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प्रदेश की जेलों में आयोजित हुई विशेष जेल लोक अदालत

प्रदेश की जेलों में आयोजित हुई विशेष जेल लोक अदालत

रिपोर्ट :विशाल समाचार 

स्थान:रीवा मध्य प्रदेश 

रीवा . न्यायमूर्ति श्री संजीव सचदेवा, मुख्य न्यायाधिपति, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय एवं मुख्य संरक्षक के नेतृत्व तथा श्री न्यायमूर्ति विवेक रूसिया, प्रशासनिक न्यायाधिपति, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय एवं कार्यपालक अध्यक्ष, मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कुशल मार्गदर्शन में, जेलों में निरुद्ध बंदियों को त्वरित एवं सुलभ न्याय उपलब्ध कराने की व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। जिसके तहत गत 26 अप्रैल को, मध्य प्रदेश राज्य में प्रथम पहल के रूप में मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आयोजित विशेष जेल लोक अदालत का शुभारंभकेंद्रीय जेल, ग्वालियर से न्यायमूर्ति श्री संजीव सचदेवा, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा किया गया। इस अवसर पर न्यायमूर्ति श्री आनंद पाठक, प्रशासनिक न्यायाधिपति, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, खंडपीठ ग्वालियर एवं अध्यक्ष, उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति, ग्वालियर तथा मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधिपतिगण की उपस्थिति रही।

न्यायमूर्ति श्री संजीव सचदेवा ने अपने उद्बोधन में कहा कि कोई भी व्यक्ति जन्म से अपराधी नहीं होता, बल्कि परिस्थितियाँ, निर्णय और कभी-कभी भाग्य उसे उस मार्ग पर ले जाते हैं। किंतु यह भी उतना ही सत्य है कि प्रत्येक व्यक्ति में परिवर्तन की अपार क्षमता निहित होती है। इतिहास साक्षी है कि जिन्होंने जीवन में अंधकारमय मार्ग अपनाया, वे भी आत्मबोध एवं दृढ़ संकल्प के माध्यम से महान व्यक्तित्व में परिवर्तित हुए हैं। महर्षि वाल्मीकि इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण हैं, जो कभी डाकू थे, किंतु आत्मजागरण के पश्चात एक महान ऋषि के रूप मे पूज्य हुए। उन्होंने कहा कि जीवन प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं को सुधारने एवं नई दिशा चुनने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने बंदियों को इस अवसर का आत्ममंथन के लिए उपयोग करने, अपनी त्रुटियों से सीखने तथा बेहतर भविष्य के निर्माण हेतु प्रेरित किया। उन्होंने बंदियों आग्रह किया कि वे नए कौशल अर्जित करें तथा अपनी अंतर्निहित प्रतिभाओं को विकसित करें। उन्होंने कहा कि लोक अदालत केवल विवाद निवारण का मंच नहीं है, बल्कि यह एक नई शुरुआत का सशक्त माध्यम है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बंदी समाज में पुनः एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में लौटें और सकारात्मक योगदान दें।

न्यायमूर्ति श्री आनंद पाठक ने कहा कि मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की यह पहल बंदियों को एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है, जिसमें जेल परिसर भीतर विशेष लोक अदालत का आयोजन कर सुलभ न्याय सुनिश्चित किया गया है। लोक अदालतों का मुख्य उद्देश्य केवल मामलों का निराकरण करना नहीं बल्कि विवादों के मूल कारणों की पहचान कर उनका स्थायी समाधान करना है।

वर्ष 2047 तक एक विवाद मुक्त समाज की स्थापना के लिए हम सभी को प्रयासरत रहना चाहिए और इस दिशा में हमारा प्रत्येक योगदान राष्ट्र सेवा के समान होगा। इस अवसर पर न्यायमूर्ति जी. एस. अहलूवालिया, न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फडके, न्यायमूर्ति आशीष श्रोती, न्यायमूर्ति अमित सेठ, न्यायमूर्ति आनंद सिंह बहरावत तथा न्यायमूर्ति राजेश कुमार गुप्ता उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में धरमिंदर सिंह, रजिस्ट्रार जनरल, जी. अखेतो सेमा, विशेष महानिदेशक, कारागार एवं सुधारात्मक सेवाएँ, ललित किशोर, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, ग्वालियर, जाकिर हुसैन, प्रधान जिला न्यायाधीश (निरीक्षण), सुश्री सुमन श्रीवास्तव, सदस्य सचिव, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, श्री राजीव के. पाल, प्रधान रजिस्ट्रार, श्री नवीन कुमार शर्मा, रजिस्ट्रार, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, खंडपीठ ग्वालियर, श्री अरविंद श्रीवास्तव, अतिरिक्त सचिव, राज्य प्राधिकरण, श्रीमती रुचिका चौहान, कलेक्टर, ग्वालियर, श्री धर्मवीर सिंह, पुलिस अधीक्षक, ग्वालियर, श्री विदित सिरवैया, जेल अधीक्षक, केंद्रीय कारागार, ग्वालियर सहित अन्य न्यायिक अधिकारी एवं जेल प्रशासन के अधिकारी उपस्थित रहे। राज्य के अन्य जिलों से प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, न्यायिक अधिकारी, जेल लोक अदालत के पीठासीन अधिकारी एवं सदस्य, जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के सचिव, जिला विधिक सहायता अधिकारी एवं जेल अधीक्षकगण ने कार्यक्रम में वर्चुअली भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन सुश्री सुमन श्रीवास्तव, द्वारा किया गया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन श्री.जी. अखेतो सेमा, विशेष महानिदेशक, जेल एवं सुधारात्मक सेवाएँ, द्वारा प्रस्तुत किया गया।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रीवा द्वारा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राकेश मोहन प्रधान के मार्गदर्शन में एवं माननीय विशेष न्यायाधीश श्री संदीप शर्मा, नोडल अधिकारी विशेष जेल लोक अदालत माननीय जिला न्यायाधीश श्री मोहित कुमार एवं सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्री समीर कुमार मिश्र के नेतृत्व में केन्द्रीय कारागार में विशेष जेल लोक अदालत हेतु एक खण्डपीठ का गठन किया गया। खण्डपीठ में पीठासीन अधिकारी न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री दयाल सिंह सूर्यवंशी एवं सुलहकर्ता सदस्य रामकुशल यादव सामुदायिक मध्यस्थ एवं राहुल सोनी सामाजिक कार्यकर्ता सम्मिलित रहे। उक्त खण्डपीठ के समक्ष केन्द्रीय कारागार रीवा के 05 एवं उप जेल त्योंथर के 02 आपराधिक राजीनामा योग्य प्रकरण रेफर किये गये थे। जिसमें से एक आपराधिक राजीनामा योग्य प्रकरण में दोनों पक्षों के मध्य संवाद स्थापित कराया गया तथा सतत प्रयासों से विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान हुआ। एक आपराधिक राजीनामा योग्य प्रकरण आपसी सुलह समझौते से विशेष जेल लोक अदालत में निराकृत हुआ।

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