
‘बापू के लोककल्याणकारी राज्य की संकल्पना को साकार करना ही सच्ची श्रद्धांजलि’
‘सिद्धांत के बिना राजनीति’ महात्मा गांधी के सात सामाजिक पापों में से एक था : गोपाळदादा तिवारी
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान पुणे महाराष्ट्र
पुणे, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जैसे मूल्यनिष्ठ एवं दूरदर्शी नेताओं की जयंती केवल औपचारिकता या विज्ञापनों तक सीमित न रहकर उनके विचारों, नैतिक मूल्यों और लोककल्याणकारी व्यवस्था को व्यवहार में उतारने के संकल्प के साथ मनाई जानी चाहिए। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। यह विचार कांग्रेस के वरिष्ठ प्रदेश प्रवक्ता गोपाळदादा तिवारी ने व्यक्त किए।
पुणे शहर जिला कांग्रेस की ओर से महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में तिवारी बोल रहे थे।
तिवारी ने कहा कि महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर राज्यकर्ताओं द्वारा विभिन्न माध्यमों से विज्ञापन जारी कर उन्हें श्रद्धांजलि देना निश्चित रूप से सराहनीय है, लेकिन केवल इतना पर्याप्त नहीं है। महात्मा गांधी ने सत्य, अहिंसा, स्वदेशी, सत्याग्रह, ग्राम स्वराज और नैतिकता जैसे मूल्यों के आधार पर स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व किया। स्वतंत्रता के बाद भारत में राजशाही के बजाय लोकतांत्रिक व्यवस्था के आधार पर लोककल्याणकारी राज्य स्थापित हो, यह उनकी मूल भावना थी।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में लोकतांत्रिक मूल्यों और लोककल्याणकारी राज्य की संकल्पना के कमजोर पड़ने की स्थिति दिखाई दे रही है। ऐसे प्रयासों को रोकना और महात्मा गांधी के विचारों के अनुरूप आचरण करते हुए उनके सपनों का भारत बनाने का प्रयास करना राजनेताओं के साथ-साथ प्रत्येक नागरिक का भी दायित्व है।
तिवारी ने कहा कि महात्मा गांधी द्वारा बताए गए सात सामाजिक पापों में ‘सिद्धांत के बिना राजनीति’ भी शामिल था। राजनीति में सिद्धांत, नैतिकता और जनसेवा का भाव बनाए रखना आवश्यक है।
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि रेल मंत्री रहते हुए एक रेल दुर्घटना की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार कर शास्त्रीजी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस निर्णय से आज के जनप्रतिनिधियों और राज्यकर्ताओं को नैतिक जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण संदेश मिलता है।



