
अनुसूचित जाति उपवर्गीकरण प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग, 30 जून को विधानभवन घेराव आंदोलन की चेतावनी
रिपोर्ट: विशाल समाचार
स्थान:मुंबई महाराष्ट्र
मुंबई,अनुसूचित जाति (एससी) आरक्षण में प्रस्तावित उपवर्गीकरण प्रक्रिया को राष्ट्रीय जातीय जनगणना पूरी होने तक तत्काल स्थगित किए जाने की मांग को लेकर ‘महाराष्ट्र अनुसूचित जाति आरक्षण उपवर्गीकरण पुनर्विलोकन समिति’ ने राज्य के सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता मंत्री संजय शिरसाट को ज्ञापन सौंपा। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 30 जून को मुंबई में विधानभवन घेराव आंदोलन किया जाएगा।
समिति के अध्यक्ष राहुल डंबाले के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री संजय शिरसाट से मुलाकात कर उपवर्गीकरण प्रक्रिया में मौजूद कानूनी और तकनीकी त्रुटियों पर विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर प्रवीण सरोदे, सुधाकर अभंग, सुरेश शिंदे, भाऊसाहेब साबळे तथा रुपेश वाघचौरे उपस्थित थे।
प्रतिनिधिमंडल को सामाजिक न्याय विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि इस विषय पर प्राप्त 75 हजार से अधिक आपत्तियों को ‘बार्टी’ (BARTI) द्वारा राज्य सरकार को भेज दिया गया है तथा आगे की कानूनी प्रक्रिया मुख्य सचिव स्तर पर की जाएगी।
ज्ञापन में कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार अनुसूचित जातियों के उपवर्गीकरण के लिए ‘मापनीय सांख्यिकीय आंकड़ों’ (Quantifiable Data) की उपलब्धता आवश्यक है। केंद्र सरकार की आधिकारिक जातीय जनगणना के आंकड़े सामने आने से पहले केवल अनुमान के आधार पर उपवर्गीकरण करना असंवैधानिक होगा। इसलिए इस प्रक्रिया को तत्काल स्थगित किया जाना चाहिए।
समिति ने यह भी मांग की कि न्यायमूर्ति अनंत बदर समिति की रिपोर्ट, जो राज्य सरकार को सौंप दी गई है, अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। रिपोर्ट को पहले जनता के सामने रखा जाए और उसके बाद ही किसी प्रकार की आगे की कार्रवाई की जाए।
30 जून को ‘चलो मुंबई’ का आह्वान
समिति ने घोषणा की कि आरक्षण उपवर्गीकरण प्रक्रिया को रद्द करने और निजी क्षेत्र में आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर 30 जून को मुंबई के आजाद मैदान से विधानभवन तक विशाल घेराव आंदोलन किया जाएगा। “बहुत लड़े बंटवारे में, अब लड़ेंगे एकता से” के संकल्प के साथ राज्यभर से बड़ी संख्या में समाज के लोग आंदोलन में शामिल होंगे।
विधानमंडल में चर्चा की मांग
समिति अध्यक्ष राहुल डंबाले ने कहा कि करोड़ों लोगों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील विषय पर केवल प्रशासनिक स्तर पर निर्णय लेना उचित नहीं है। बदर समिति की रिपोर्ट को विधानसभा के पटल पर रखा जाए तथा इस विषय पर विशेष अधिवेशन या विस्तृत चर्चा कराई जाए। साथ ही, केंद्र सरकार की नीति के अनुरूप अनुसूचित जाति आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’ लागू नहीं होगी, इसकी स्पष्ट कानूनी गारंटी मिलने तक राज्य सरकार को कोई जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए।
सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि इस संवेदनशील एवं तकनीकी विषय के सभी कानूनी पहलुओं की जांच कर सकारात्मक विचार किया जाएगा।



