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चंबल नदी पुल पर भारी वाहनों के आवागमन पर रोक, मरम्मत कार्य तक रहेगा प्रतिबंध

चंबल नदी पुल पर भारी वाहनों के आवागमन पर रोक, मरम्मत कार्य तक रहेगा प्रतिबंध

रिपोर्ट :विशाल समाचार 

स्थान: इटावा उत्तर प्रदेश 

इटावा, । सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने इटावा-ग्वालियर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित चंबल नदी पुल से भारी वाहनों के आवागमन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। जिला मजिस्ट्रेट शुभ्रान्त कुमार शुक्ल ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-92 (719) के किलोमीटर 78 पर स्थित चंबल नदी सेतु के एक पियर में तकनीकी समस्या सामने आने के बाद यह निर्णय लिया गया है।

 

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुल के अनुरक्षण कार्य में लगी कंपनी एमपी हाईवेज प्राइवेट लिमिटेड (पीएनसी) ने प्रशासन को अवगत कराया कि सेतु के पियर संख्या-5 पर सेटलमेंट के संकेत दिखाई दे रहे हैं। पुल की सुरक्षा एवं विस्तृत तकनीकी जांच को देखते हुए कंपनी द्वारा भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया था।

 

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने राष्ट्रीय मार्ग खंड, लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को तत्काल जांच के निर्देश दिए। अधिशासी अभियंता द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में बताया गया कि पुल पर दिखाई दे रहे गैप और सेटलमेंट की विस्तृत तकनीकी जांच ब्रिज विशेषज्ञों से कराई जाएगी। साथ ही मरम्मत कार्य और सुरक्षा कारणों से भारी वाहनों का आवागमन पूरी तरह बंद करने की संस्तुति की गई।

 

जिला मजिस्ट्रेट ने आदेश जारी करते हुए कहा कि 21 जून 2026 से मरम्मत कार्य पूर्ण होने तक चंबल नदी पुल से सभी प्रकार के भारी वाहनों का आवागमन पूर्णतया प्रतिबंधित रहेगा। मरम्मत कार्य समाप्त होने के बाद यह प्रतिबंध स्वतः समाप्त माना जाएगा।

 

प्रशासन ने वैकल्पिक मार्ग भी निर्धारित किए हैं। भिंड की ओर जाने वाले भारी वाहन जालौन अथवा शिकोहाबाद मार्ग का उपयोग कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त उदी चौराहा-चकरनगर-सहसों-फूफ मार्ग से भी भिंड पहुंचा जा सकेगा। वहीं भिंड से आगरा और कानपुर की ओर आने वाले भारी वाहन शिकोहाबाद या जालौन मार्ग से आवागमन करेंगे अथवा फूफ-सहसों-चकरनगर होते हुए उदी चौराहे के रास्ते इटावा पहुंचेंगे।

 

जिला प्रशासन ने वाहन चालकों और परिवहन कंपनियों से निर्धारित वैकल्पिक मार्गों का पालन करने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि पुल की तकनीकी जांच और मरम्मत कार्य पूरा होने तक सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी तथा किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं लिया जाएगा।

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