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प्रेस मान्यता समिति में पत्रकार संगठनों को शामिल करने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार आवश्यक

प्रेस मान्यता समिति के पुनर्गठन में पत्रकार संगठनों को शामिल करने की प्रक्रिया पर पुनर्विचार आवश्यक

(संपादकीय – विशाल समाचार)

उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी पत्र, जिसमें प्रेस मान्यता समिति के पुनर्गठन के लिए पत्रकार संगठनों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।”

उत्तर प्रदेश सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने प्रेस मान्यता समिति के पुनर्गठन के लिए पत्रकार संगठनों से आवेदन, पंजीकरण प्रमाण-पत्र, पदाधिकारियों की सूची एवं शपथ-पत्र आमंत्रित किए हैं। सरकार का उद्देश्य यदि पत्रकारों की भागीदारी बढ़ाना और उनकी समस्याओं को प्रभावी ढंग से सरकार तक पहुँचाना है, तो यह निश्चित रूप से स्वागत योग्य पहल है। लेकिन इस प्रक्रिया के व्यावहारिक पक्ष पर गंभीरता से विचार करना भी उतना ही आवश्यक है।

आज देश और प्रदेश में सैकड़ों पत्रकार संगठन सक्रिय होने का दावा करते हैं। इनमें से अनेक संगठन पत्रकारों को सदस्य बनाने, विभिन्न पद देने और सदस्यता शुल्क लेने के लिए लगातार संपर्क करते हैं। कई बार जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के पदों का लालच भी दिया जाता है। लेकिन जब किसी पत्रकार को वास्तविक सहायता, कानूनी सहयोग या उसके अधिकारों की रक्षा की आवश्यकता होती है, तब ऐसे कई संगठन अपेक्षित भूमिका निभाते हुए दिखाई नहीं देते। यही कारण है कि समय के साथ पत्रकारों का भरोसा इन संगठनों से कम होता गया है।

हमारा व्यक्तिगत अनुभव भी कुछ ऐसा ही रहा। लगभग पाँच वर्ष पूर्व हमने एक पत्रकार संगठन की सदस्यता ली और निर्धारित शुल्क भी जमा किया। इसके बाद न पहचान पत्र मिला, न नियुक्ति पत्र और न ही किसी प्रकार का वास्तविक सहयोग प्राप्त हुआ। केवल एक पीडीएफ भेजकर औपचारिकता पूरी कर दी गई। कुछ समय बाद बिना किसी स्पष्ट कारण के सदस्यता समाप्त कर दी गई, लेकिन बाद में दोबारा सदस्यता शुल्क जमा करने के लिए फोन आने लगे। ऐसे अनुभवों के बाद हमने किसी भी पत्रकार संगठन से दूरी बनाए रखने का निर्णय लिया।

आज भी अनेक संगठन विभिन्न पदों का प्रस्ताव लेकर आते हैं। कोई जिला अध्यक्ष बनाने की बात करता है, कोई प्रदेश या राष्ट्रीय पद देने की पेशकश करता है। हमारा स्पष्ट उत्तर होता है कि हमें किसी पद या संगठन की आवश्यकता नहीं है। पत्रकारिता का उद्देश्य पद प्राप्त करना नहीं, बल्कि निष्पक्ष, निर्भीक और जनहित में कार्य करना है। यदि पत्रकारिता ईमानदारी से की जाए तो किसी पद की आवश्यकता नहीं पड़ती।

इसी कारण हमारा मानना है कि प्रेस मान्यता समिति के गठन में केवल किसी संगठन का प्रतिनिधित्व होना पर्याप्त नहीं है। यदि संगठनों को शामिल किया भी जाए, तो उनके लिए स्पष्ट और कठोर मानदंड निर्धारित किए जाने चाहिए। उनके कार्यों का मूल्यांकन हो, जवाबदेही तय हो और यह सुनिश्चित किया जाए कि वे वास्तव में पत्रकारों के हितों के लिए कार्य कर रहे हैं। केवल पंजीकरण या सदस्य संख्या के आधार पर किसी संगठन को समिति में स्थान देना उचित नहीं होगा।

प्रेस मान्यता समिति जैसी महत्वपूर्ण संस्था में ऐसे अनुभवी, निष्पक्ष और सक्रिय पत्रकारों को स्थान मिलना चाहिए, जिनका चयन पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से हो और जिनका कार्य पत्रकारिता की गरिमा तथा पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा करना हो।

पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है। इसकी विश्वसनीयता और स्वतंत्रता बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। सरकार द्वारा शुरू की गई इस प्रक्रिया पर व्यापक विचार-विमर्श होना चाहिए, ताकि बनने वाली व्यवस्था वास्तव में पत्रकारों के हित में हो, न कि केवल औपचारिक प्रतिनिधित्व तक सीमित रह जाए।

□ सरकारी पत्र क्या कहता है? 

29 जुलाई 2026 को उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी पत्र में प्रेस मान्यता समिति के पुनर्गठन के लिए पत्रकार संगठनों से 17 अगस्त 2026 तक पंजीकरण/संबद्धता प्रमाण-पत्र, पदाधिकारियों की अद्यतन सूची तथा शपथ-पत्र सहित आवेदन प्रस्तुत करने को कहा गया है। इन आवेदनों के आधार पर समिति में संगठनों को शामिल किए जाने पर विचार किया जाएगा।

— संपादकीय, विशाल समाचार

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