नारी शक्ति : बुनियादी सम्मान से अपने अधिकारों तक
“महिलाओं को केवल गृहिणी के रूप में देखने का दौर बीत चुका है; अब उन्हें राष्ट्रनिर्माता के रूप में देखने की आवश्यकता है।” — नरेंद्र मोदी
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान:पुणे,महाराष्ट्र
भारत के किसी गांव की एक साधारण महिला की कल्पना कीजिए। कुछ वर्ष पहले उसका जीवन कई सीमाओं में बंधा हुआ था—खुले में शौच के लिए जाना, दूर से पानी लाना, धुएं में खाना बनाना, अपने नाम पर घर या बैंक खाता न होना। लेकिन आज तस्वीर बदल रही है। इस परिवर्तन का नाम है—नारी शक्ति।
ससम्मान जीवन की शुरुआत
महिलाओं के सम्मान की शुरुआत उनकी मूलभूत जरूरतों से हुई।
स्वच्छ भारत अभियान के तहत शौचालयों के निर्माण से महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा बढ़ी।
जल जीवन मिशन ने घर-घर पानी पहुंचाकर उनका श्रम कम किया।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से धुएं से राहत मिली, जबकि
प्रधानमंत्री आवास योजना ने महिलाओं को घर का मालिकाना हक देकर आर्थिक सुरक्षा प्रदान की।
जन्म से स्वास्थ्य सुरक्षा
महिला सशक्तिकरण की नींव जन्म से पहले ही रखी जा रही है।
पोषण अभियान (POSHAN 2.0) शिशु के पहले 1000 दिनों पर केंद्रित है।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना माताओं को आर्थिक सहयोग देती है।
‘सुमन’ योजना सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करती है, वहीं
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और
सुकन्या समृद्धि योजना बेटियों के भविष्य को सुरक्षित बनाते हैं।
आत्मनिर्भरता की ओर कदम
आर्थिक सशक्तिकरण महिलाओं की प्रगति का आधार है।
प्रधानमंत्री जनधन योजना से महिलाएं बैंकिंग प्रणाली से जुड़ीं।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने उन्हें व्यवसाय शुरू करने का अवसर दिया।
स्वयं सहायता समूहों, ‘लखपति दीदी’ और ‘नमो ड्रोन दीदी’ जैसे नवाचारों ने ग्रामीण महिलाओं को नई पहचान दी।
सुरक्षा और न्याय
महिलाओं की सुरक्षा के लिए
मिशन शक्ति के तहत सखी वन-स्टॉप सेंटर स्थापित किए गए हैं।
महिला हेल्पलाइन और निर्भया फंड ने सुरक्षा तंत्र को मजबूत किया है। तीन तलाक पर रोक भी महिलाओं के अधिकारों की दिशा में बड़ा कदम रहा है।
हर क्षेत्र में बढ़ती भागीदारी
आज महिलाएं विज्ञान, रक्षा, शिक्षा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में नई ऊंचाइयां छू रही हैं। वे अब केवल भागीदार नहीं, बल्कि नेतृत्वकर्ता बन रही हैं। STEM क्षेत्रों में उनकी बढ़ती उपस्थिति इसका प्रमाण है।
राजनीतिक सशक्तिकरण
नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33% आरक्षण का मार्ग प्रशस्त करता है। पंचायती राज में भी महिलाओं की मजबूत भागीदारी दिखाई दे रही है।
समग्र (360 डिग्री) दृष्टिकोण
शौचालय, पानी, ईंधन, आवास, स्वास्थ्य, रोजगार, सुरक्षा और प्रतिनिधित्व—ये सभी पहलू एक-दूसरे से जुड़े हैं। किसी एक कड़ी के कमजोर होने पर सशक्तिकरण अधूरा रह जाता है। यही कारण है कि आज महिला विकास को समग्र दृष्टिकोण से देखा जा रहा है।
आज भारत ‘कल्याणकारी’ सोच से आगे बढ़कर ‘महिला-नेतृत्व वाले विकास’ की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस यात्रा में हर महिला को साथ लेकर चलना ही सच्ची प्रगति का मार्ग है।
“नारी शक्ति आगे बढ़ रही है; अब देश को सुनिश्चित करना है कि कोई भी महिला पीछे न रह जाए।”
— आर. विमला (भा. प्र. से.)
सचिव एवं निवासी आयुक्त, महाराष्ट्र सदन



