
थाईलैंड में गूंजेगा महाराष्ट्र के ढोल-ताशों का गजर
ढोल-ताशा महासंघ महाराष्ट्र और समर्थ प्रतिष्ठान पुणे की पहल
तीन दिनों में तीन अलग-अलग सांस्कृतिक संकल्पनाओं की होगी प्रस्तुति
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान पुणे महाराष्ट्र
पुणे : महाराष्ट्र की पारंपरिक ढोल-ताशा वादन कला और समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा इस वर्ष गणेशोत्सव के दौरान थाईलैंड के फुकेत में गूंजेगी। ढोल-ताशा महासंघ, महाराष्ट्र तथा समर्थ प्रतिष्ठान ढोल-ताशा, ध्वज एवं ढाल-तलवार पथक, पुणे की ओर से 20 वादकों का दल फुकेत रवाना होगा। यहां तीन दिनों तक तीन अलग-अलग सांस्कृतिक संकल्पनाओं पर आधारित ढोल-ताशा वादन की प्रस्तुति दी जाएगी। यह जानकारी ढोल-ताशा महासंघ के अध्यक्ष पराग ठाकूर ने पत्रकार परिषद में दी।
पत्रकार परिषद में विधायक हेमंत रासने, ढोल-ताशा महासंघ के अध्यक्ष पराग ठाकूर, शिरीष थिटे, श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई सार्वजनिक गणपति ट्रस्ट के अध्यक्ष सुनील रासने, कोषाध्यक्ष महेश सूर्यवंशी, उत्सव प्रमुख अक्षय गोडसे, राजाभाऊ चव्हाण, डॉ. अ. ल. देशमुख, फुकेत स्थित ‘लॉर्ड श्रीमंत गणपति बाप्पा देवालय’ के समन्वयक चेतन लोढा, कलावंत पथक के सौरभ गोखले, समर्थ प्रतिष्ठान के संजय सातपुते, अथर्व कुलकर्णी, संदेश खरात, निरंजन माळवदकर सहित अन्य उपस्थित थे।
इस अवसर पर समन्वयक चेतन लोढा ने फुकेत स्थित मंदिर तथा वहां आयोजित होने वाले गणेशोत्सव के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
समर्थ प्रतिष्ठान के संजय सातपुते ने बताया कि भगवाधारी थीम, महाराष्ट्र की पारंपरिक ढोल-ताशा वादन शैली तथा पंढरी के वारकरी वादन के माध्यम से फुकेत में महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान को प्रस्तुत किया जाएगा। समर्थ प्रतिष्ठान का दल 13 सितंबर को सुबह 3:30 बजे मुंबई से फुकेत के लिए रवाना होगा और तीन दिनों तक विभिन्न प्रकार की वादन प्रस्तुतियां देगा। इसके बाद 17 सितंबर को दोपहर 12 बजे फुकेत से मुंबई के लिए रवाना होगा।
वादक दल में 12 ढोल, 4 ताशे, 1 ध्वज और 1 टोल शामिल होंगे। प्रत्येक दिन की प्रस्तुति के अनुरूप कलाकार पारंपरिक वेशभूषा में नजर आएंगे। भगवा कुर्ता एवं फेटा, पारंपरिक गणवेश, वारकरी वेशभूषा तथा नौवारी साड़ी सहित विभिन्न पारंपरिक परिधानों के माध्यम से महाराष्ट्र की संस्कृति को जीवंत किया जाएगा।
कार्यक्रम के तहत 14 सितंबर को भगवाधारी थीम, 15 सितंबर को महाराष्ट्र का पारंपरिक ढोल-ताशा वादन और 16 सितंबर को पंढरी का वारकरी वादन प्रस्तुत किया जाएगा। वहीं 18 सितंबर को गणेशोत्सव की सांगता मिरवणूक (समापन शोभायात्रा) आयोजित की जाएगी, जिसमें कलावंत पथक भी सहभागी होगा। इस शोभायात्रा में मराठी नाट्य एवं फिल्म जगत के नामचीन कलाकारों के भी शामिल होने की जानकारी दी गई।
इस पहल के माध्यम से पुणे के वादक फुकेत में महाराष्ट्र की पारंपरिक ढोल-ताशा वादन कला के साथ-साथ वारकरी संस्कृति की भी पहचान प्रस्तुत करेंगे। आयोजकों के अनुसार फुकेत में बड़ी संख्या में गणेशभक्त हैं। थाईलैंड की गणेशभक्त पापासोर्न मीपा के प्रयासों से वहां पुणे के प्रसिद्ध श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर की प्रतिकृति तैयार की गई है। मंदिर में दगडूशेठ बाप्पा की हुबहू प्रतिकृति की मूर्ति भी स्थापित की गई है। इसी मंदिर में आयोजित गणेशोत्सव के दौरान पुणे के ढोल-ताशा पथक द्वारा वादन सेवा प्रदान की जाएगी।



