
एमआईटी में मल्ल विद्या को नया जीवन देने का कार्य – डॉ. विश्वनाथ कराड
हनुमान जयंती पर एमआईटी WPU में कुश्ती प्रतियोगिता, ओपन वर्ग में निखिल वाडेकर विजेता
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान: पुणे महाराष्ट्र
पुणे,– “मऊ मेणाहूनि आम्ही विष्णूदास, कठीण वज्रास भेदू ऐसे” जैसी समृद्ध परंपरा वाले एमआईटी में आज वैश्विक स्तर के पहलवान तैयार हो रहे हैं। बल और बुद्धि के संगम माने जाने वाले मल्ल विद्या को पुनर्जीवित करने के लिए एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी (WPU) में लगातार कुश्ती प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। यह विचार संस्थापक अध्यक्ष डॉ. विश्वनाथ कराड ने व्यक्त किए।
हनुमान जयंती के अवसर पर एमआईटी WPU के अखाड़े में विश्वशांति केंद्र, आलंदी और MAEER’s MIT के संयुक्त तत्वावधान में पुणे के पहलवानों के लिए कुश्ती प्रतियोगिता आयोजित की गई। इस प्रतियोगिता में 100 से अधिक पहलवानों ने भाग लिया और विजेताओं को नकद पुरस्कार प्रदान किए गए।
मुकाबलों का रोमांच
प्रतियोगिता की शुरुआत ओपन वर्ग की कुश्ती से हुई, जिसमें एमआईटी के अनुदान चव्हाण ने हिंदकेसरी अखाड़े के अक्षय उघाडे को हराकर जीत दर्ज की।
फाइनल मुकाबले में एमआईटी के निखिल वाडेकर और खडकवासला तालिम के वैष्णव मारणे के बीच कड़ा मुकाबला हुआ, जिसमें निखिल वाडेकर विजेता रहे।
प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति
कार्यक्रम की शुरुआत एमआईटी परिसर स्थित हनुमान मंदिर में महापूजा से हुई। इसके बाद प्रतियोगिता का उद्घाटन किया गया।
इस अवसर पर डॉ. राहुल विश्वनाथ कराड, डॉ. आदिती कराड, उषा कराड, डॉ. सुचित्रा कराड, प्रा. स्वाती कराड-चाटे, कुलगुरु डॉ. आर. एम. चिटणीस, प्रा. गणेश पोकळे, डॉ. संजय उपाध्ये, पूर्व कुलगुरु डॉ. एस. एन. पठाण, डॉ. मिलिंद पांडे, रत्नदीप जोशी, डॉ. महेश थोरवे, अंतरराष्ट्रीय कुश्ती प्रशिक्षक प्रा. विलास कथुरे और क्रीड़ा संचालक डॉ. वैभव वाघ सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।
मल्ल विद्या का महत्व
डॉ. विश्वनाथ कराड ने कहा कि कुश्ती से शारीरिक शक्ति और रणनीतिक क्षमता दोनों विकसित होती हैं। छात्रों को पढ़ाई के साथ व्यायाम पर भी ध्यान देना चाहिए।
डॉ. राहुल कराड ने कहा कि कुश्ती मन और शरीर दोनों को मजबूत बनाती है। भारतीय संस्कृति की यह प्राचीन परंपरा अब फिर से मजबूत होती दिखाई दे रही है।
विभिन्न वर्गों के विजेता
ओपन वर्ग: निखिल वाडेकर (एमआईटी) – विजेता, वैष्णव मारणे – उपविजेता
86 किग्रा: अर्पित कंधारे – विजेता
74 किग्रा: हर्षवर्धन उबाळे – विजेता
70 किग्रा: चैतन्य खंडाळे – विजेता
65 किग्रा: सुशांत भोसले – विजेता
61 किग्रा: स्वराज घोडके – विजेता
57 किग्रा: समर्थ दाभाडे – विजेता
51 किग्रा: वेदांत चव्हाण – विजेता
45 किग्रा: साईराज भिलारे – विजेता
41 किग्रा: अश्विन चव्हाण – विजेता
38 किग्रा: रुद्र देशमुख – विजेता
32 किग्रा: संग्राम आमले – विजेता
28 किग्रा: युवराज भरेकर – विजेता
सभी विजेताओं को मान्यवरों के हाथों नकद पुरस्कार प्रदान किए गए। प्रतियोगिता का विशेष आकर्षण बाल पहलवानों की बड़ी संख्या में भागीदारी रही।
कार्यक्रम में प्रा. विलास कथुरे ने प्रस्तावना रखते हुए एमआईटी द्वारा आयोजित कुश्ती प्रतियोगिताओं की जानकारी दी, जबकि बाबा निम्हण ने मुकाबलों का रोचक लाइव कमेंट्री किया। कार्यक्रम का संचालन भी प्रा. कथुरे ने किया।



