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खराब सर्विस के कारण भारतीयों को हर साल 10.8 घंटों का नुकसान; 44% ग्राहक ब्रांड बदलने को तैयार: सर्विसनाउ की रिपोर्ट

खराब सर्विस के कारण भारतीयों को हर साल 10.8 घंटों का नुकसान; 44% ग्राहक ब्रांड बदलने को तैयार: सर्विसनाउ की रिपोर्ट

रिपोर्ट :विशाल समाचार

स्थान:भारत देश

 

भारत, : ग्राहकों की बढ़ती उम्मीदें, बिखरे हुए सर्विस प्लेटफॉर्म और सहानुभूति की कमी—ये तीन कारक भारत में ग्राहकों के भरोसे के लिए सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरे हैं। सर्विसनाउ की तीसरी ‘कस्टमर एक्सपीरियंस (ग्राहक अनुभव) रिपोर्ट’ के अनुसार, ऑटोमेशन ने गति और सुविधा तो बढ़ाई है, लेकिन सिस्टम की कमियां अब भी ग्राहकों के भरोसे को कमजोर कर रही हैं। यह अध्ययन 5,000 से अधिक भारतीय उपभोक्ताओं और 425 कस्टमर सर्विस प्रोफेशनल्स से मिली जानकारी पर आधारित है।

भारतीय कस्टमर सर्विस एक निर्णायक मोड़ पर

रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ एक खराब अनुभव के कारण 10 में से 4 से अधिक ग्राहक उस ब्रांड का साथ छोड़ सकते हैं। भारतीय उपभोक्ता हर साल औसतन 10.8 घंटे केवल अपनी शिकायतों को सुलझाने में बर्बाद कर देते हैं। एआई को अपनाने के बावजूद सर्विस की प्रक्रिया अब भी जटिल बनी हुई है। एक समस्या को सुलझाने के लिए सर्विस टीम के सदस्यों को औसतन चार अलग-अलग सिस्टम्स का इस्तेमाल करना पड़ता है, जिससे देरी होती है और भ्रम की स्थिति पैदा होती है।

श्री सुमीत माथुर, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर, सर्विसनाउ इंडिया टेक्नोलॉजी एंड बिजनेस सेंटर ने कहा, “भारत में ‘कस्टमर एक्सपीरियंस’ एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। कंपनियों ने एआई में निवेश तो किया है, लेकिन उनका अंदरूनी ढांचा—यानी बिखरे हुए सिस्टम और अलग-थलग पड़ा डेटा—उन्हें पीछे खींच रहा है। समाधान यह है कि हम मौजूदा संसाधनों को एक साथ जोड़ें, ताकि एआई और इंसान मिलकर बेहतर नतीजे दे सकें। सर्विसनाउ इसी बदलाव को मुमकिन बनाता है।

सर्विसनाउ की 2026 की रिपोर्ट भारत में कस्टमर एक्सपीरियंस की यात्रा को प्रभावित करने वाले तीन बड़े संरचनात्मक बदलावों को रेखांकित करती है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में ग्राहकों के अनुभव को प्रभावित करने वाले तीन बड़े बदलाव देखे गए हैं:

 

1. सहानुभूति और जुड़ाव की कमी

आज के भारतीय ग्राहक चाहते हैं कि उन्हें मिलने वाली सर्विस तेज, आसान और उनकी स्थिति को समझने वाली हो। लेकिन हकीकत इसके उलट है:

48% ग्राहकों का कहना है कि सर्विस के दौरान सहानुभूति की कमी रहती है और कंपनी उनकी स्थिति को ठीक से नहीं समझती। यह उनकी नाराजगी का सबसे बड़ा कारण है।

45% ग्राहकों ने बताया कि उन्हें एक से दूसरे विभाग या व्यक्ति के पास बार-बार ट्रांसफर किया जाता है, जिससे उन्हें लगता है कि सर्विस बहुत ही बेजान और खंडित है।

इस अंतर को पाटना ही ग्राहकों के साथ एक मजबूत और भरोसेमंद रिश्ता बनाने की कुंजी साबित होगा।

