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MIT आर्ट, डिझाइन एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी में 11वां विद्यारंभ समारोह संपन्न

MIT आर्ट, डिझाइन एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी में 11वां विद्यारंभ समारोह संपन्न

 

नवाचार, कौशल और नैतिक मूल्यों को आत्मसात करें: राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा

रिपोर्ट: विशाल समाचार 

स्थान: पुणे महाराष्ट्र 

पुणे, । आज की जटिल चुनौतियों का सामना करने के लिए पारंपरिक शैक्षणिक शाखाओं की सीमाओं से आगे बढ़कर बहुविषयक शिक्षा आवश्यक है। विद्यार्थियों को ज्ञान, कौशल, नवाचार, आलोचनात्मक सोच और नैतिक मूल्यों को आत्मसात कर भविष्य की चुनौतियों के लिए खुद को सक्षम बनाना चाहिए। यह बात राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने कही।

 

लोणी कालभोर स्थित एमआईटी आर्ट, डिझाइन एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी में आयोजित 11वें विद्यारंभ समारोह में राज्यपाल संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर एमआईटी समूह संस्थानों के संस्थापक एवं कुलपति डॉ. विश्वनाथ डी. कराड, महाराष्ट्र के पूर्व अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक जे. डी. लक्ष्मीनारायण, राज्यपाल के सचिव डॉ. प्रशांत नारनवरे, प्रति-कुलपति प्रो. डॉ. मंगेश कराड, उषा कराड, कुलगुरु प्रो. राजेश एस., कार्यकारी निदेशक डॉ. सुनीता कराड सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

 

विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका

 

राज्यपाल वर्मा ने कहा कि विकसित भारत 2047 के सपने को साकार करने में विश्वविद्यालयों और युवा शक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। आज विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों को एक साथ पढ़ने का अवसर मिल रहा है। आपस में जुड़े इस दौर में बहुविषयक शिक्षा विद्यार्थियों को जटिल समस्याओं को व्यापक दृष्टिकोण से समझने और आत्मविश्वास के साथ समाधान खोजने में सक्षम बनाती है।

 

उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग, जैव प्रौद्योगिकी, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल तकनीक के कारण प्रत्येक क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। लेकिन तकनीक के साथ नैतिकता, मानवीय मूल्य और करुणा का अभाव हो तो यही तकनीक विनाशकारी साबित हो सकती है।

 

उन्होंने कहा कि विज्ञान और तकनीक का उपयोग मानव कल्याण के लिए होना चाहिए, मानव विनाश के लिए नहीं। इसलिए तकनीक के इस्तेमाल के साथ मानवता और करुणा को बनाए रखना जरूरी है।

 

शोध का लाभ समाज तक पहुंचे

 

राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों से विद्यार्थियों को तकनीक के उपयोग के साथ-साथ नवाचार, शोध और समाजोपयोगी समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।

 

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में रचनात्मकता, आलोचनात्मक सोच, नैतिक नेतृत्व और जीवनभर सीखने की प्रवृत्ति विकसित की जानी चाहिए। युवाओं को केवल नौकरी पाने की इच्छा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि नवोन्मेषक, उद्यमी, शोधकर्ता और रोजगार के अवसर पैदा करने वाले बनने का लक्ष्य रखना चाहिए।

 

उच्च शिक्षा में उद्यमिता और सामाजिक जिम्मेदारी को महत्वपूर्ण स्थान देने की जरूरत है। विश्वविद्यालयों को उद्योग जगत के साथ साझेदारी, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, इनक्यूबेशन सेंटर और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करना चाहिए।

 

राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों और विशेष रूप से कृषि विश्वविद्यालयों में बड़े स्तर पर शोध हो रहा है। शोध से सामने आने वाले विचारों को व्यावहारिक और समाजोपयोगी समाधानों में बदलने की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए।

 

उन्होंने विश्वविद्यालयों से कुछ गांवों को गोद लेकर उनके विकास तथा विभिन्न समाजोपयोगी गतिविधियों में योगदान देने का आह्वान भी किया।

 

विद्यार्थियों को दिया सफलता का मंत्र

 

राज्यपाल ने कहा कि विद्यारंभ समारोह केवल परिचय का कार्यक्रम नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के शैक्षणिक जीवन में एक नई यात्रा की शुरुआत है। भारत दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी वाले देशों में शामिल है। इस जनसांख्यिकीय शक्ति को राष्ट्र निर्माण की ताकत में बदलने के लिए विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक और वैश्विक सर्वोत्तम पद्धतियों को अपनाने के साथ भारत की समृद्ध सभ्यतागत परंपराओं और ज्ञान परंपरा से भी जुड़े रहना होगा।

 

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि बड़े सपने देखें, मेहनत करें, सफलता मिलने पर विनम्र रहें और कठिन समय में मजबूती से खड़े रहें। सवाल बुद्धिमानी से पूछें, जिज्ञासा बनाए रखें और शिक्षा का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की प्रगति के लिए करें।

 

डॉ. विश्वनाथ कराड ने बताई MIT की यात्रा

 

एमआईटी समूह संस्थानों के संस्थापक एवं कुलपति डॉ. विश्वनाथ डी. कराड ने अपने संबोधन में एमआईटी की स्थापना से लेकर अब तक की यात्रा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से समाज और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की प्रेरणा से एमआईटी की स्थापना की गई।

 

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति, मूल्यों, विज्ञान, तकनीक और नवाचार से जोड़कर सक्षम एवं जिम्मेदार नागरिक बनाना संस्थान का प्रमुख उद्देश्य है।

 

प्रति-कुलपति प्रो. डॉ. मंगेश कराड ने स्वागत एवं प्रस्तावना में MIT आर्ट, डिझाइन एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी की शैक्षणिक यात्रा, विभिन्न गतिविधियों और भविष्य के लक्ष्यों की जानकारी दी।

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