
एकीकृत तटीय सुरक्षा कानून लागू करने की नागरिक सोशल फाउंडेशन की मांग
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान: पुणे महाराष्ट्र
पुणे: 26/11 मुंबई आतंकी हमले के बाद देश में तटीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए विभिन्न कदम उठाए गए, लेकिन सूचना आदान-प्रदान में देरी, सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी और तटीय क्षेत्रों में अपर्याप्त निगरानी जैसी समस्याएं अब भी बनी हुई हैं। इसी को देखते हुए नागरिक सोशल फाउंडेशन ने केंद्र और राज्य सरकार से “यूनिफाइड कोस्टल सिक्योरिटी एक्ट” (Unified Coastal Security Act) लागू करने की मांग की है। यह जानकारी फाउंडेशन के प्रतिनिधि एडवोकेट रोहन कानिटकर ने एक पत्रकार परिषद में दी।
इस अवसर पर नागरिक सोशल फाउंडेशन के ट्रस्टी प्रीतम थोरवे, एडवोकेट सर्वेश मेहेंदळे सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
एडवोकेट रोहन कानिटकर ने कहा कि 26/11 के आतंकी हमले में 166 लोगों की जान गई थी, लेकिन इसके बावजूद तटीय सुरक्षा से जुड़े खतरे पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में विकसित हो रहा वधावन बंदरगाह परियोजना राज्य के सामरिक और आर्थिक महत्व को और बढ़ाने वाली है। इसके शुरू होने के बाद अंतरराष्ट्रीय माल परिवहन, कंटेनर यातायात, समुद्री व्यापार और तटीय आर्थिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था को भी अत्याधुनिक और सुदृढ़ बनाना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि अमेरिका, सिंगापुर और इज़राइल जैसे देशों ने आधुनिक समुद्री खुफिया तंत्र और तटीय निगरानी प्रणालियों के माध्यम से अपनी तटीय सुरक्षा को मजबूत किया है। वहीं गुजरात, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों ने भी सफल तटीय सुरक्षा मॉडल विकसित किए हैं। इसी प्रकार भारत में भी राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत तटीय सुरक्षा नेटवर्क स्थापित करने की आवश्यकता है।
फाउंडेशन ने राज्य सरकार से महाराष्ट्र तटीय सुरक्षा प्राधिकरण की स्थापना करने, पूरी तटरेखा पर रडार, ड्रोन, एआईएस, जीपीएस, उपग्रह और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी प्रणाली विकसित करने तथा वधावन बंदरगाह, जेएनपीटी, मुंबई हाई, ओएनजीसी प्रतिष्ठानों और नौसैनिक ठिकानों जैसी रणनीतिक परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा ढांचा लागू करने की मांग की है।
केंद्र सरकार के समक्ष रखी गई प्रमुख मांगों में “यूनिफाइड कोस्टल सिक्योरिटी एक्ट” लागू कर भारतीय नौसेना, तटरक्षक बल, मरीन पुलिस, सीमा शुल्क विभाग और बंदरगाह प्राधिकरणों के बीच एकीकृत कानूनी व्यवस्था विकसित करना शामिल है। इसके अलावा सभी मछली पकड़ने वाली नौकाओं के लिए जीपीएस, एआईएस और आधार से जुड़ी बायोमेट्रिक पंजीकरण व्यवस्था अनिवार्य करने तथा संवेदनशील तटीय क्षेत्रों को “हाई सिक्योरिटी कोस्टल जोन” घोषित कर समुद्री अपराधों के लिए कड़ी सजा और विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों की स्थापना की भी मांग की गई है।
पत्रकार परिषद में देश के बढ़ते समुद्री सुरक्षा खतरों, वर्तमान तटीय सुरक्षा व्यवस्था की कमियों तथा एकीकृत और रियल-टाइम तटीय सुरक्षा प्रणाली की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की गई। फाउंडेशन ने कहा कि बढ़ते समुद्री व्यापार, बड़े बंदरगाह परियोजनाओं, समुद्री मार्गों से होने वाली तस्करी, घुसपैठ और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संभावित खतरों को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारों को तत्काल प्रभाव से एक सशक्त एवं एकीकृत तटीय सुरक्षा नेटवर्क स्थापित करना चाहिए।



