
MIMH ने एक दिवसीय आत्महत्या रोकथाम गेटकीपर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान पुणे महाराष्ट्र
पुणे : विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस 2026 के अवसर पर महाराष्ट्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ (MIMH), पुणे की ओर से एक दिवसीय आत्महत्या रोकथाम गेटकीपर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य, आत्महत्या संबंधी विचारों और आत्महत्या रोकथाम के बारे में जागरूकता बढ़ाना तथा ऐसे व्यक्तियों को प्रशिक्षित करना था, जो संकट की पहचान करने और समय पर सहायता उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कार्यक्रम का उद्घाटन महाराष्ट्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ के निदेशक-प्रोफेसर डॉ. प्रसाद देशपांडे ने किया। इस अवसर पर संस्थान के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (CAO) डॉ. श्रीकांत पवार, संकाय सदस्य तथा अन्य कर्मचारी उपस्थित थे। आयोजन अध्यक्ष डॉ. प्रफुल्ल कपसे ने द कनेक्ट हट के संस्थापक निदेशक और मानसिक स्वास्थ्य को सरल बनाने के लिए कार्यरत सामाजिक उद्यम के प्रतिनिधि श्री सचिन चितंबरन का परिचय कराया।
कार्यक्रम में महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों से लगभग 190 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रशिक्षण में मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संकट, आत्महत्या संबंधी विचारों तथा आत्महत्या रोकथाम में गेटकीपर की भूमिका को समझने पर विशेष जोर दिया गया। सत्रों को संवादात्मक और सहभागितापूर्ण रखा गया, जिसमें चर्चा, विचार-विमर्श, प्रश्नोत्तर और व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को विषय से जोड़ने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम में तीन प्रमुख मॉड्यूल शामिल थे। पहले मॉड्यूल ‘मानसिक स्वास्थ्य को समझना’ में मानसिक कल्याण, भावनाओं एवं संवेदनाओं, सामान्य मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों, भावनात्मक संकट की पहचान, मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न स्तरों, सुरक्षा योजना, सहायता सेवाओं तक पहुंच और सहायता प्रणालियों को मजबूत करने जैसे विषयों पर चर्चा की गई।
दूसरे मॉड्यूल ‘आत्महत्या संबंधी विचारों की मूल बातें’ में आत्महत्या और गैर-आत्मघाती आत्म-क्षति (NSSI), इसके कारणों, जोखिम एवं सुरक्षा कारकों, आत्महत्या संबंधी विचारों के विभिन्न चरणों, आत्महत्या से जुड़े मिथकों और तथ्यों तथा संकट से जूझ रहे व्यक्तियों के साथ उचित संवाद के बारे में जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा LISTEN Suicide Prevention Gatekeeper Training रहा। इसके माध्यम से प्रतिभागियों को ऐसे व्यक्तियों से संवेदनशील और उचित तरीके से संवाद करने तथा उन्हें आवश्यक सहायता से जोड़ने के व्यावहारिक कौशल प्रदान किए गए, जो भावनात्मक संकट का सामना कर रहे हों।
प्रशिक्षण की संवादात्मक प्रकृति के कारण प्रतिभागियों ने विषय पर सक्रिय रूप से भाग लिया। उन्होंने विभिन्न भ्रांतियों को दूर करने के साथ ही संकट की स्थिति में संवेदनशील और उचित प्रतिक्रिया देने के तरीकों पर चर्चा की। कार्यक्रम में संकट की प्रारंभिक पहचान, सहयोगात्मक संवाद, समय पर उचित सहायता तक पहुंच और व्यक्तिगत तथा सामुदायिक सहायता प्रणालियों को मजबूत करने के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया।
कार्यक्रम का समापन महत्वपूर्ण बिंदुओं की पुनरावृत्ति, प्रश्नोत्तर, प्रतिभागियों की प्रतिक्रिया और समापन सत्र के साथ हुआ। प्रमाणन प्रक्रिया के तहत प्रतिभागियों को निर्धारित प्रशिक्षण-पूर्व और प्रशिक्षण-पश्चात मूल्यांकन पूरा करने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया।
महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों से 190 प्रतिभागियों की सहभागिता ने आत्महत्या रोकथाम के लिए सामुदायिक क्षमता विकसित करने के प्रति बढ़ती रुचि और प्रतिबद्धता को दर्शाया। डॉ. प्रफुल्ल कपसे ने कहा कि ऐसे उपक्रमों के माध्यम से MIMH राज्य में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता, संकट की प्रारंभिक पहचान और समुदाय आधारित आत्महत्या रोकथाम के प्रयासों को मजबूत करने में निरंतर योगदान दे रहा है।


