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युवोन्मेश’ मैफिल ने श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध, युवा कलाकारों ने बांधा समां

‘युवोन्मेश’ मैफिल ने श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध, युवा कलाकारों ने बांधा समां

रिपोर्ट: विशाल समाचार

स्थान: पुणे महाराष्ट्र

पुणे – शास्त्रीय संगीत की मधुर राग-रागिनियों, पखावज वादन की दमदार जुगलबंदी और तालियों की गूंज के बीच पंडित जितेंद्र अभिषेकी संगीत महोत्सव के दूसरे दिन आयोजित ‘युवोन्मेश’ मैफिल ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। युवा कलाकारों के उत्कृष्ट प्रस्तुतियों ने पूरे सभागार को सुरमय बना दिया।

तरंगिनी सांस्कृतिक प्रतिष्ठान और ‘आपला परिसर’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव के दूसरे दिन सुबह के सत्र की शुरुआत गायिका डॉ. शर्वरी डिग्रजकर-पोफळे के सुरेल गायन से हुई। उन्होंने राग गुजरी तोड़ी में विलंबित ख्याल और द्रुत बंदिश प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। उनके साथ गीत इनामदार, उमेश पुरोहित (तबला) और सुकन्या जोशी (तानपुरा) ने बेहतरीन संगत दी।

इस अवसर पर डॉ. शर्वरी ने कहा कि इस प्रतिष्ठित मंच पर प्रस्तुति देना उनके लिए सौभाग्य की बात है और इसे उन्होंने पंडित जितेंद्र अभिषेकी का आशीर्वाद बताया।

कार्यक्रम का संचालन ऋषिकेश रामदासी ने किया, जबकि प्रस्तावना रश्मी अभिषेकी ने रखी। उन्होंने बताया कि भारतीय शास्त्रीय संगीत को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से ‘युवोन्मेश’ जैसे विशेष मंच की शुरुआत की गई है।

इस दौरान देवश्री कचरे और मंगल गवळी के हाथों डॉ. शर्वरी का सम्मान भी किया गया।

दूसरे सत्र में पखावज वादक पार्थ भूमकर और प्रथमेश तारळकर ने प्रभावशाली जुगलबंदी प्रस्तुत की, जिससे सभागार में भक्ति और ऊर्जा का माहौल बन गया। उन्हें अथर्व कुलकर्णी (संवादिनी) ने संगत दी।

महोत्सव के अंतिम सत्र में असम की गायिका श्रुति बुजरबारूआ ने राग शुद्ध सारंग में ‘धरणी धरोहर’ बंदिश प्रस्तुत कर श्रोताओं का दिल जीत लिया। उनके साथ पार्थ ताराबादकर (तबला) और सौमित्र क्षीरसागर (संवादिनी) ने सधी हुई संगत दी।

श्रुति ने कहा कि इस मंच पर प्रस्तुति देना उनके लिए गर्व की बात है और पुणे में प्रस्तुति देना उन्हें अपने घर जैसा अनुभव कराता है।

युवा कलाकारों की ऊर्जा और प्रतिभा से सजी ‘युवोन्मेश’ मैफिल ने महोत्सव में विशेष रंग भरते हुए श्रोताओं के दिलों में गहरी छाप छोड़ी।

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