
जनगणना के बाद ही हो अनुसूचित जातियों का उप-वर्गीकरण: आरपीआई (आठवले) की मांग
पुणे में मूसलाधार बारिश के बीच जिलाधिकारी कार्यालय पर निकाला विशाल महामोर्चा
रिपोर्ट:विशाल समाचार
स्थान:पुणे , महाराष्ट्र
रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) ने अनुसूचित जातियों के उप-वर्गीकरण को राष्ट्रीय जाति जनगणना पूरी होने के बाद ही लागू करने की मांग को लेकर पुणे में भव्य महामोर्चा निकाला। आंबेडकर प्रतिमा से शुरू हुआ यह मोर्चा जिलाधिकारी कार्यालय तक पहुंचा, जिसमें पुणे शहर, पिंपरी-चिंचवड़ और पुणे ग्रामीण क्षेत्र के पदाधिकारी, कार्यकर्ता तथा अनुसूचित जाति वर्ग की 59 जातियों के बड़ी संख्या में लोग मूसलाधार बारिश के बावजूद शामिल हुए।
मोर्चे में पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी एवं जनप्रतिनिधि शामिल रहे। प्रदर्शन के दौरान बौद्ध समाज और अनुसूचित जाति के विभिन्न समाजों की एकता तथा सामाजिक न्याय के समर्थन में नारे लगाए गए।
पार्टी नेताओं ने कहा कि अनुसूचित जातियों की 59 जातियों की वास्तविक जनसंख्या का आंकड़ा उपलब्ध हुए बिना उप-वर्गीकरण लागू करना उचित नहीं होगा। उनका कहना था कि राष्ट्रीय जाति जनगणना के बाद प्राप्त सटीक जनसंख्या के आधार पर ही उप-वर्गीकरण किया जाए, ताकि सभी समाजों को न्याय मिल सके और किसी भी वर्ग में असंतोष या मतभेद की स्थिति पैदा न हो।
आरपीआई (आठवले) ने स्पष्ट किया कि अनुसूचित जातियों के विभिन्न समाजों ने वर्षों तक सामाजिक न्याय, समान अधिकार और आरक्षण के लिए मिलकर संघर्ष किया है। इसलिए कोई भी निर्णय जल्दबाजी में लेने के बजाय जनगणना के आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर लिया जाना चाहिए।
पार्टी ने यह भी मांग की कि वर्ष 2027 की जनगणना के बाद प्राप्त जनसंख्या के अनुपात के आधार पर अनुसूचित जातियों के आरक्षण की संरचना की भी समीक्षा की जाए, ताकि सभी समाजों को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में समान अवसर सुनिश्चित हो सकें।
मोर्चे के माध्यम से राज्य सरकार से मांग की गई कि अनुसूचित जातियों में सामाजिक एकता और सौहार्द बनाए रखने के लिए उप-वर्गीकरण का निर्णय राष्ट्रीय जाति जनगणना पूरी होने के बाद ही लिया जाए।



