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भूमि अभिलेख में गंभीर त्रुटि के मामले में तत्कालीन अंचलाधिकारी एवं संबंधित राजस्व कर्मचारी पर कार्रवाई का निर्देश

भूमि अभिलेख में गंभीर त्रुटि के मामले में तत्कालीन अंचलाधिकारी एवं संबंधित राजस्व कर्मचारी पर कार्रवाई का निर्देश

रिपोर्ट :विशाल समाचार 

स्थान:सीतामढ़ी बिहार 

आज माननीय मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित राज्य स्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान सीतामढ़ी जिले के पुपरी अंचल से संबंधित भूमि अभिलेख की गंभीर त्रुटि के एक मामले की समीक्षा की गई। समीक्षा के उपरांत तत्कालीन अंचलाधिकारी, पुपरी तथा संबंधित राजस्व कर्मचारी के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।

 

उक्त मामला परिवादी श्री मुकेश कुमार, ग्राम-हरिहरपुर, पोस्ट-हरिहरपुर, प्रखंड-पुपरी द्वारा सहयोग पोर्टल (त्वरित अनुसंधान प्रणाली) पर दर्ज कराया गया था। परिवाद में गलत जमाबंदी एवं दाखिल-खारिज के कारण उत्पन्न विवाद की शिकायत की गई थी। मामला माननीय मुख्यमंत्री के जनता के दरबार तक पहुंचा।

 

जांच में यह तथ्य सामने आया कि दाखिल-खारिज वाद संख्या-839/2011 के अंतर्गत मौजा-तेम्हुआ, थाना संख्या-72, खेसरा संख्या-1369 की कुल 21 डिसमिल भूमि में से मूल जमाबंदी रैयत मो. इस्लाम साफी द्वारा निबंधित विक्रय विलेख संख्या-2173, दिनांक-16.05.2011 के माध्यम से केवल 04 डिसमिल भूमि का विक्रय श्री सागर मुखिया के पक्ष में किया गया था।

 

किन्तु तत्कालीन स्तर पर दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में गंभीर त्रुटि करते हुए 04 डिसमिल के स्थान पर संपूर्ण 21 डिसमिल भूमि का नामांतरण (दाखिल-खारिज) कर दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप मूल जमाबंदी में शेष भूमि का रकबा शून्य अंकित हो गया। बाद में परिवादी श्री मुकेश कुमार द्वारा भूमि क्रय कर दाखिल-खारिज हेतु आवेदन देने पर जांच के दौरान उक्त त्रुटि का खुलासा हुआ।

 

विस्तृत जांच में यह स्पष्ट हुआ कि निबंधित दस्तावेज में उल्लिखित वास्तविक रकबा एवं दाखिल-खारिज आदेश में दर्ज रकबा में गंभीर असंगति है। जांच प्रतिवेदन में तत्कालीन अंचलाधिकारी, पुपरी तथा संबंधित राजस्व कर्मचारी की भूमिका प्रथम दृष्टया दोषपूर्ण पाई गई।

 

राज्य स्तरीय समीक्षा के दौरान इस मामले को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए माननीय मुख्यमंत्री द्वारा दोषी पदाधिकारियों एवं कर्मियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। साथ ही पूर्व में किए गए सभी दाखिल खारिज को खंडित करने का निर्देश भी दिया गया है।

 

सरकार का संकल्प है कि भूमि अभिलेखों में पारदर्शिता एवं शुद्धता सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा राजस्व संबंधी मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही अथवा अनियमितता के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई जा रही है। दोषी पाए जाने वाले पदाधिकारियों एवं कर्मियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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