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पौने दो करोड़ के कथित लेन-देन पर सवाल, रकम आई कहां से? खेल निराला… कहानी कुछ और तो नहीं?

पौने दो करोड़ के कथित लेन-देन पर सवाल, रकम आई कहां से? खेल निराला… कहानी कुछ और तो नहीं?

 

रिपोर्ट विशाल समाचार 

स्थान इटावा उत्तर प्रदेश 

 

जसवंतनगर/इटावा। हनी ट्रैप और ब्लैकमेलिंग के आरोपों से जुड़े मामले में करीब 1 करोड़ 75 लाख 68 हजार 683 रुपये के कथित लेन-देन का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता ने पांच लोगों पर निजी तस्वीरों और वीडियो को सार्वजनिक करने की धमकी देकर रकम वसूलने तथा 50 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग करने का आरोप लगाते हुए एसएसपी से शिकायत की है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

 

मामले में सबसे बड़ा सवाल इतनी बड़ी रकम के स्रोत और उसके पूरे लेन-देन को लेकर है। शिकायत के अनुसार अप्रैल 2024 से मई 2026 के बीच अलग-अलग माध्यमों से रकम दी गई, जिसमें बैंक ट्रांसफर के साथ नकद भुगतान भी शामिल बताया गया है। ऐसे में जांच में यह सामने आना जरूरी है कि रकम किस खाते से निकली, किन खातों में पहुंची, भुगतान का उद्देश्य क्या दर्ज था और कथित नकद भुगतान का क्या प्रमाण है।

 

शिकायतकर्ता ने बैंक खातों के विवरण और अन्य दस्तावेज पुलिस को दिए जाने की बात कही है। रिपोर्टों के अनुसार उसने संबंधित लोगों के मोबाइल फोन, कॉल हिस्ट्री, चैट, बैंक खातों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की मांग भी की है।

दो साल तक चलता रहा कथित लेन-देन, फिर शिकायत क्यों?

अप्रैल 2024 से मई 2026 तक कथित तौर पर इतनी बड़ी रकम दिए जाने का दावा अपने आप में जांच का महत्वपूर्ण बिंदु है। पुलिस के सामने यह भी स्पष्ट करना होगा कि रकम किन परिस्थितियों में दी गई, लगातार भुगतान क्यों होता रहा और शिकायत दर्ज कराने में इतना समय क्यों लगा। यदि रकम वास्तव में दबाव या ब्लैकमेलिंग के कारण दी गई थी तो उससे जुड़े चैट, कॉल रिकॉर्ड, बैंक ट्रेल और अन्य डिजिटल साक्ष्य मामले की सच्चाई सामने लाने में महत्वपूर्ण होंगे।

 

शिकायतकर्ता ने आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है। अब पूरे मामले में बैंक रिकॉर्ड, रकम के स्रोत, भुगतान का उद्देश्य और डिजिटल साक्ष्यों की जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

 

इस खबर में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता की ओर से की गई शिकायत पर आधारित हैं। किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा रहा है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच और संबंधित पक्षों के बयान के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

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