
दृष्टि के साथ दृष्टिकोण देना भी आवश्यक – डॉ. आदित्य केळकर
विश्वबंधुता साहित्य सम्मेलन में ‘विश्वबंधुता दर्पण पुरस्कार’ प्रदान
पुणे: “नेत्र विशेषज्ञ के रूप में हम लोगों को दृष्टि देते हैं, लेकिन समाज में सही दृष्टिकोण देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। बंधुता आंदोलन पिछले 50 वर्षों से समाज में समता और भाईचारा स्थापित करने का कार्य कर रहा है,” यह विचार डॉ. आदित्य केळकर ने व्यक्त किए।
वे 28वें विश्वबंधुता साहित्य सम्मेलन के समापन अवसर पर बोल रहे थे। इस मौके पर डॉ. केळकर, प्रार्थना सदावर्ते तथा महात्मा फुले महाविद्यालय को ‘विश्वबंधुता दर्पण पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।
सम्मेलन की अध्यक्षता प्रकाश रोकडे ने की। उन्होंने कहा कि बंधुता आंदोलन के माध्यम से लाखों लोगों को जोड़ने का अवसर मिला, जो उनके लिए संतोष का विषय है।
प्रार्थना सदावर्ते ने कहा कि तथागत बुद्ध, महात्मा फुले, महावीर, कबीर, छत्रपति शिवाजी महाराज, शाहू महाराज और डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर के विचारों पर आधारित यह आंदोलन समाज में समता और सौहार्द स्थापित कर रहा है।
कार्यक्रम में विभिन्न साहित्यकारों को ‘विश्वबंधुता प्रा. रा. ग. जाधव साहित्य साधना पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।

