
रक्तदान महादान है, मानवता का सर्वोच्च प्रतीक – वैभवी सोलंकी
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान:पुणे महाराष्ट्र
पुणे (प्रतिनिधि): ‘रक्तदान महादान’ मानवता का सबसे बड़ा प्रतीक है और यह किसी को नया जीवन दे सकता है, ऐसा प्रतिपादन किड्ज किंगडम प्री-प्रायमरी स्कूल की प्राचार्या वैभवी सोलंकी ने किया। वह महावीर जयंती के अवसर पर आयोजित रक्तदान शिविर के उद्घाटन समारोह में बोल रही थीं।
उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में घायल मरीजों, सर्जरी और गंभीर बीमारियों के दौरान रक्त की अत्यंत आवश्यकता होती है। रक्तदान एक निःस्वार्थ सेवा है, और एक दाता के रक्तदान से एक साथ तीन मरीजों की जान बचाई जा सकती है। साथ ही, रक्तदान से दाता के स्वास्थ्य को भी लाभ होता है।
उन्होंने आगे कहा कि मानव शरीर में बनने वाले रक्त को कृत्रिम रूप से तैयार नहीं किया जा सकता, इसलिए रक्त की कमी को पूरा करने के लिए रक्तदान ही एकमात्र विकल्प है। “रक्तदान केवल रक्त का दान नहीं, बल्कि जीवनदान है,” उन्होंने जोर देकर कहा।
उन्होंने यह भी बताया कि हर दो सेकंड में किसी न किसी व्यक्ति को रक्त की आवश्यकता होती है। सड़क दुर्घटनाएं, प्रसव, ऑपरेशन तथा थैलेसीमिया और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में मरीजों को बचाने के लिए रक्त अत्यंत आवश्यक होता है।
इस रक्तदान शिविर में कुल 42 रक्तदाताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर रक्तदान किया। इस अवसर पर विश्वराज हॉस्पिटल की ब्लड बैंक टीम द्वारा रक्त संकलन की व्यवस्था की गई। उपस्थित डॉक्टरों, शिक्षकों और अभिभावकों ने इस सामाजिक पहल की सराहना की।
कार्यक्रम के अंत में सभी रक्तदाताओं को प्रमाण पत्र और उपहार देकर सम्मानित किया गया। साथ ही यह भी कहा गया कि ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों में बचपन से ही सामाजिक जिम्मेदारी और सेवा भावना विकसित होती है।



