी कड़ी में हाल ही में “रंगतरंग” नामक बहुप्रतीक्षित कला प्रदर्शनी का आयोजन आर्टिस्ट सेंटर गैलरी, जहांगीर आर्ट गैलरी के सामने किया गया। विविध शैलियों, माध्यमों और विषयों के संगम से सजी इस प्रदर्शनी को कला प्रेमियों का उल्लेखनीय प्रतिसाद प्राप्त हुआ।
प्रदर्शनी का अवलोकन करने के पश्चात मुंबई उच्च न्यायालय के अधिवक्ता शंकर चव्हाण ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि “रंगतरंग जैसी कला प्रदर्शनी केवल चित्रों के प्रदर्शन का स्थल नहीं होती, बल्कि यह कलाकारों के संघर्ष, उनके विचारों और भविष्य की दिशा का दर्पण होती है। ऐसे उपक्रम नवोदित एवं अनुभवी कलाकारों को आत्मविश्वास प्रदान करते हैं तथा कला के सम्मान को सुदृढ़ करते हैं।”
“रंगतरंग” प्रदर्शनी में चित्रकला, संकल्पनात्मक कला, अमूर्त शैली तथा सामाजिक और मानवीय भावनाओं पर आधारित विविध कृतियों का प्रदर्शन किया गया। प्रत्येक कलाकृति में कलाकार की विशिष्ट पहचान, उसकी दृष्टि तथा समाज के प्रति उसका दृष्टिकोण स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुआ।
इस प्रदर्शनी में वैशाली अय्या, अल्पना जोशी, पल्लवी रहाटे, कल्पना गायकवाड़, दिपाली जोशी, यतींद्र सप्रे, अमोल सुळे, गौतम कुमार राव, गोपी मुंडे, प्रणिता पिंपळकर, भारती सेन, सुलभा चंदने एवं वर्षा वालावलकर सहित अनेक कलाकारों ने सहभागिता की। सभी कलाकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सृजनात्मकता के विविध आयाम प्रस्तुत किए।
अधिवक्ता शंकर चव्हाण ने आगे कहा, “वर्तमान के तीव्र गति और तकनीक-प्रधान युग में कला की अपनी विशिष्ट भाषा और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। ‘रंगतरंग’ जैसी प्रदर्शनी कलाकारों को केवल पहचान ही नहीं देती, बल्कि उनके भविष्य के कलात्मक सफर को नई दिशा प्रदान करती है। कला का सम्मान करने वाला समाज ही सुसंस्कृत समाज का निर्माण कर सकता है।”
प्रदर्शनी में उपस्थित कला प्रेमियों ने कलाकारों की कृतियों की सराहना करते हुए इसे “भावनाओं का रंगीन संवाद” बताया। उपस्थित जनों ने मत व्यक्त किया कि नवोदित कलाकारों को प्रोत्साहन और अनुभवी कलाकारों की कला को नए दृष्टिकोण से समझने के लिए ऐसे आयोजनों का निरंतर होना आवश्यक है।
अंत में शंकर चव्हाण ने कलाकारों को संदेश देते हुए कहा, “कलाकारों को अपनी कला के प्रति ईमानदार रहना चाहिए। बाजार से अधिक भावनाओं को, प्रसिद्धि से अधिक सत्य को और प्रतिस्पर्धा से अधिक निरंतरता को महत्व देने से कला स्वतः समाज तक पहुंचती है।”
“रंगतरंग” प्रदर्शनी कलाकार और दर्शक के मध्य संवाद का प्रभावी माध्यम सिद्ध हुई। इस प्रकार के आयोजन मुंबई की सांस्कृतिक पहचान को और अधिक समृद्ध कर रहे हैं।



