
गुणवत्ता और नीतिमत्ता ही सफलता के सच्चे साथी: भरत गीते
‘महाराष्ट्र उद्योगभूषण’ पुरस्कार से सम्मानित, प्रकट साक्षात्कार में साझा की सफलता की कहानी
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान: पुणे महाराष्ट्र
पुणे: “जिस भारतभूमि ने हमें बनाया है, उसे आत्मनिर्भर बनाने में हमें योगदान देना चाहिए। इसी भावना के साथ मैं जर्मनी से भारत लौटा और उद्योग की शुरुआत की,” यह विचार प्रख्यात उद्यमी भरत गीते ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पादों के निर्माण और युवाओं को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए वे निरंतर प्रयासरत हैं।
‘अॅल्युमिनियम मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से प्रसिद्ध भरत गीते ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र के समग्र विकास के लिए उद्योगों का विकेंद्रीकरण ग्रामीण क्षेत्रों में होना अत्यंत आवश्यक है। गुणवत्ता और नीतिमत्ता को उन्होंने अपनी सफलता का मूल मंत्र बताया।
रमामंगल सोशल फाउंडेशन और एक्सप्रेस मीडिया एंटरप्रायझेस के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में भरत गीते को ‘फेस ऑफ इंस्पिरेशन’ महाराष्ट्र उद्योगभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर प्रसिद्ध अभिनेता मकरंद अनासपुरे ने उनका साक्षात्कार लिया, जिसमें उनके परळी से जर्मनी और फिर पुणे तक के संघर्ष और सफलता की यात्रा को उजागर किया गया।
कार्यक्रम चिंचवड़ स्थित रामकृष्ण मोरे सभागार में आयोजित हुआ, जिसमें सांसद श्रीरंग बारणे, महापौर रवी लांडगे, शिवसेना नेता सुलभा उबाळे सहित कई गणमान्य उपस्थित थे।
अपने जीवन के संघर्षों का उल्लेख करते हुए गीते ने कहा कि इस यात्रा में उनकी पत्नी प्राची का विशेष योगदान रहा। जर्मनी जैसे विकसित देश का स्थिर जीवन छोड़कर भारत में उद्योग स्थापित करना आसान नहीं था, लेकिन कठिन समय में उनके परिवार का पूरा सहयोग मिला। एक साधारण किसान परिवार से आने वाले गीते ने अपनी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया।
उन्होंने बताया कि जर्मनी से लौटने के बाद उन्होंने एल्यूमिनियम क्षेत्र में अपार संभावनाएं देखीं और उसी दिशा में कार्य शुरू किया। उन्होंने कहा कि एल्यूमिनियम हल्का, टिकाऊ और जंगरोधी होने के बावजूद भारत में आधुनिक तकनीक की कमी के कारण इसका व्यापक उपयोग नहीं हो पा रहा है। इस क्षेत्र में नई तकनीक विकसित कर भारत को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास जारी है।
गीते ने यह भी बताया कि उनकी नरेंद्र मोदी के साथ हुई बैठक में उन्होंने उद्योगों के विकेंद्रीकरण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। उनका मानना है कि उद्योग केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचने चाहिए।
उन्होंने देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि राज्य में औद्योगिक विकास को गति देने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। भविष्य में उद्योग और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर राज्य के विकास में योगदान देने के लिए वे प्रतिबद्ध हैं।
इस अवसर पर सांसद श्रीरंग बारणे ने कहा कि पुणे के विकास में मराठवाड़ा और विदर्भ से आए लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वहीं अभिनेता नाना पाटेकर और मकरंद अनासपुरे के ‘नाम फाउंडेशन’ के माध्यम से किसानों के लिए किए जा रहे कार्यों की भी सराहना की गई।
महापौर रवी लांडगे ने कहा कि समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना से किया गया कार्य ही वास्तविक सेवा है। उन्होंने पिंपरी-चिंचवड़ में विश्वस्तरीय पुस्तकालय और शैक्षणिक सुविधाओं के विकास के लिए उद्यमियों से सहयोग का आह्वान किया।
कार्यक्रम में मनीषा थोरात पिसाळ ने स्वागत भाषण दिया, शुभांगी शिंदे ने संचालन किया तथा संतोष सौंदणकर ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों को ‘फेस ऑफ इंस्पिरेशन’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार समारोह का 11वां वर्ष था।

