
श्रीकृष्ण नीति आज भी समाज के लिए आवश्यक और मार्गदर्शक – मयूर भावे
नागरिक सोशल फाउंडेशन द्वारा व्याख्यानमाला संपन्न
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान:पुणे महाराष्ट्र
पुणे – कृष्ण नीति केवल भगवान श्रीकृष्ण द्वारा कुरुक्षेत्र के रणक्षेत्र में दिए गए उपदेशों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका संपूर्ण जीवन ही कृष्ण नीति का उदाहरण है। इसके लिए श्रीकृष्ण के व्यक्तित्व को समझना आवश्यक है। उनके सभी गुणों को अपनाना संभव नहीं, लेकिन उनमें से एक भी गुण यदि हम आत्मसात कर लें तो वह हमारे जीवन को दिशा दे सकता है। श्रीकृष्ण के विचार आज भी समाज के लिए उतने ही आवश्यक और मार्गदर्शक हैं, ऐसा मत वरिष्ठ विचारक मयूर भावे ने व्यक्त किया।
वे नागरिक सोशल फाउंडेशन द्वारा आयोजित “कृष्ण नीति की आवश्यकता” विषय पर आयोजित व्याख्यानमाला में बोल रहे थे। इस अवसर पर संस्था के वक्ता विभाग प्रमुख दीपक मेहेंदळे, विश्वस्त अमेय सप्रे, प्रीतम थोरवे सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
मयूर भावे ने कहा कि आज के समय में हिंसा का जो अर्थ निकाला जा रहा है, वह श्रीकृष्ण का विचार नहीं है। श्रीकृष्ण के अनुसार समाज के हित के लिए आवश्यक कार्य यदि दृढ़ता से किया जाए तो वह हिंसा नहीं, बल्कि पराक्रम कहलाता है। यह संदेश हमें महाभारत से मिलता है। आज अहिंसा की भी कई बार गलत व्याख्या की जाती है, इसलिए श्रीकृष्ण के पराक्रम और कर्तव्यनिष्ठा के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुँचाना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने आगे कहा कि भूतकाल को विस्मृत किए बिना और भविष्य की चिंता रखते हुए वर्तमान को सार्थक बनाना ही श्रीकृष्ण नीति है। यह नीति केवल क्रिया नहीं, बल्कि उद्देश्य को प्रधानता देती है। इसलिए हमारा उद्देश्य सदैव श्रेष्ठ और राष्ट्रहित में होना चाहिए। यदि प्रत्येक युवा अपने जीवन में कृष्ण नीति को अपनाकर देश के लिए सकारात्मक योगदान देने का संकल्प ले, तो भारत निश्चित रूप से एक समृद्ध राष्ट्र के रूप में उभर सकता है।
अमेय सप्रे ने कहा कि व्याख्यानमाला के माध्यम से “राष्ट्र प्रथम” का विचार युवा पीढ़ी तक पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है। विभिन्न क्षेत्रों के मान्यवरों को इस अभियान से जोड़ने के लिए संस्था निरंतर प्रयासरत है। ‘भक्ति शक्ति’ उपक्रम के माध्यम से प्राचीन मंदिरों का इतिहास समाज के सामने लाने का कार्य किया जा रहा है। साथ ही, ऑनलाइन बेटिंग ऐप्स पर प्रतिबंध लगाकर युवाओं का भविष्य सुरक्षित करने के लिए भी संस्था ने पहल की है।
मयूर भावे ने कहा कि भारतीय संस्कृति श्रीराम और श्रीकृष्ण की विचारधारा पर आधारित है। श्रीराम आदर्शवाद के प्रतीक हैं, जबकि श्रीकृष्ण व्यवहारिकता और यथार्थवाद के। देश को सशक्त और समृद्ध बनाने के लिए इन दोनों विचारधाराओं का संतुलन आवश्यक है। नागरिक सोशल फाउंडेशन इस दिशा में कार्य कर रहा है, जो निश्चित ही सराहनीय है।
कार्यक्रम का संचालन सायली गोडबोले जोशी ने किया तथा आभार प्रदर्शन पुष्कर सप्रे ने किया।



