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ऐक्सिस म्यूचुअल फंड ने ऐक्सिस निफ्टी एनर्जी इंडेक्स फंड और ऐक्सिस निफ्टी एनर्जी ईटीएफ के एनएफओ लॉन्च किए, भारत के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश का मौका

ऐक्सिस म्यूचुअल फंड ने ऐक्सिस निफ्टी एनर्जी इंडेक्स फंड और ऐक्सिस निफ्टी एनर्जी ईटीएफ के एनएफओ लॉन्च किए, भारत के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश का मौका

ऐक्सिस निफ्टी एनर्जी इंडेक्स फंड की प्रमुख जानकारी:

फंड का प्रकार: निफ्टी एनर्जी टीआरआई को रिप्लीकेट/ट्रैक करने वाली ओपन-एंडेड योजना

बेंचमार्क: निफ्टी एनर्जी टीआरआई

एनएफओ अवधि: 7 अगस्त 2026 से 21 अगस्त 2026 तक

फंड मैनेजर: नंदिक मलिक और रोहित गौतम

न्यूनतम निवेश: 100 रुपये और इसके बाद 1 रुपये के गुणक में

एग्जिट लोड: अलॉटमेंट की तारीख से 15 दिनों के भीतर निवेश भुनाने या दूसरी योजना में स्विच करने पर 0.25% शुल्क। इसके बाद कोई एग्जिट लोड नहीं।

ऐक्सिस निफ्टी एनर्जी ईटीएफ की प्रमुख जानकारी

फंड का प्रकार: निफ्टी एनर्जी टीआरआई को ट्रैक करने वाली ओपन-एंडेड योजना

बेंचमार्क: निफ्टी एनर्जी टीआरआई

ट्रेडिंग सिंबल: ENERGYAXIS

एनएफओ अवधि: 12 अगस्त से 21 अगस्त 2026 तक

फंड मैनेजर: नंदिक मलिक और रोहित गौतम

न्यूनतम निवेश: 5,000 रुपये और इसके बाद 10 रुपये के गुणक

एग्जिट लोड : कोई शुल्क नहीं

रिपोर्ट :विशाल समाचार 

स्थान: मुंबई महाराष्ट्र

मुंबई,: देश की प्रमुख एसेट मैनेजमेंट कंपनियों में शामिल ऐक्सिस म्यूचुअल फंड ने ऐक्सिस निफ्टी एनर्जी इंडेक्स फंड और ऐक्सिस निफ्टी एनर्जी ईटीएफ लॉन्च करने की घोषणा की है। इन दोनों योजनाओं के जरिए निवेशकों को तेजी से बदलते भारतीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश का आसान और पारदर्शी विकल्प मिलेगा। ऐक्सिस निफ्टी एनर्जी इंडेक्स फंड का एनएफओ 7 अगस्त से 21 अगस्त 2026 तक खुला है। वहीं, ऐक्सिस निफ्टी एनर्जी ईटीएफ का एनएफओ 12 अगस्त से 21 अगस्त 2026 तक चलेगा। ईटीएफ को शेयर बाजार में सूचीबद्ध किया जाएगा। दोनों योजनाओं का लक्ष्य खर्चों को छोड़कर निफ्टी एनर्जी टीआरआई के प्रदर्शन के अनुरूप रिटर्न देना है। हालांकि, वास्तविक रिटर्न में ट्रैकिंग एरर का असर हो सकता है।

 

अगले दशक में भारत की ऊर्जा जरूरतों को मिलेगा बढ़ावा

भारत में ऊर्जा क्षेत्र के विकास की अभी काफी संभावनाएं हैं। देश में प्रति व्यक्ति बिजली की खपत कई विकसित और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी कम है। इससे आने वाले वर्षों में बिजली और ऊर्जा की मांग बढ़ने की संभावनाएं दिखाई देती हैं। इसके साथ ही देश का पूरा ऊर्जा क्षेत्र तेजी से बदल रहा है। पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के साथ नवीकरणीय ऊर्जा, बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा उपकरण और नई तकनीकों में भी तेजी से विकास हो रहा है।

 

