
ताल–सुरों के संगम से सजा पं. जितेंद्र अभिषेकी संगीत महोत्सव का भव्य समापन
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान:पुणे महाराष्ट्र
पुणे— तबले की मधुर थाप पर थिरकते कदम, कथक की मोहक प्रस्तुतियां, संतूर की कोमल धुनों से सजी फिजा और सुमधुर गायन… सुर, ताल और लय के अद्भुत संगम के साथ 20वें पंडित जितेंद्र अभिषेकी संगीत महोत्सव का भव्य समापन हुआ।
पंडित जितेंद्र अभिषेकी संगीत महोत्सव का आयोजन तरंगिनी सांस्कृतिक प्रतिष्ठान और ‘आपला परिसर’ संस्था द्वारा कोथरूड स्थित यशवंतराव चव्हाण नाट्यगृह में किया गया। समापन सत्र में प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना नयनिका घोष, पद्मश्री पंडित सतीश व्यास और वरिष्ठ गायिका श्रुति सडोलीकर-काटकर ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत नयनिका घोष के कथक नृत्य से हुई। धमार राग की बंदिशों पर आधारित उनकी प्रस्तुति ने दर्शकों को बांध लिया। ‘आज खेलो शाम रंगोली’ ठुमरी के माध्यम से उन्होंने होली का जीवंत और भावपूर्ण चित्रण करते हुए श्रीकृष्ण विषयक नृत्य की सुंदर अभिव्यक्ति प्रस्तुत की। उनके साथ तबले पर कार्तिक स्वामी, पखावज पर आशीष गंगावणे, हार्मोनियम पर यशवंत थिटे और स्वरसंगत में अर्पिता वैशंपायन ने प्रभावी संगत दी। इस अवसर पर पूर्व उपमहापौर अंकुश काकड़े द्वारा उनका सम्मान किया गया।
इसके बाद पद्मश्री पंडित सतीश व्यास ने संतूर वादन से समा बांध दिया। धनकोरी कल्याण राग की उनकी प्रस्तुति ने पूरे सभागार को सुरमयी बना दिया। तबले पर रोहित मुजुमदार ने उनका साथ दिया। इस मौके पर राज्य के उच्च व तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील के हाथों उनका सम्मान किया गया।
महोत्सव का समापन श्रुति सडोलीकर-काटकर के प्रभावशाली गायन से हुआ। उनके साथ हार्मोनियम पर सुधीर नायक और तबले पर भरत कामत ने संगत की।
इस दौरान वरिष्ठ हार्मोनियम वादक प्रमोद मराठे को ‘पंडित मंगेश मुळे संगतकार पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।
पूरे महोत्सव को दर्शकों का उत्साहपूर्ण प्रतिसाद मिला। सुर, ताल और लय की त्रिवेणी से सजे इस आयोजन ने एक बार फिर शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा को जीवंत कर दिया।