दिनेश नारायण, ग्लोबल चीफ इंफॉर्मेशन ऑफिसर, टीवीएस सप्लाई चेन सॉल्यूशंस ने कहा, “आज के सप्लाई चेन परिदृश्य में कस्टमर एक्सपीरियंस केवल सर्विस लेवल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम बदलावों के प्रति कितनी समझदारी से प्रतिक्रिया देते हैं। जैसे-जैसे नेटवर्क अधिक जटिल होते जा रहे हैं, हमें ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म की ज़रूरत है जो डेटा, वर्कफ़्लो और लोगों को रियल टाइम में जोड़ सकें।

सर्विसनाउ के साथ हमारे अनुभव से पता चलता है कि AI-संचालित वर्कफ़्लो वैश्विक संचालन में बेहतर विजिबिलिटी (दृश्यता) और तेज़ निर्णय लेने में मदद कर सकते हैं। इस कस्टमर एक्सपीरियंस रिपोर्ट से प्राप्त अंतर्दृष्टियाँ हमारे ज़मीनी अनुभव से पूरी तरह मेल खाती हैं—वे संगठन जो अपने वर्कफ़्लो में इंटेलिजेंस (बुद्धिमत्ता) को शामिल करते हैं, वे अधिक सुसंगत, मज़बूत और ग्राहक-केंद्रित परिणाम देने के लिए बेहतर स्थिति में होते हैं।”

खराब सर्विस अब मंजूर नहीं

भारतीय ग्राहक अब सर्विस में किसी भी तरह की रुकावट या असुविधा बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं। उनके लिए सर्विस का अनुभव ही यह तय करता है कि वे किसी ब्रांड पर भरोसा करेंगे या नहीं। जब सर्विस उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती, तो उनकी नाराजगी न केवल तेजी से बढ़ती है, बल्कि ब्रांड के लिए नुकसानदेह भी साबित होती है:

34% ग्राहक सार्वजनिक रूप से खराब रिव्यू या शिकायत पोस्ट करते हैं, जिससे ब्रांड की साख को सीधा नुकसान पहुँचता है।

37% लोग अपने परिवार और दोस्तों को अपने खराब अनुभव के बारे में बताते हैं, जिससे कंपनी की छवि पर बुरा असर पड़ता है।

53% ग्राहक अधूरी या अस्पष्ट जानकारी से चिढ़ जाते हैं। यह साफ दिखाता है कि अब ग्राहक केवल सही जानकारी ही नहीं, बल्कि एक मानवीय और समझदारी भरा व्यवहार भी चाहते हैं।

बिखरे हुए सिस्टम्स: बिजनेस के लिए बड़ी बाधा

बेहतरीन कस्टमर एक्सपीरियंस इत्तेफाक से नहीं मिलते, बल्कि इसके लिए एक ‘कनेक्टेड प्लेटफॉर्म’ की जरूरत होती है। अलग-अलग और बिखरे हुए टूल्स अक्सर काम बिगाड़ देते हैं। जब सर्विस टीम के सदस्य अपना केवल 48% समय ही ग्राहकों की मदद करने में दे पा रहे हैं, तो यह समझ लेना चाहिए कि सिस्टम का यह बिखराव बिजनेस की असली ताकत को कम कर रहा है। आज के दौर में निर्बाध अनुभव देने के लिए सर्विस ऑपरेशंस को आपस में जोड़ना और उन्हें सरल बनाना सबसे अनिवार्य शर्त है।

सर्विस प्रतिनिधियों के सामने मुख्य चुनौतियां:

जटिल समस्याओं को सुलझाने में औसतन 39 घंटे तक का समय लग जाता है।

30% प्रतिनिधियों का मानना है कि बहुत ज्यादा टूल्स होने की वजह से उनके काम की रफ्तार धीमी पड़ जाती है।

श्री माथुर ने आगे कहा, “आज की ‘एक्सपीरियंस इकोनॉमी’ में टिके रहने के लिए सर्विस की इन कमियों को दूर करना अब कोई विकल्प नहीं, बल्कि एक रणनीतिक जरूरत है। सहानुभूति, गति और बुद्धिमत्ता ही अब ग्राहकों के भरोसे की नई पूंजी हैं। कंपनियों को उन प्लेटफॉर्म्स में निवेश करना होगा जो इन मूल्यों को हकीकत में बदल सकें।”

