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परिवार की “लक्ष्मण रेखा” को मजबूत करने की जरूरत – ‘बुवा और बाया’ परिसंवाद में विशेषज्ञों की राय

परिवार की “लक्ष्मण रेखा” को मजबूत करने की जरूरत – ‘बुवा और बाया’ परिसंवाद में विशेषज्ञों की राय

 

आपलं घर’ संस्था के रजत जयंती वर्ष पर कोथरूड में विशेष कार्यक्रम, विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति

रिपोर्ट:विशाल समाचार 

स्थान:पुणे, महाराष्ट्र 

आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में सफलता की दौड़ में लोग अत्यधिक तनाव और दबाव का सामना कर रहे हैं। ऐसे समय में कई लोग विभिन्न प्रकार की गुरु-सदृश व्यवस्थाओं की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इससे बचने के लिए प्रत्येक परिवार को अपनी “लक्ष्मण रेखा” को मजबूत करने की आवश्यकता है, ऐसा मत विशेषज्ञों ने व्यक्त किया।

‘आपलं घर’ संस्था के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर कोथरूड स्थित बालशिक्षण मंदिर सभागृह में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में ‘बुवा और बाया’ विषय पर परिसंवाद हुआ, जिसमें प्रसिद्ध कीर्तनकार डॉ. चारुदत्त आफळे, अधिवक्ता विभावरी बिडवे और वरिष्ठ पत्रकार सुनील माळी ने अपने विचार व्यक्त किए। संवाद का संचालन एन. सी. गोसावी ने किया।

डॉ. आफळे ने कहा कि आज के समय में बुवाबाजी जैसी प्रवृत्तियों से बचने के लिए बच्चों पर घर में ही अच्छे संस्कार देना जरूरी है। माता-पिता को बच्चों की गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए और नियमित रूप से उनसे संवाद बनाए रखना चाहिए, जिससे उन्हें सुरक्षित मार्गदर्शन मिल सके।

अधिवक्ता विभावरी बिडवे ने कहा कि समाज में बढ़ती ठगी और शोषण की घटनाएं चिंता का विषय हैं। महिलाओं के साथ समान व्यवहार और सामाजिक जागरूकता अत्यंत आवश्यक है।

वरिष्ठ पत्रकार सुनील माळी ने कहा कि शिक्षा का विस्तार होने के बावजूद अंधविश्वास पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। आज के अस्थिर माहौल में लोग मानसिक सहारे की तलाश में रहते हैं, जिससे “बाबा इंडस्ट्री” का विस्तार हो रहा है।

इस कार्यक्रम में बालरंगभूमि परिषद, नागपुर के अध्यक्ष पद पर चयन होने पर श्याम आस्करकर का विशेष सम्मान किया गया। इसके अलावा वैभव फळणीकर फाउंडेशन को एक ही दिन में 982 दिव्यांगों को कृत्रिम हाथ और पैर उपलब्ध कराने के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड प्रमाणपत्र प्रदान किया गया।

इस अवसर पर ‘पराजय नव्हे विजय’ पुस्तक के 14वें संस्करण का भी विमोचन किया गया। कार्यक्रम में संस्था के अध्यक्ष विजय फळणीकर, उपाध्यक्ष सुप्रिया दामले, ट्रस्टी साधना फळणीकर सहित कई गणमान्य उपस्थित थे।

कार्यक्रम का संचालन स्नेहल दामले ने किया तथा आभार प्रदर्शन सुप्रिया दामले ने किया।

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