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कामायनी के 300 बच्चों को ‘वेस्टझोन’ की ओर से नए सलवार-कुर्ते की सौगात

कामायनी के 300 बच्चों को ‘वेस्टझोन’ की ओर से नए सलवार-कुर्ते की सौगात

नए सलवार-कुर्तों से खिल उठे कामायनी के बच्चे

रिपोर्ट :विशाल समाचार

स्थान:पुणे महाराष्ट्र

पुणे: नए-नवेले सलवार-कुर्ते पहने, चेहरे पर मासूम मुस्कान और आंखों में खुशी की चमक—ऐसे ही उल्लास भरे माहौल में कामायनी संस्था के विशेष बच्चों ने नववर्ष का स्वागत किया। गुढी पाडवा के अवसर पर संस्था के 300 बच्चों को सलवार-कुर्तों का वितरण किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन युवा सामाजिक कार्यकर्ता ऋषिकेश कोंढाळकर और अनिकेत कोंढाळकर के प्रयासों से ‘वेस्टझोन’ परिवार की ओर से किया गया। कार्यक्रम गोखलेनगर स्थित कामायनी संस्था के मुनोत सभागार में संपन्न हुआ।

इस अवसर पर प्रोग्रेसिव एजुकेशन सोसायटी की सहकार्यवाह, सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय की प्रबंधन परिषद सदस्य और पूर्व नगरसेविका प्रो. डॉ. ज्योत्स्ना एकबोटे, नगरसेविका एवं मॉडर्न कॉलेज की प्राचार्या प्रो. डॉ. निवेदिता एकबोटे, अपर पुलिस आयुक्त राजेश बनसोडे, यशदा के अतिरिक्त जिलाधिकारी राजीव नंदकर, स्वीकृत नगरसेवक रविंद्र साळेगावकर, बांधकाम व्यवसायी अनिरुद्ध रांजेकर, मुकुल माधव फाउंडेशन के समन्वयक सचिन कुलकर्णी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

प्रो. डॉ. निवेदिता एकबोटे ने कहा कि इन विशेष बच्चों के बीच आकर एक अलग ही सकारात्मक अनुभव मिलता है। उनके चेहरे की मासूमियत समाज में मानवता को जीवित रखने का संदेश देती है। उन्होंने सुझाव दिया कि स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों को ऐसे बच्चों के साथ संवाद के अवसर दिए जाने चाहिए, ताकि वे भी मुख्यधारा से जुड़ सकें।

अपर पुलिस आयुक्त राजेश बनसोडे ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत बैंड की सराहना करते हुए कहा कि इन बच्चों में अपार प्रतिभा है और वे भविष्य में बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। वहीं, प्रो. डॉ. ज्योत्स्ना एकबोटे ने दिव्यांग बच्चों की सेवा को सच्ची ईश्वर सेवा बताया।

कार्यक्रम में डॉ. आशुतोष भूपटकर ने दिव्यांग कल्याण से आगे बढ़कर सशक्तिकरण की दिशा में कार्य करने की आवश्यकता पर जोर दिया। रविंद्र साळेगावकर ने कहा कि इन बच्चों के साथ नववर्ष मनाना अत्यंत आनंददायक अनुभव है।

समाज के वंचित वर्ग के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने के उद्देश्य से इस पहल को अंजाम दिया गया। बच्चों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उनके लिए विशेष रूप से उपयुक्त कपड़े तैयार किए गए। ऋषिकेश कोंढाळकर ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लाना और समाज में संवेदनशीलता का संदेश देना है। उन्होंने सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।

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