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महाराष्ट्र दिवस पर पुणे में ‘लोकशाही संवाद’ का आयोजन, पाँच विचार अभियानों का शुभारंभ

महाराष्ट्र दिवस पर पुणे में ‘लोकशाही संवाद’ का आयोजन, पाँच विचार अभियानों का शुभारंभ

रिपोर्ट :विशाल समाचार 

स्थान:पुणे महाराष्ट्र

पुणे: महाराष्ट्र दिवस के अवसर पर समाज में बदलती वैचारिक, सामाजिक और शैक्षणिक चुनौतियों का समाधान खोजने के उद्देश्य से महाराष्ट्र प्रदेश युवक कांग्रेस द्वारा ‘लोकशाही संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान डॉ. नरेंद्र दाभोलकर, गोविंद पानसरे, एम. एम. कलबुर्गी, गौरी लंकेश और रोहित वेमुला के नाम पर पाँच विचार अभियानों का शुभारंभ किया जाएगा। इस पहल के माध्यम से युवाओं को समाज परिवर्तन के केंद्र में रखते हुए विचार, संवाद और कार्य की नई दिशा देने का प्रयास किया जाएगा।

यह कार्यक्रम शुक्रवार (1 मई) को शाम 5 बजे पंडित जवाहरलाल नेहरू सांस्कृतिक भवन, घोले रोड, शिवाजीनगर, पुणे में आयोजित होगा। कार्यक्रम में भारतीय युवक कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रभारी मनीष शर्मा, वरिष्ठ चिंतक विश्वंभर चौधरी, विधिज्ञ एडवोकेट असीम सरोदे, सामाजिक कार्यकर्ता स्मिता पानसरे और हमीद दाभोलकर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। विभिन्न समसामयिक विषयों पर उनका मार्गदर्शन युवाओं के लिए प्रेरणादायक होगा, ऐसी जानकारी युवक कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष शिवराज मोरे ने दी।

शिवराज मोरे ने बताया कि ‘डॉ. नरेंद्र दाभोलकर अभियान’ के माध्यम से अंधविश्वास और अवैज्ञानिक सोच के खिलाफ वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया जाएगा। ‘गोविंद पानसरे अभियान’ सामाजिक न्याय, संवैधानिक मूल्यों और समानता को मजबूत करने पर केंद्रित होगा। ‘एम. एम. कलबुर्गी अभियान’ विचारों की स्वतंत्रता, प्रश्न पूछने की प्रवृत्ति और अभिव्यक्ति के अधिकार को सशक्त करेगा। ‘गौरी लंकेश अभियान’ के जरिए सत्य आधारित पत्रकारिता, मीडिया साक्षरता और फेक न्यूज के खिलाफ जागरूकता फैलाई जाएगी। वहीं ‘रोहित वेमुला अभियान’ विद्यार्थियों के सम्मान, शिक्षा में समानता और सामाजिक समावेशिता को बढ़ावा देगा।

उन्होंने कहा कि ये अभियान केवल उद्घोषणाओं तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि राज्यभर के स्कूलों, कॉलेजों, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों तक पहुंचाए जाएंगे। इसके तहत चर्चासत्र, संवाद श्रृंखला, प्रशिक्षण कार्यशालाएं, जनजागरण अभियान और युवा नेतृत्व विकास कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

उन्होंने आगे कहा कि आज के डिजिटल और तेज़ दौर में अंधविश्वास, सामाजिक ध्रुवीकरण, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल, शिक्षा में असमानता और फेक न्यूज जैसी चुनौतियां सामने हैं। ऐसे में युवाओं को केवल दर्शक न रहकर विचारों के वाहक और परिवर्तन के नेतृत्वकर्ता बनना होगा। यह पहल राज्य में वैचारिक परिपक्वता, सामाजिक समरसता और संवैधानिक मूल्यों पर आधारित नेतृत्व विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

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