सर्विस एजेंटों का अनुभव और एआई कस्टमर सर्विस प्रतिनिधि एआई को भविष्य की राह मानते हैं:

53% प्रतिनिधियों का कहना है कि अगली पीढ़ी का ‘कस्टमर एक्सपीरियंस’ (CX) देने के लिए एआई बेहद जरूरी है।

52% का मानना है कि एआई की मदद से उनके काम का बोझ और मानसिक दबाव कम हुआ है।

इसके बावजूद, जमीनी चुनौतियां अब भी बरकरार हैं। सर्विस प्रतिनिधि अपना केवल 48% समय ही ग्राहकों की वास्तविक समस्याओं को सुलझाने में लगा पाते हैं। उनका बाकी आधा समय कागजी कार्रवाई और आपस में न जुड़ने वाले सिस्टम्स के बीच तालमेल बिठाने में ही निकल जाता है।

उत्पादकता बढ़ाने का पावरहाउस: कस्टमर एक्सपीरियंस

सर्विसनाउ की ‘कस्टमर एक्सपीरियंस रिपोर्ट 2025’ के अनुसार, भारत में सर्विस में होने वाली देरी के कारण हर साल सामूहिक रूप से 15 अरब घंटे बर्बाद होते हैं। व्यवसायों के लिए यह करीब 55 अरब डॉलर की उत्पादकता बढ़ाने का एक बड़ा अवसर है। आज जब 66% उपभोक्ता एआई पर भरोसा जता रहे हैं और 80% पहले से ही चैटबॉट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो ‘कस्टमर एक्सपीरियंस’ (CX) का आधुनिकीकरण अब सिर्फ एक तकनीकी सुधार नहीं रह गया है। इसे व्यवसायों और नागरिकों—दोनों के लिए आर्थिक कुशलता और राष्ट्रीय उत्पादकता बढ़ाने के एक शक्तिशाली माध्यम के रूप में देखा जा रहा है।

भारत में कस्टमर एक्सपीरियंस का भविष्य: तेज, संवेदनशील और सशक्त

भारत में ‘कस्टमर एक्सपीरियंस’ का अगला पड़ाव इस बात से तय होगा कि कंपनियां एआई और मानवीय बुद्धिमत्ता को कितनी बखूबी से एक साथ जोड़ पाती हैं:

एआई: यह जटिलता, बड़े स्तर के कामकाज और तेज रफ्तार को संभालता है।

मानवीय सहयोग: सर्विस प्रतिनिधि सहानुभूति, सही निर्णय लेने की क्षमता और भरोसा प्रदान करते हैं।

एकीकृत प्लेटफॉर्म: ये पूर्वानुमान आधारित और निर्बाध सर्विस अनुभव को मुमकिन बनाते हैं।

जब सर्विस की कमियों के कारण भारतीयों को हर साल औसतन 10.8 घंटे गंवाने पड़ते हैं और लगभग आधे ग्राहक ब्रांड छोड़ देते हैं, तब कस्टमर एक्सपीरियंस केवल कामकाज से जुड़ा मुद्दा नहीं रह जाता—यह एक बड़ी आर्थिक प्राथमिकता बन जाता है। भविष्य के सफल बिजनेस लीडर वही होंगे, जो एक ही प्लेटफॉर्म पर एआई और इंसानी कुशलता को साथ लेकर चलेंगे, ताकि किसी भी प्रकार की सर्विस विफलता को होने से पहले ही रोका जा सके।

सर्विसनाउ इस दिशा में अपनी भूमिका को लगातार मजबूत कर रहा है। कंपनी सर्विस प्लेटफॉर्म्स को एकजुट करने, जिम्मेदारी के साथ एआई को लागू करने और व्यवसायों को ऐसा ‘कस्टमर एक्सपीरियंस’ देने में मदद कर रही है, जो तेज, स्मार्ट और अधिक मानवीय हो।

 

 

 

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