
फ्यूल एजुकेशन इंस्टीट्यूट द्वारा ‘माऊली-एक कालातित परंपरा’ भारतनाट्यम प्रोग्राम १२ जुलाई को
इंटरनेशनल लेवल पर मशहूर डांसर कलाईमामणि बाला देवी चंद्रशेखर का प्रेजेंटेशन
रिपोर्ट: विशाल समाचार
स्थान:पुणे महाराष्ट्र
पुणे, : ” भक्ति, परंपरा, कला और भगवान के बीच के दिव्य रिश्ते का सेलिब्रेशन “माऊली- एक कालातित परंपरा” है. यह कला पंढरपुर वारी की भावना को जिंदा करती है. इंटरनेशनल लेवल पर मशहूर भरतनाट्यम कलाकार, कोरियोग्राफर और रिसर्चर कलाईमामणि बाला देवी चंद्रशेखर के भारतनाट्यम प्रोग्राम का अनुभव पुणेवासी कर पाएंगे. यह कार्यक्रम रविवार, १२ जुलाई को शाम ५ से ६.१५ बजे तक कोथरुड, मयूर कॉलोनी में एमईएस ऑडिटोरियम में होगा. यह जानकारी फ्यूल एजुकेशन इंस्टीट्यूट के फाउंडर और प्रेसिडेंट डॉ. केतन देशपांडे ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी.
इस मौके पर इंटरनेशनल लेवल की मशहूर डांसर, भरतनाट्यम आर्टिस्ट, कोरियोग्राफर और रिसर्चर कलाईमामणि बाला देवी चंद्रशेखर, प्रा. प्राची अहीरराव और श्री. चंद्रशेखर मौजूद थे.
डॉ. केतन देशपांडे ने कहा, यह प्रोग्राम फ्यूल एजुकेशनल इंस्टिट्यूशन की १० लडकियों की पढाई में मदद करने के लिए ऑर्गनाइज किया गया है, जो सीएसआर के जरिए फ्री शिक्षा देता है. बाला देवी चंद्रशेखर पहली डांसर हैं जिन्होंने संतों के अभंगों को मिलाकर पूरे वारकरी समुदाय की यात्रा को स्टेज पर दिखाया है. वारकरी परंपरा के अभंगों और फिलॉसॉफिकल से प्रेरणा लेकर, वह हर भक्ति गीत को एक जीती जागती लगातार चलने वाली यात्रा में बदल देती हैं. यह वारकरी के स्पिरिचुअल, इमोशनल और कलेक्टिव अनुभव की झलक हैं. इस माइलस्टोन प्रोडक्शन में, स्टेज खुद एक पवित्र रास्ता बन जाता है. यहां पंढरपुर की अटूट भक्ति की भावना, कविता, फिलॉसफी और डांस को एक साथ दिखाईं देता है. बाला देवी चंद्रशेखर ने ४० से ज्यादा देशों मेुं ३०० से ज्यादा ग्लोबल स्टेज पर इंडियन क्लासिकल डांस परफॉर्म किया है.
कलाईमामणि बाला देवी चंद्रशेखर ने कहा, “माऊली ए टाइमलेस ट्रेडियन” का कॉन्सेप्ट पंढरपुर के पवित्र वारी से प्रेरणा लेता है. वारी तीर्थयात्रा नहीं बल्कि अंदर की यात्रा है. माऊली में इस यात्रा का नतीजा एक बदलावा के रुप में दिखता है. संत ज्ञानेश्वर, नामदेव, एकनाथ, तुकाराम और जनाबाई जैसे वारकरी संतों के जीवन और उनके अभंगों को भरतनाट्यम के जरिए दिखाया जाएगा. जहाँ भक्त न सिर्फ भगवान के दर्शन करके लौटते हैं, बल्कि उस दिव्य तत्व को अपने दिल में बसा भी लेते हैं. इससे पंढरपुर वारी की भावना जिंदा हो जाती हैं. इस प्रोग्राम में सभी संतों के अलग अलग अभंग और भारुड शामिल हैं.
डॉ. केतन देशपांडे ने इस प्रोग्राम का हिस्सा बनने की अपील की, जो भक्ति, परंपरा और कला और भगवान के बीच के दिव्य संबंध का जश्न मनाता है. साथ ही ज्यादा से ज्यादा पुणेकरों को भरतनाट्यम प्रोग्राम का लाभ उठाने की अपील की है.