भविष्य की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है। अनुमान है कि अगले दशक में भारत में 580 गीगावॉट से अधिक बिजली उत्पादन क्षमता जोड़ी जाएगी। यह क्षमता अब तक देश के इतिहास में जोड़ी गई कुल क्षमता से भी अधिक होगी। इस विस्तार में नवीकरणीय ऊर्जा की बड़ी हिस्सेदारी रहने की उम्मीद है। इसके अलावा ट्रांसमिशन नेटवर्क, ऊर्जा भंडारण, प्राकृतिक गैस से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और बिजली ग्रिड के आधुनिकीकरण में भी निवेश तेजी से बढ़ रहा है।

 

ऊर्जा क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में निवेश का मौका

ऐक्सिस निफ्टी एनर्जी इंडेक्स फंड और ऐक्सिस निफ्टी एनर्जी ईटीएफ का लक्ष्य निफ्टी एनर्जी टीआरआई के प्रदर्शन को ट्रैक करना है। इससे निवेशकों को भारत की ऊर्जा विकास की कहानी में निवेश करने का एक आसान और कम लागत वाला विकल्प मिलेगा। इन दोनों योजनाओं के जरिए ऊर्जा क्षेत्र की अलग-अलग कंपनियों में निवेश किया जाएगा। इसमें तेल और गैस, बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन एवं वितरण, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा उपकरण और इससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।

 

ऐक्सिस एएमसी के एमडी एवं सीईओ बी. गोपकुमार ने कहा, “ऊर्जा आर्थिक विकास की सबसे महत्वपूर्ण बुनियाद में से एक है। जैसे-जैसे भारत में उद्योग, शहर और डिजिटल तकनीक का विस्तार हो रहा है, ऊर्जा से जुड़े सभी क्षेत्रों में मांग बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही, नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा मिलने, ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार, ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी पहलों और नई तकनीकों के कारण इस क्षेत्र में बड़े बदलाव हो रहे हैं।”

 

उन्होंने कहा, “पारंपरिक और नवीकरणीय ऊर्जा, ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर, यूटिलिटीज और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों में निवेश के जरिए ये दोनों योजनाएं निवेशकों को भारत की ऊर्जा विकास यात्रा में हिस्सा लेने का एक विकल्प देती हैं। आने वाले दशकों में ऊर्जा क्षेत्र देश की आर्थिक वृद्धि, औद्योगिक विस्तार और ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।”

 

इन योजनाओं का आधार निफ्टी इंडेक्स है। इसमें निफ्टी 500 में शामिल ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी अधिकतम 40 कंपनियां शामिल होती हैं। कंपनियों का वजन उनके फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर तय किया जाता है। किसी एक कंपनी या उद्योग में बहुत ज्यादा निवेश केंद्रित न हो, इसके लिए सीमा तय की गई है। रीबैलेंसिंग के समय किसी एक कंपनी का वेटेज 10% से अधिक और किसी एक उद्योग का वजन 25% से अधिक नहीं हो सकता। इससे इंडेक्स में निवेश ज़्यादा विविध बना रहता है।

इंडेक्स की समीक्षा और रीबैलेंसिंग साल में दो बार मार्च और सितंबर में की जाती है। इससे बदलते भारतीय ऊर्जा क्षेत्र के अनुसार इंडेक्स में शामिल कंपनियों को समय-समय पर अपडेट किया जाता है। तय नियमों पर आधारित यह तरीका निवेशकों को ऊर्जा क्षेत्र के नए मौकों तक पहुंच देने के साथ पोर्टफोलियो में पारदर्शिता और निरंतरता बनाए रखने में मदद करता है।

 

दोनों योजनाएं उन निवेशकों के लिए हैं जो पैसिव निवेश के जरिए भारत की लंबी अवधि की ऊर्जा विकास यात्रा में हिस्सा लेना चाहते हैं। ऊर्जा क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में निवेश के कारण इन्हें निवेश पोर्टफोलियो में थीमैटिक निवेश के तौर पर शामिल किया जा सकता है। दोनों फंड का प्रबंधन नंदिक मलिक और रोहित गौतम करेंगे।

 

 

 

 

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