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पुणे में रेडी रेकनर दरों में प्रस्तावित 10% वृद्धि तुरंत रद्द की जाए – AMCCIE की ठोस मांग

पुणे में रेडी रेकनर दरों में प्रस्तावित 10% वृद्धि तुरंत रद्द की जाए – AMCCIE की ठोस मांग

रिपोर्ट: विशाल समाचार

स्थान:पुणे, महाराष्ट्र

पुणे : वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए पुणे में राज्य के नोंदणी व मुद्रांक शुल्क विभाग द्वारा रेडी रेकनर दरों में 10 प्रतिशत वृद्धि करने का प्रस्ताव सामने आया है। इस प्रस्ताव का अग्रवाल मारवाड़ी चेंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्रीज एंड एजुकेशन (AMCCIE) ने कड़ा और स्पष्ट विरोध किया है।

 

AMCCIE के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान में जमीन, सीमेंट, स्टील, मजदूरी तथा अन्य निर्माण सामग्री की कीमतों में भारी वृद्धि हो चुकी है। इसके कारण घरों की कीमतें पहले ही काफी बढ़ गई हैं और आम नागरिकों, मध्यमवर्गीय परिवारों तथा युवाओं के लिए अपना घर खरीदना बेहद कठिन हो गया है। ऐसी स्थिति में यदि पुणे में रेडी रेकनर दरों में और 10 प्रतिशत वृद्धि की जाती है तो स्टांप ड्यूटी और संपत्ति लेनदेन की लागत में बड़ी बढ़ोतरी होगी, जिससे आम लोगों का घर खरीदने का सपना और भी दूर हो जाएगा।

 

उन्होंने आगे कहा कि पुणे महाराष्ट्र का तेजी से विकसित हो रहा औद्योगिक और आईटी केंद्र है, और रियल एस्टेट तथा निर्माण क्षेत्र शहर की अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। इस क्षेत्र के माध्यम से लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है। लेकिन रेडी रेकनर दरों में बार-बार वृद्धि होने से संपत्ति के लेनदेन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, निवेश कम होता है और बाजार की गति धीमी पड़ जाती है।

इस पृष्ठभूमि में AMCCIE की ओर से महाराष्ट्र सरकार के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी गई हैं —

• पुणे में रेडी रेकनर दरों में प्रस्तावित 10 प्रतिशत वृद्धि तुरंत रद्द की जाए।• वर्तमान रेडी रेकनर दरों को कम से कम अगले पांच वर्षों तक स्थिर रखा जाए।• आम नागरिकों को किफायती आवास उपलब्ध कराने के लिए सरकार जनहितकारी और लोकाभिमुख निर्णय ले।

 

साथ ही रियल एस्टेट क्षेत्र की प्रमुख संस्थाएं जैसे CREDAI, NAREDCO तथा अन्य बिल्डर्स और उद्योग संगठनों से भी अपील की गई है कि वे इस प्रस्तावित वृद्धि का एकजुट होकर कड़ा विरोध करें और आम घर खरीदारों के हित में एक मजबूत और संयुक्त भूमिका निभाएं।

 

इसके अलावा सभी दलों के विधायक, मंत्रिमंडल के मंत्री तथा माननीय मुख्यमंत्री से भी अनुरोध किया गया है कि वे इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करते हुए जनहित में उचित निर्णय लें।

 

सरकार से अपेक्षा की गई है कि वह उद्योग, रियल एस्टेट क्षेत्र और आम नागरिकों के हितों के बीच संतुलन बनाते हुए जनहित और विकास को ध्यान में रखते हुए निर्णय ले।

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