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भगत सिंह केवल क्रांतिकारी नहीं, बल्कि प्रेरक विचार और दृष्टि हैं: किरणजीत सिंह

भगत सिंह केवल क्रांतिकारी नहीं, बल्कि प्रेरक विचार और दृष्टि हैं: किरणजीत सिंह

स्वतंत्रता और न्याय की लड़ाई अभी खत्म नहीं—पुणे में बोले भगत सिंह के परिजन

रिपोर्ट :विशाल समाचार

स्थान:पुणे महाराष्ट्र

पुणे। शहीद भगत सिंह केवल एक क्रांतिकारी नहीं, बल्कि एक विचार और जीवन दृष्टि हैं। यह बात उनके भतीजे और विचारक किरणजीत सिंह ने गुरुवार को पुणे में मीडिया से बातचीत के दौरान कही। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के 75 वर्ष बाद भी आम जनता, किसान और मजदूर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जो चिंता का विषय है।

सरहद और कृष्णा पब्लिकेशन के संयुक्त तत्वावधान में शहीद भगत सिंह की भतीजी द्वारा लिखित पुस्तक ‘युगदृष्टा भगत सिंह और उनके मृत्युंजयी पूर्वज’ का प्रकाशन तथा किसान नेता राजू शेट्टी को ‘युगदृष्टा भगत सिंह राष्ट्रीय पुरस्कार’ प्रदान करने का कार्यक्रम शुक्रवार (20 मार्च) को आयोजित किया गया है। इसी सिलसिले में किरणजीत सिंह पुणे पहुंचे हैं।

किरणजीत सिंह ने कहा कि भगत सिंह के परिवार में तीन पीढ़ियों से देश और श्रमिक वर्ग के लिए संघर्ष की परंपरा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल हथियारों से स्वतंत्रता नहीं मिलती, बल्कि विचारों की ताकत ही असली परिवर्तन लाती है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव जैसे क्रांतिकारियों के त्याग से प्रेरणा लें और समाज व देश के लिए सकारात्मक कार्य करें।

युवा पीढ़ी पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी कहीं न कहीं दिशाहीन और स्वकेंद्रित होती जा रही है। ऐसे में भगत सिंह के विचारों को समझना और उन्हें जीवन में उतारना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सत्ता बदलती रहती है, लेकिन व्यवस्था में अपेक्षित बदलाव नहीं आया है, इसलिए असली स्वराज अभी दूर है।

उन्होंने यह भी कहा कि आज भी किसान, मजदूर, महिलाएं अपने मूल अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं और शोषण की स्थिति बनी हुई है। भगत सिंह को केवल नायक के रूप में देखने के बजाय उनके विचारों को समझना अधिक महत्वपूर्ण है। यही पुस्तक युवाओं तक उनके विचारों को पहुंचाने का माध्यम बनेगी।

‘वन नेशन, वन रिलिजन, वन इलेक्शन’ जैसी अवधारणाओं पर भी उन्होंने असहमति जताई और कहा कि भारत की विविधता ही उसकी असली ताकत है। उन्होंने कहा कि देश के लिए बलिदान देने वाले क्रांतिकारियों के परिवार आज भी संघर्ष कर रहे हैं और उनके विचारों को संरक्षित रखना समय की मांग है।

इस अवसर पर संजय नहार, चेतन कोळी तथा अनुवादक इंद्रायणी चव्हाण भी उपस्थित रहे।

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