
शिक्षक-शिक्षकेतर कर्मचारियों ने आंदोलन का फूंका बिगुल
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान पुणे महाराष्ट्र
पुणे: 1 नवंबर 2005 से पहले नियुक्त होकर बाद में 100 प्रतिशत अनुदान पर आए शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग को लेकर महाराष्ट्र राज्य पुरानी पेंशन समन्वय समिति ने निर्णायक आंदोलन की घोषणा की है। इस आंदोलन के जरिए सरकार का ध्यान कर्मचारियों की मांगों की ओर आकर्षित करने के लिए राज्यभर में चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा। महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालय मुख्याध्यापक संघ महामंडल के सचिव नंदकुमार सागर ने आंदोलन को समर्थन देने की जानकारी आज आयोजित पत्रकार परिषद में दी।
इस अवसर पर पुणे जिला माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालय मुख्याध्यापक संघ के अध्यक्ष प्रसाद गायकवाड़, सचिव शिवाजी कामथे, कोल्हापुर जिला माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालय मुख्याध्यापक संघ के अध्यक्ष राहुल पवार, सचिव आर. वाय. पाटील तथा महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालय मुख्याध्यापक संघ महामंडल के सहसंपादक सुनील भोर सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
समन्वय समिति के अनुसार, 1 नवंबर 2005 से पहले नियुक्त कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ मिलता है, जबकि इसके बाद नियुक्त कर्मचारियों के लिए नई पेंशन व्यवस्था लागू की गई है। हालांकि, 2005 से पहले नियुक्त होकर बाद में 100 प्रतिशत अनुदान पर आए कर्मचारियों की पेंशन का मुद्दा अभी भी लंबित है। इस मांग को लेकर न्यायालयीन लड़ाई भी जारी है। समिति का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय में चल रहे मामलों के लिए निश्चित समयसीमा नहीं होने के कारण केवल न्यायालय के फैसले की प्रतीक्षा करना पर्याप्त नहीं है।
पुणे में विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों की बैठक में बड़े पैमाने पर, शांतिपूर्ण और अनुशासित आंदोलन करने का निर्णय लिया गया। आंदोलन के पहले चरण में 1 से 4 सितंबर तक शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी काली पट्टी बांधकर काम करेंगे। साथ ही आंदोलन के प्रति जनजागृति के लिए सोशल मीडिया का उपयोग करने की अपील की गई है।
5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर दोपहर 2 बजे राज्य के सभी जिलों में मौन मार्च निकाला जाएगा। शिक्षकों से काला कपड़ा बांधकर शांतिपूर्ण एवं अनुशासित तरीके से मार्च में शामिल होने का आह्वान किया गया है।
समिति ने सरकार को मांग पर सकारात्मक निर्णय लेने के लिए 25 सितंबर तक का समय दिया है। इस अवधि में निर्णय नहीं होने पर 28 सितंबर से मुंबई के आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन धरना आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया गया है। इसके बाद भी मांग पूरी नहीं होने पर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को और तेज करने का निर्णय लिया जाएगा।
समिति ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध में नहीं, बल्कि शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों के न्यायसंगत पेंशन अधिकार के लिए है। समिति ने विश्वास जताया कि बड़ी संख्या में कर्मचारियों की भागीदारी और एकजुटता से सरकार का ध्यान इस मुद्दे की ओर प्रभावी ढंग से आकर्षित किया जा सकेगा।


