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सीतामढ़ी में मातृ एनीमिया नियंत्रण की दिशा में बड़ी पहल, 22 गर्भवती महिलाओं को FCM इंजेक्शन

सीतामढ़ी में मातृ एनीमिया नियंत्रण की दिशा में बड़ी पहल, 22 गर्भवती महिलाओं को FCM इंजेक्शन

रिपोर्ट: विशाल समाचार

स्थान: सीतामढ़ी बिहार

सीतामढ़ी: मातृ स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने और गंभीर एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं को समय पर प्रभावी उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की गई है।

इस क्रम में Ferric Carboxymaltose (FCM) इंजेक्शन की शुरुआत राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय द्वारा पटना स्थित ऊर्जा ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान की गई।

बिहार में मातृ एनीमिया एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती रही है। इसके समाधान के लिए पिरामल फाउंडेशन ने स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर तकनीकी सहयोग, रणनीतिक योजना और जमीनी स्तर पर समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार, पटना के निर्देशानुसार सीतामढ़ी जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सुरसंड में इस कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। सिविल सर्जन डॉ. अखिलेश कुमार के नेतृत्व तथा प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रामकिशोर सिंह के मार्गदर्शन में गंभीर एनीमिया से ग्रसित 22 गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उन्हें FCM इंजेक्शन दिया गया।

इस दौरान प्रशिक्षित जीएनएम मनमोहन व्यास द्वारा निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत सुरक्षित रूप से सभी चयनित महिलाओं को इंजेक्शन दिया गया, जिससे उपचार की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित की गई। यह पहल दर्शाती है कि स्वास्थ्य विभाग सेवा के साथ-साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन पर भी विशेष ध्यान दे रहा है।

कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए योजना निर्माण, क्षमता विकास, फील्ड स्तर पर समन्वय और निगरानी को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया गया, ताकि हर पात्र लाभार्थी तक समय पर सेवा पहुंचाई जा सके।

जिला प्रबंधक प्रभाकर कुमार एवं कार्यक्रम लीड दुर्गा प्रसाद और रोहित कुमार के नेतृत्व में टीम ने स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर इस पहल को प्रभावी रूप से लागू किया।

कार्यक्रम में सिविल सर्जन डॉ. अखिलेश कुमार, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रामकिशोर सिंह, डीपीएम स्वास्थ्य असित रंजन, बीएचएम मोहम्मद सदरूद्दीन, बीसीएम कृष्णनंदन सहित स्वास्थ्य विभाग एवं पिरामल फाउंडेशन के अन्य अधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।

यह पहल मातृ एनीमिया की रोकथाम की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी और भविष्य में अन्य जिलों के लिए भी मॉडल बन सकती है। स्वास्थ्य विभाग एवं पिरामल फाउंडेशन के संयुक्त प्रयास से राज्य में मातृ मृत्यु दर में कमी लाने और सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

 

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